जानिए, अग्निकांड में मारे गए दोनों जांबाजों के बारे में
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सेक्टर-17 में हुए अग्निकांड में मरने वालों में से एक नगर निगम के दमकल विभाग का कर्मचारी अमनदीप मूल रूप से मुक्तसर के मलोट का निवासी था। 15 दिन पहले ही उसका नयागांव की युवती के साथ रिश्ता पक्का हुआ था। सितंबर माह में उनकी शादी थी। साथ काम करने वाले कर्मचारी के अनुसार अमनदीप अपनी मंगेतर से काफी लंबे समय से प्यार करता था।
जब परिवार शव को गाड़ी से ले गया तो प्रवेश द्वार के पास खड़ी उसकी मंगेतर भी एक दम से बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। अमन के शव को देख उसे विश्वास नहीं था कि अमन की ही मौत हुई है।
इस पर मंगेतर ने एक मीडियाकर्मी के कैमरामैन से शव की तस्वीर देखी। अमनदीप के पिता दर्शन सिंह पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर हैं जबकि छोटा भाई भी पंजाब पुलिस में है। चचेरे भाई गुरचरण सिह पंजाब सीएम के ओएसडी हैं। वह ही पोस्टमार्टम के बाद शव लेने के लिए आए थे।
एयरफोर्स के दिलेर जांबाज थे रविंद्र शर्मा
मरने वालों में दूसरा फायर फायटर रविंद्र शर्मा एयरफोर्स के दमकल विभाग में तैनात था। रविंद्र शर्मा डड्डूमाजरा गांव में अपने परिवार के साथ रहता था। रविंद्र गांव में बिट्टू के नाम से जाना जाता है। एयरफोर्स में साथ काम करने वाले एक युवक मनीष ने बताया कि रविंद्र शर्मा काफी दिलेर थे।
जब भी कहीं आग बुझाने के लिए वह जाते तो वह नए लड़कों को हमेशा पीछे रहकर फॉलो करने के लिए कहते थे। खुद आग का मुकाबला करने के लिए इमारत के भीतर पहुंच जाते थे। रविंद्र शर्मा की पत्नी सविता गहरे सदमे में है।
रविवार को रविंद्र शर्मा अपने गांव की ही एक लड़की के संस्कार में शामिल होने के लिए गया था। जब वह वापस आया था तो तभी सेक्टर-17 में लगने की घटना हुई और उसे एयरफोर्स में बुला लिया गया। रविंद्र शर्मा की मौत से पूरा डड्डूमाजरा गांव शोक में है। सोमवार दोपहर को तो कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
पापा कह कर गए थे कि जल्दी आ रहा हूं
बेटी मनीषा ने हाल ही में दसवी कक्षा की पढ़ाई पूरी की है। पिता की मौत की खबर सुनने के बाद मनीषा कई बार बेहोश होकर गिर भी चुकी है। बेटी रोते हुए हर किसी को कह रही थी पापा जाने से पहले कह कर गए थे जल्द आ रहा हूं। प्लीज कोई मेरे पापा को ले आओ।
रविंद्र शर्मा का छोटा बेटा विशाल सेक्टर-39 के सरकारी स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ता है। वह अपने पिता के संस्कार में शामिल नहीं हो सका क्योंकि विशाल गोवा में जूडो कराटे की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए गया हुआ है। उसे पिता की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। रविंद्र शर्मा की बुजुर्ग मां बीमार है। शव के पास बैठी मां के आंसू नहीं थम रहे थे।
बड़े बेटे के लिए मांगी नौकरी
रविंद्र शर्मा के शव का संस्कार गांव के ही श्मशान घाट में किया गया। संस्कार के मौके पर एयरफोर्स और प्रशासन के अधिकारी भी पहुंचे। इसके बाद सलाहकार केके शर्मा, आईजी आरपी उपाध्याय, नगर निगम के कमिश्नर विवेक प्रताप सिंह, एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल और एयरफोर्स के अधिकारी एके बारीक परिजनों के साथ मिले।
गांव वालों ने बड़े बेटे धीरज शर्मा के लिए नौकरी की मांग की, जिस पर सलाहकार ने आश्वासन दिया कि नौकरी दिलवाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। परिवार के साथ प्रशासन पूरी तरह से खड़ा है। बड़ा बेटा इस समय निजी नौकरी कर रहा है।
दिल्ली की तर्ज पर मिले नौकरी
पोस्टमार्टम रूम के बाहर खड़े दमकल विभाग के कर्मचारियों ने काफी रोष जाहिर किया। इन कर्मचारियों का कहना है कि वह आग बुझाने के लिए अपनी जान भी देने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन नगर निगम कर्मचारियों का बीमा करवाने के लिए तैयार नहीं है।
उनका कहना है कि साल 2008 में फायरमैन अमरजीत की मौत ड्यूटी के दौरान हो गई थी, लेकिन अभी तक उसके परिवार के सदस्य को नौकरी नहीं मिली है अब अमनदीप की मौत के बाद से कर्मचारियों का मनोबल गिर गया।
एमसी फायर ब्रिगेड वर्कर्स वेलफेयर के महासचिव सुखविंद्र सिंह का कहना है कि दिल्ली में अगर किसी दमकल विभाग के कर्मचारी की मौत होती है तो एक माह के भीतर परिवार के सदस्य को नौकरी मिलती है।
ऐसा प्रावधान चंडीगढ़ प्रशासन को भी लागू करना चाहिए। उनका कहना है कि दमकल विभाग के कर्मचारी को रिस्क अलाउंस भी मिलना चाहिए बाकी राज्यों में इसे दिया जाता है।