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किसान आंदोलन : चार दिन पहले टीकरी बॉर्डर पहुंचे बठिंडा के किसान के सीने में भीषण दर्द, मौके पर चली गई जान

Fri, 09 Apr 2021 08:50 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 09 Apr 2021 08:50 PM IST
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Kisan Andolan News : Punjab Farmer died at Tikri border in Haryana
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत पंजाब के एक और किसान की हरियाणा के टीकरी बॉर्डर पर हृदयाघात से मौत हो गई है। पंजाब के बठिंडा के गांव जोगानंद के किसान यशपाल (52) पुत्र विचित्र सिंह आंदोलन में काफी समय से सक्रिय थे। शुक्रवार को हृदयाघात से उनकी मौत हो गई। उन्हीं के गांव के साथी किसान दीदार सिंह ने बताया कि कुछ दिन से खेती के काम से गांव गए थे। 

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पांच अप्रैल को वह धरने में शामिल होने टीकरी बॉर्डर आए थे। दिन में हर रोज टीकरी बॉर्डर सभा में शामिल होते। शुक्रवार को बॉर्डर की सभा खत्म होने के बाद एमएआइई पुलिस चौकी के सामने मेट्रो पिलर नंबर 763 के पास टेंट में आ गए। दीदार सिंह ने बताया कि लगभग साढ़े चार बजे यशपाल साथी किसानों के साथ बैठे थे कि अचानक उनकी छाती में भीषण दर्द होने लगा। 
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साथी किसान उनको अस्पताल ले जा पाते, उससे पहले ही मौके पर ही उनकी मौत हो गई। साथियों के अनुसार यशपाल की मौत हृदयाघात से हुई है। सूचना मिलने पर चौकी से पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचित किया और कार्रवाई कर शव को नागरिक अस्पताल के शव गृह पहुंचाया। जहां शनिवार को पोस्टमार्टम होगा। यशपाल तीन बेटियों और एक बेटे समेत चार बच्चों के पिता थे। दो बड़ी बेटियां विवाहित हैं।
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आज केएमपी जाम करेंगे किसान
उधर, चार माह से अधिक समय से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसान 10 अप्रैल को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (केएमपी) को जाम करेंगे। किसान सुबह आठ बजे ही केएमपी की तरफ रवाना हो जाएंगे और 11 बजे पूर्ण रूप से केएमपी को बंद कर देंगे। जाम 11 अप्रैल 11 बजे तक चलेगा। इसके बाद किसान दिल्ली कूच करने की आगामी रणनीति तैयार करेंगे। 


हरियाणा संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर और किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि हमें किसी भी हाल में कृषि कानून स्वीकार्य नहीं हैं। इन कानूनों को बनाने से पहले सरकार ने किसानों से किसी भी तरह की कोई राय नहीं ली। जब किसान ही इन कानूनों को नहीं मानते तो इसका क्या फायदा। सरकार को तत्काल प्रभाव से इनको वापस लेने की जरूरत है। 

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