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किसान आंदोलनः आज तय होगी अगली रणनीति, बैठक में बड़े फैसले लेने पर रहेगा जोर

Sun, 28 Feb 2021 12:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक/चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक/चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 28 Feb 2021 12:28 AM IST
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Kisan Andolan news: next strategy will be decided today
किसान नेता राकेश टिकैत - फोटो : पीटीआई

कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहे किसान आंदोलन की अगली रणनीति आज संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में तय होगी। इसमें बड़े फैसले लिए जाने का जोर दिया जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। इस बीच बॉर्डर पर शनिवार को आंदोलनकारी किसानों ने शहीद चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस व संत गुरु रविदास की जयंती मनाई। जींद में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश ने कहा कि किसान आंदोलन सही दिशा में जा रहा है। सरकार को किसानों की मांगें माननी होंगी।

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इधर, पंजाब में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के आह्वान पर पांच मार्च को हजारों किसान दिल्ली धरने के लिए रवाना होंगे। सूबे के जलालाबाद में संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं अबोहर में भाजपा नेताओं के गांव में घुसने पर प्रतिबंध लगाने का ग्रामीणों ने फैसला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि भाजपा नेता उनके गांव में वोट मांगने न आए। कोई भाजपा नेता गांव में वोट मांगने आता है तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
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किसानों के समर्थन में सोनीपत में बड़वासनी से गोहाना तक ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। किसानों ने सोनीपत-गोहाना नेशनल हाईवे पर धरना दिया। झज्जर के आसपास के गांवों से किसान ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर ढांसा व टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन को समर्थन देने के लिए पहुंचे। वहीं पंजाब से दो रेलगाड़ियों से सैकड़ों किसान टीकरी बॉर्डर पहुंचे। 
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कृषि कानून किसानों के लिए विकल्प हैं, बाध्यता नहीं : शिक्षा मंत्री
शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा है कि कृषि कानूनों के माध्यम से सरकार ने किसानों को मंडी के साथ-साथ अन्य जगह अपनी फसल बेचने के विकल्प दिए हैं। कृषि कानून किसानों के लिए विकल्प हैं, बाध्यता नहीं हैं।


शिक्षामंत्री शनिवार को भाजपा कार्यालय में राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स व विधायक विनोद भयाना के साथ पार्टी पदाधिकारियों व प्रबुद्घजनों के साथ कृषि कानूनों को लेकर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौका परस्त ताकतें अपने हित साध रही हैं। एक बड़ा भ्रम पैदा किया जा रहा है कि कांट्रैक्ट फार्मिंग जैसे प्रावधानों से किसानों की जमीन छीन ली जाएगी।

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