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किसानों के पुस्तकालय में उपलब्ध हैं हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी की किताबें, बोले- साहित्य से मिल रही प्रेरणा

Thu, 07 Jan 2021 02:16 AM IST
ajay kumar शील भारद्वाज, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
शील भारद्वाज, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 07 Jan 2021 02:16 AM IST
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Kisan Andolan: Library at Tikri Border provide books to Farmers In Many Languages
टीकरी बॉर्डर पर खुला पुस्तकालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

टीकरी बॉर्डर पर मनोरंजन के विभिन्न साधन किसानों के बहुत मददगार साबित हो रहे हैं। इंटरनेट, टीवी और स्थानीय लोक गायकों के अलावा साहित्य से भी आंदोलनकारी बहुत लाभ उठा रहे हैं। इन्हें इन पुस्तकों में लिखे शब्दों से प्रेरणा मिल रही है। घरों से दूर इन किसानों को रुचिकर साहित्य उपलब्ध कराने के लिए बठिंडा के कुछ समाजसेवियों ने लाइब्रेरी की व्यवस्था की है।

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टीकरी बॉर्डर से जाखोदा बाईपास तक, पकौड़ा चौक के पास निर्माणाधीन ऑटो मार्केट के मैदान में, सेक्टर-9 के निकट नए बस अड्डा परिसर और सेक्टर-9 मोड़ से बहादुरगढ़ सिटी मेट्रो स्टेशन तक किसानों का जमावड़ा है। इन किसानों ने एंड्रायड फोन के सहारे समय व्यतीत करने के साथ ट्रालियों में टीवी भी लगाई है। काफी आंदोलनकारी किताबें पढ़ने में रुचि ले रहे हैं। सेक्टर-9 के सामने पेट्रोल पंप परिसर में बठिंडा के कुछ लोग लाइब्रेरी चला रहे हैं।
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गायत्री मंत्र से लेकर सरदार भगत सिंह से संबंधित किताबें हैं मौजूद 
इस पुस्तकालय में पंजाबी की किताबों की अधिकता है लेकिन सुभाषिणी कपूर की महिलाओं का पुलिस में योगदान, सरोज शर्मा की सर्वशक्तिमान गायत्री मंत्र, पुश्किन का उपन्यास बदला और मेजर सिंह द्वारा संग्रहीत आर्टिकल्स ऑफ फेथ भी जैसी पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय छात्रों के लिए डॉ. वेंकट शर्मा की आलोचनात्मक पुस्तक हिंदी गद्य के आयाम जैसी कई पुस्तकें यहां हैं।

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लाइब्रेरी से कुछ साहित्य मुफ्त बांटा भी जा रहा है। इन पुस्तकों को वापस नहीं लिया जाता। कई लेखक व प्रकाशक भी किसानों के पड़ाव में किताबें बांटते हैं। भारत में खेती, वीर भगत सिंह और पंचनद प्रदेश पंजाब जैसी कई किताबें सैकड़ों की संख्या में यहां बांटी जा चुकी हैं। लूणा, चिट्टा लहू, ऐहो हमारा जीवणा, जवाहर लाल नेहरू: द ज्वेल्ज ऑफ इंडिया और प्रो. पूर्ण सिंह द्वारा लिखित द टेन मास्टर्स को भी लाइब्रेरी संचालकों ने किसानों को नि:शुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध करवाया है। 

पाठक बोले- अध्ययन के लिए लाइब्रेरी जरूरी
नए बस अड्डे के पास अपनी ट्रॉली में मौजूद बुढलाडा से आए अरुण कुमार (48) ने बताया कि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के बाद मैं हर रोज दो-तीन घंटे किताबें पढ़ता हूं। फिलहाल मैं रजनीकांत लहरी की ‘अनंत की ओर’ पढ़ रहा हूं। यह मुझे पेट्रोल पंप पर खोली गई लाइब्रेरी से निशुल्क मिली है। 

बठिंडा के सर्वजीत सिंह ने बताया कि वह हर रोज दो घंटे अध्ययन करते हैं। घर से तीन किताबें लेकर आए थे। अब लाइब्रेरी से मदद मिल रही है। मोगा के युवा हर्षदीप सिंह ने लाइब्रेरी से पढ़ने के लिए ‘मेटरनल हेल्थ केस स्टडीज फ्रॉम इंडिया’ ली। उन्होंने बताया कि यहां लाइब्रेरी में किताबें बेशक बहुत कम संख्या में हैं लेकिन ऐसी जगह लाइब्रेरी देखकर दिल खुश हो गया। 

बठिंडा के बुजुर्ग गुरमेल सिंह ने लाइब्रेरी से ‘दुनिया तों न्यारे गुरु गोविंद सिंह’ में रुचि दिखाई। आंदोलन शुरू होने के बाद यह लाइब्रेरी 30 नवंबर को शुरू हुई। यहां मौजूद सुखदेव सिंह के मुताबिक अब तक 1108 लोग यहां से सेवा ले चुके हैं। लाइब्रेरी को संभाल रहे बठिंडा के संदीप सिंह ने बताया कि युवा आंदोलनकारी आधुनिक साहित्य में रुचि ले रहे हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बुजुर्ग धर्म-कर्म की किताबों में रुचि दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि सोनिया सिंह यहां से धार्मिक किताब लेकर जाती हैं और आंदोलनकारी महिलाओं को पढ़कर सुनाती हैं। पढ़ने के बाद सभी लोग पुस्तक लौटा जाते हैं।

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