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चंडीगढ़: डॉ. किरण बेदी बोलीं- घर से शुरू होता है भेदभाव, बेटी को बेटे के समान दर्जा मिले तो खत्म होगी असमानता
Mon, 17 Jan 2022 12:00 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 17 Jan 2022 12:00 AM IST
सार
चंडीगढ़ स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल में एसडीजी समीट के अंतिम दिन किरण बेदी ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि बेटियों के साथ भेदभाव घर से शुरू होता है। अगर बेटों के समान अवसर व दर्जा मिले तो इस असमानता को खत्म किया जा सकता है।
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किरण बेदी
- फोटो : Facebook
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विस्तार
सेक्रेड हार्ट स्कूल-26 में चल रहे तीन दिवसीय एसडीजी सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को सतत विकास लक्ष्यों पर चर्चा हुई। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ चर्चा करने के लिए मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेता व पूर्व आईपीएस डॉ. किरण बेदी शामिल हुईं।
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डॉ. बेदी ने विद्यार्थियों की ओर से पूछे सवाल में बताया कि पर्यावरण और समाज में व्याप्त असमानता को इंसानियत के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने समझाया कि घर से भेदभाव शुरू होता है। मां-बाप बेटी को बेटे के समान दर्जा दें तो असमानता खत्म होगी और उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। इस कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर था।
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डॉ. किरण ने रिश्तेदार, स्कूल और कॉलेज के शिक्षक हमारी जिंदगी में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर हमारा स्वभाव बेटियों और बेटों को समान दर्जा दें तो देश और विश्व में अपने आप ही समानता आ जाएगी। इसके लिए नीतियों की जरूरत नहीं पड़ेगी, समानता हमारे व्यवहार से शुरू होती है, इसलिए घर से बदलाव की शुरुआत होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि अगर पर्यावरण की बात करें तो इंसान और देशों के प्रगति के लिए लालच ने पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। पर्यावरण और समाज दोनों को हम सिर्फ और सिर्फ इंसानियत और प्यार के भाव से बचा सकते हैं। हम अपने स्तर पर जहां भी है दूसरों के प्रति प्यार और सम्मान भाव रखें। प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करें, पानी का दुरुपयोग न करें और पेड़ लगाएं तो हम दुनिया को बचा सकते हैं और यहीं यूनाइटेड नेशंस के सतत विकास लक्ष्य भी है।
हमेशा सीखते रहिए
डॉ. किरण ने विद्यार्थियों को सफलता के तीन लक्ष्य बताए। पहला- हमेशा पढ़ते रहिए, सीखना कभी बंद न करें और अपने कौशल को बढ़ाते रहें। दूसरा- मेंबर ऑफ कम्यूनिटी, अपने आसपास के समाज का हिस्सा बनें और जरूरतमंदों की मदद करते रहिए और लोगों को समस्याओं के प्रति जागरूक करते रहिए। तीसरा- मीनिंग इन लाइफ, जिंदगी में एक उद्देश्य ढूंढिए और उस पर काम करें।
डिबेट में जैसमीन रही विजेता
तीन दिन चली प्रतियोगिताओं में देशभर से 33 स्कूलों के 400 के करीब विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें डिबेट में प्रथम जैसमीन और अरनायका, बेस्ट डिबेटर हितेन, नुक्कड़ नाटक में अमनजीत, गोविंद, मनप्रीत व टीम, पोस्टर बनाने में बेस्ट पोस्टर मेकर अदिती शर्मा, जैम (जस्ट ए मिनट) में भव्या गौतम प्रथम व बेस्ट स्पीकर अंशिका रही। स्कूल प्राचार्य सिस्टर आरती ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें बधाई दी। सिस्टर ने बताया कि एसडीजी समीट ने बच्चों को दुनिया के मुद्दों पर अपने विचार रखने के लिए विश्व स्तर का मंच उपलब्ध करवाया। उम्मीद है कि विद्यार्थी यहां से सीखे गए गुणों को अपनी जिंदगी में अमल करेंगे। सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक श्याम कपूर ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी।