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Chandigarh News: वाहन फर्म पर की मेहरबानी, अब ईटीओ पर कार्रवाई की तैयारी
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चंडीगढ़। इंडस्ट्रियल एरिया की एक मोटर वाहन फर्म से जुर्माने की राशि 2.15 करोड़ रुपये का पोस्ट डेटेड चेक लेकर बैंक में जमा न करवाने की मेहरबानी करने वाले ईटीओ पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। आरोप है कि ईटीओ ने फर्म की 129 गाड़ियां गलत तरीके से छोड़ दिया, जबकि विभाग ने इन वाहनों को जब्त कर रखा था। अब विजिलेंस जांच के बाद ईटीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। वहीं, अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू करने का फैसला लिया गया है। तत्कालीन ईटीओ चंडीगढ़ में प्रतिनियुक्ति समाप्ति होने के बाद पंजाब सरकार में अपने मूल विभाग में वापस लौट चुका है। चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब सरकार के साथ समन्वय कर संबंधित अधिकारी पर बड़ा जुर्माना लगाने की तैयारी में है।
जानकारी के अनुसार आबकारी एवं कराधान विभाग ने वर्ष 2013 के दौरान चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 से संबंधित एक मोटर वाहन फर्म के व्यावसायिक परिसर का निरीक्षण किया था। उस दौरान यह सामने आया कि वेयरहाउस और शोरूम में 351 वाहन पड़े हुए थे, लेकिन उन वाहनों के संबंधित खरीद वाउचर उपलब्ध नहीं थे। विभाग ने दस्तावेजों की जांच के बाद 222 वाहनों को छोड़ दिया। मोटर वाहन फर्म शेष बचे 129 वाहनों के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, लिहाजा उस पर विभाग की ओर से 1.74 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। कुछ समय बाद आबकारी और कराधान विभाग के अधिकारी (ईटीओ) ने 2.15 करोड़ रुपये की कुल राशि के चार पोस्ट-डेटेड चेक लेकर इन 129 वाहनों को छोड़ दिया। आबकारी और कराधान विभाग की ओर से चार चेक बैंक में वैधता अवधि के भीतर जमा नहीं किए गए और उनकी अवधि खत्म हो गई।
इस पूरे मामले की जांच चंडीगढ़ प्रशासन के विजिलेंस विभाग (सतर्कता विभाग) ने की है। मामले के तथ्यों और जांच रिपोर्ट को देखने के बाद यूटी प्रशासक के सलाहकार और चीफ विजिलेंस अफसर डॉ. धर्मपाल ने तत्कालीन ईटीओ के खिलाफ बड़े दंड के तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। चूंकि तत्कालीन ईटीओ पहले ही पंजाब सरकार में अपने मूल विभाग में वापस लौट चुका है, लिहाजा पंजाब सरकार के साथ समन्वय कर बड़ी जुर्माने की कार्रवाई करने की तैयारी है।
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डॉ. धर्मपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारी और अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका व मिलीभगत या चूक रही है, उसका भी पता लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी दोषियों पर कार्रवाई की जा सके और उनकी प्रकरण में जिम्मेदारी तय हो सके।
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जानकारी के अनुसार आबकारी एवं कराधान विभाग ने वर्ष 2013 के दौरान चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 से संबंधित एक मोटर वाहन फर्म के व्यावसायिक परिसर का निरीक्षण किया था। उस दौरान यह सामने आया कि वेयरहाउस और शोरूम में 351 वाहन पड़े हुए थे, लेकिन उन वाहनों के संबंधित खरीद वाउचर उपलब्ध नहीं थे। विभाग ने दस्तावेजों की जांच के बाद 222 वाहनों को छोड़ दिया। मोटर वाहन फर्म शेष बचे 129 वाहनों के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, लिहाजा उस पर विभाग की ओर से 1.74 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। कुछ समय बाद आबकारी और कराधान विभाग के अधिकारी (ईटीओ) ने 2.15 करोड़ रुपये की कुल राशि के चार पोस्ट-डेटेड चेक लेकर इन 129 वाहनों को छोड़ दिया। आबकारी और कराधान विभाग की ओर से चार चेक बैंक में वैधता अवधि के भीतर जमा नहीं किए गए और उनकी अवधि खत्म हो गई।
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इस पूरे मामले की जांच चंडीगढ़ प्रशासन के विजिलेंस विभाग (सतर्कता विभाग) ने की है। मामले के तथ्यों और जांच रिपोर्ट को देखने के बाद यूटी प्रशासक के सलाहकार और चीफ विजिलेंस अफसर डॉ. धर्मपाल ने तत्कालीन ईटीओ के खिलाफ बड़े दंड के तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। चूंकि तत्कालीन ईटीओ पहले ही पंजाब सरकार में अपने मूल विभाग में वापस लौट चुका है, लिहाजा पंजाब सरकार के साथ समन्वय कर बड़ी जुर्माने की कार्रवाई करने की तैयारी है।
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डॉ. धर्मपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारी और अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका व मिलीभगत या चूक रही है, उसका भी पता लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी दोषियों पर कार्रवाई की जा सके और उनकी प्रकरण में जिम्मेदारी तय हो सके।