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Hindi News ›   Chandigarh ›   Khattar Govt about Pradeep Kasni Transfer Issue

सुनिए, कासनी के तबादले पर सरकार की सफाई

Thu, 01 Jan 2015 02:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 01 Jan 2015 02:03 PM IST
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Khattar Govt about Pradeep Kasni Transfer Issue

आईएएस प्रदीप कासनी के गुड़गांव के कमिश्नर पद से हुए तबादले के मामले में उठे विवाद के तूल पकड़ने पर हरियाणा सरकार ने सफाई दी है कि तबादला किसी दबाव में नहीं किया गया।

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हरियाणा राजस्व विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि जिला गुड़गांव के गांव हरसरू के संबंध में पूर्व मंडलायुक्त प्रदीप कासनी द्वारा सरकार को सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है, जबकि तबादले के बाद यह विवाद उठा था कि हरसरू में आठ एकड़ पंचायती जमीन गलत तरीके से प्राइवेट बिल्डिरों को देने के मामले में कासनी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा था, लेकिन सरकार का कहना है कि उसे कोई भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
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प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने यह पाया कि जगबीर सिंह, गांव हरसरू, तहसील व जिला गुड़गांव ने 25 नवंबर 2014 को कासनी को शिकायत दी थी। इस शिकायत की जांच कासनी ने की और 22 दिसंबर 2014 को उन्होंने आदेश दिया कि गुड़गांव के तत्कालीन तहसीलदार द्वारा 8 एकड़ भूमि के 8 इंतकाल गलत मंजूर किए गए हैं।
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कासनी ने यह भी पाया कि गलत मंजूर इंतकालों से राज्य सरकार को राजस्व की भारी हानि हुई है। कासनी ने गुड़गांव के कलेक्टर से कहा कि तथ्यों की बारीकी से जांच करें और 15 दिन के  भीतर सरकार के हित को सुरक्षित रखते हुए आदेश जारी करें।

प्रवक्ता ने कहा कि गुड़गांव के तत्कालीन मंडलायुक्त प्रदीप कासनी ने गुड़गांव के कलेक्टर को निर्देश दिए थे कि वे सभी आवश्यक कदम उठाएं और उनके 22 दिसंबर 2014 के आदेश कानूनी तौर पर तर्कसंगत है। इस मामले में कोई कापी या आदेश अभी तक सरकार को प्राप्त नहीं हुआ है।

गुड़गांव के कलेक्टर की ओर से निर्धारित 15 दिन की समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट देने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गुड़गांव कलेक्टर द्वारा की गई जांच में यदि किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो सरकार इसे गंभीरता से लेगी।

कासनी ने इस मामले में गुड़गांव के डीआरओ की वित्तीय शक्तियां छीन रखी हैं। वहां के तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ कासनी ने मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी।


सरकार पर आरोप लगा था कि कासनी यहां के कई जमीन घोटालों को उजागर करने वाले थे, जिसके बाद वहां की बिल्डर लॉबी नहीं चाहती थी कि कासनी ज्यादा पर ज्यादा देर तक रहें।

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