{"_id":"579397b34f1c1b4032c4b65a","slug":"khamosh-adalat-jari-hai-drama-play-punjab-kala-bhawan-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब कला भवन में दिखा लाचार महिला का दर्द 'खामोश अदालत जारी है' ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब कला भवन में दिखा लाचार महिला का दर्द 'खामोश अदालत जारी है'
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 23 Jul 2016 09:43 PM IST
विज्ञापन
punjab kala bhawan
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में शनिवार शाम खामोश अदालत जारी है नाटक का मंचन किया गया। इसके माध्यम से कलाकारों ने एक बेबश और लाचार महिला के दर्द को प्रदर्शित किया। कलाकारों ने इसके माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि पुरुषों के समाज में औरत को किस प्रकार हाशिये पर रखा गया, लेकिन वह इस मानसिकता से जूझते हुए खुद को उभारने का प्रयास जारी रखती है। इस नाटक के लेखक विजय तेंदुलकर हैं और इसका निर्देशन सोनू ने किया।
इस नाटक की मुख्य पात्र लीला बेनारे है। जो एक शिक्षिका होती है और स्कूल में पढ़ाती है। हर मोड़ पर उसका शोषण किया जाता है। लीला जब पुरुष प्रधान समाज के खिलाफ आवाज उठाना चाहती है तो उसे झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाता है। केस शुरू होता है और उस पर कई लांछन लगाए जाते हैं। उसके व्यक्तिगत जीवन पर भी तंज कसे जाते हैं।
आखिर में दिखाया गया कि वह लीला हौसला नहीं हारती है और मजबूती से उठ खड़ी होती है। निर्णय लेती है कि वह इस अन्याय के खिलाफ डर कर नहीं रहेगी और इसका डटकर मुकाबला करेगी। नाटक का मंचन भिवानी के मीरा थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने किया। इनमें अंजू हुड्डा, पुलकित आर्य, सतेंद्र सहरावत, संगीता और अरुण शर्मा शामिल थे।
विज्ञापन
नाटक में इन कलाकारों ने निभाया किरदार
लीला बेणारे - अंजू हुड्डा, सुखातमे - पुलक्ति आर्य, मिस्टर कांशीकर - सतेंद्र सहरावत, मिसेज कांशीकर- संगीता, पांगशे- अरुण शर्मा, लाइट एंड साउंड- विश्वजीत/ आशीष खन्ना
विज्ञापन
इस नाटक की मुख्य पात्र लीला बेनारे है। जो एक शिक्षिका होती है और स्कूल में पढ़ाती है। हर मोड़ पर उसका शोषण किया जाता है। लीला जब पुरुष प्रधान समाज के खिलाफ आवाज उठाना चाहती है तो उसे झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाता है। केस शुरू होता है और उस पर कई लांछन लगाए जाते हैं। उसके व्यक्तिगत जीवन पर भी तंज कसे जाते हैं।
विज्ञापन
आखिर में दिखाया गया कि वह लीला हौसला नहीं हारती है और मजबूती से उठ खड़ी होती है। निर्णय लेती है कि वह इस अन्याय के खिलाफ डर कर नहीं रहेगी और इसका डटकर मुकाबला करेगी। नाटक का मंचन भिवानी के मीरा थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने किया। इनमें अंजू हुड्डा, पुलकित आर्य, सतेंद्र सहरावत, संगीता और अरुण शर्मा शामिल थे।
विज्ञापन
नाटक में इन कलाकारों ने निभाया किरदार
लीला बेणारे - अंजू हुड्डा, सुखातमे - पुलक्ति आर्य, मिस्टर कांशीकर - सतेंद्र सहरावत, मिसेज कांशीकर- संगीता, पांगशे- अरुण शर्मा, लाइट एंड साउंड- विश्वजीत/ आशीष खन्ना