माइनॉरिटी शब्द पर आरिफ मोहम्मद को एतराज: कहा- संविधान ने सभी को एक समान दिया अधिकार... फिर कोई अल्पसंख्यक कैसे
आरिफ मोहम्मद खान ने अपने भाषण की शुरुआत माइनॉरिटी शब्द से की। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह पहला मौका है, जब वह किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जिसमें माइनॉरिटी शब्द का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब वह कांग्रेस में थे, तब माइनॉरिटी सेल की बैठक में भी जाने से मना कर देते थे।
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चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मंगलवार को एनआईडी की तरफ से ऑल इंडिया माइनॉरिटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पहुंचे। उन्होंने अपने भाषण में माइनॉरिटी शब्द पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि जब संविधान सभी को बराबर अधिकार देता है तो फिर कोई माइनॉरिटी कैसे हो सकता है।
कार्यक्रम में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन समेत विभिन्न धर्मों के गुरु व कई बुद्धिजीवी पहुंचे थे। विस्तृत चर्चा के बाद मंगलवार को यह भी तय हुआ है कि एनआईडी की तरफ से ऑल इंडिया माइनॉरिटी फाउंडेशन बनाया जाएगा, जिसमें सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व होगा। कार्यक्रम में मौजूद सभी ने इस पर हामी भी जताई और ऐसे प्रयास की सराहना की।
कार्यक्रम की शुरुआत चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू के स्वागत भाषण के साथ हुई। उन्होंने केंद्र की तरफ से माइनॉरिटी के लिए चलाई जा रही विभिन्न नीतियों का हवाला दिया और कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा भी पहुंचे थे। उन्होंने तीन तलाक को खत्म करने पर केंद्र की सरकार का धन्यवाद दिया और माइनॉरिटी के नेताओं पर कई सवाल उठाए। कहा कि जब एक विदेशी चैनल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई आरोप लगाए, उस समय वह सभी चुप रहे। कहा कि सबकुछ सिर्फ मिल जाए, ऐसा नहीं सोचना चाहिए।
सभी को साथ लाने की जरूरत हैः आरिफ मोहम्मद खान
आरिफ मोहम्मद खान ने अपने भाषण की शुरुआत माइनॉरिटी शब्द से की। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह पहला मौका है, जब वह किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जिसमें माइनॉरिटी शब्द का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब वह कांग्रेस में थे, तब माइनॉरिटी सेल की बैठक में भी जाने से मना कर देते थे। उन्होंने अपने जीवन की कई कहानियों का जिक्र करते हुए बताया कि संविधान ने सभी को बराबरी का अधिकार दिया है, इसलिए किसी को माइनॉरिटी कहना सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई खुद को माइनॉरिटी समझता है तो इसमें कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों को कहा कि शब्द का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। हिंदू-मुसलमान करने वाले नेताओं और मीडिया संस्थानों को भी उन्होंने नसीहत दी और ऐसा नहीं करने का आग्रह किया। कहा कि सभी को साथ लाने की जरूरत है, अलग करने की जरूरत नहीं है।
अगले 25 वर्ष देश के लिए बहुत महत्वपूर्णः डॉ. लोकेश मुनि
कार्यक्रम में जैन धर्म गुरु डॉ. लोकेश मुनि भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्ष देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सभी के लिए पहले राष्ट्र, उसके बाद जाति, दल आदि होने चाहिए। उन्होंने समान नागरिक संहिता के फायदे बताए और जल्द लागू करने की मांग की। कहा कि जब देश एक है, संविधान एक है, झंडा एक तो अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए।
उन्होंने आबादी के विस्फोट के बारे में भी विस्तार से बातचीत की और कहा कि ज्यादा आबादी होने की वजह से देश में लोक कल्याणकारी योजनाएं ऊंट के मुंह में जीरा के समान हो जाती हैं, इसलिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए भी कुछ करना चाहिए। इसके अलावा अन्य धर्मगुरुओं ने एकता का नारा दिया और सभी को एक साथ चलने का आह्वान किया।