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लक्ष्य को ध्यान में रख उसे हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास करें, मिलेगी सफलता

Sat, 26 Jun 2021 02:12 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 02:12 AM IST
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Keep the goal in mind, practice regularly to achieve it, you will get success
पंजाब के लिए जरूरी..
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लक्ष्य को ध्यान में रखकर उसे हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास करें, मिलेगी सफलता
पंजाब सिविल सर्विसेस के टॉपरों ने संघर्ष से लक्ष्य प्राप्ति तक के सफर के बारे में की चर्चा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब सिविल सर्विसेस (पीसीएस) में राज्य के साथ चंडीगढ़ से पढ़े विद्यार्थियों ने भी उच्चतम रैंक हासिल की है। कुछ दिन पहले पीसीएस के नतीजों की घोषणा की गई। शहर में एक कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को टॉपर्स ने अपने संघर्ष से लक्ष्य प्राप्ति तक के सफर के बारे में चर्चा की। टॉपर ने बताया कि सिविल सर्विस के लिए तैयारी करना एक लंबा सफर है। कई बार बहुत सी परिस्थितियों के कारण आपका मन पढ़ाई से हट जाता है। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार को तनाव नहीं लेना चाहिए, एक हफ्ते आराम करें। अपने लक्ष्य को हमेशा ध्यान में रखे और उसे हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास करें। इस परीक्षा में सही दिशा में नियमित अभ्यास रामबाण है।
स्टोरी - 1
दिन में पढ़ाता ट्यूशन.. रात को करता था तैयारी
बीटेक के बाद ही मैंने सिविल सर्विस के लिए तैयारी के लिए मन बना लिया था। इसलिए कोई नियमित नौकरी नहीं करने का फैसला किया। घर पर ही बच्चों को गणित और विज्ञान का ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। साथ ही दो घंटे एक कोचिंग इंस्टी्यूट में भी पढ़ाता था जिससे साथ में कुछ आय होती रही। अगर दिन में समय मिलता था तो कुछ देर पढ़ाई कर लेता था। पढ़ाई में किसी तरह का कोई समय व्यर्थ नहीं हो इसलिए मैं रात को 10 से लेकर सुबह 4 बजे तक पढ़ाई करता था। इस समय मैं पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ टेस्ट भी देता था। दिन में काम के साथ आराम कर लेता था। तैयारी के लिए अखबार पढ़ना बहुत जरूरी है, अखबार से आपके सोचने की प्रक्रिया और विचार विकसित होती है। मेरे पिता पवन शर्मा बिजनेसमैन और माता अनुपमा शर्मा गृहणी हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए पाठ्यक्रम पढ़ना 40 इसका प्रतिशत हिस्सा है, अन्य 60 प्रतिशत आपका अभ्यास ही है। इसलिए उम्मीदवारों को नियमित अभ्यास करना चाहिए।
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-करन शर्मा, जीएनई कॉलेज, लुधियाना से बीटेक करने वाले, पीसीएस में रैंक 57
स्टोरी - 2
पिता के सहयोग से हासिल किया लक्ष्य
थापर कॉलेज से बीटेक करने के बाद निजी कंपनी की नौकरी छोड़ सिविल सर्विस की तैयारी कर समाज के लिए काम करने का लक्ष्य तय किया। कॉरपोरेट नौकरी में आप पैसा बहुत अधिक कमा सकते हो, लेकिन वहां आप अपने काम से बहुत बार संतुष्ट नहीं होते। साढ़े चार साल की मेहनत के बाद पीसीएस परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल की है। मेरे सफर में पिता का बहुत अधिक योगदान है, उन्होंने हर मोड़ पर उन्हें हौसला दिय। परिणाम से दो दिन पहले मुझे तनाव के कारण नींद नहीं आ रही थी। पिता ने दो दिन मुझे अपने साथ रखा और हौसला दिया। पिता संजीव पाठक दुकानदार है और माता नीना पाठक गृहणी हैं। उम्मीदवारों को मैं यही कहना चाहूंगा कि यूपीएससी कुछ समय का सफर नहीं है, इसमें लंबा समय लग जाता है। इसलिए हमेशा खुद पर भरोसा रखो और रोजाना अभ्यास करो।
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-सचिन पाठक, थापर कॉलेज से बीटेक, पीसीएस में रैंक 3
स्टोरी - 3
नेटबॉल एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड, अब करेंगे समाज सेवा
मैं 14 साल से खेलों से जुड़ा हुआ हूं। पीसीएस में स्पोर्ट्स कैटेगरी में पहला स्थान मिला है। एसडी कॉलेज से बीए की है, इसके बाद ही सिविल सर्विस के जरिए समाज के लिए काम करने का मन बना लिया था। कोरोना लॉकडाउन के समय में अपना पूरा समय तैयारी को दिया। हर रविवार सीबीएल की वेबसाइट से फ्री प्रैक्टिस टेस्ट का अभ्यास कर तैयारी का आंकलन करता था। पिता जगजीत सिंह पंजाब पुलिस में है और माता गृहणी है। रोइंग की प्रैक्टिस सुखना लेक में करता था, इसलिए परीक्षा की तैयारी भी शहर में रहकर ही की। खेल से आप मानसिक और शारीरिक तौर से स्वस्थ रहते हो, जिसका आपको पढ़ाई के समय फायदा मिलता है।
-चंदनदीप सिंह, नेटबॉल में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडलिस्ट, पीयू में एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र
स्टोरी - 4
एमएससी में गोल्ड और पीसीएस में ली रैंक दो
मैंने पीसीएस परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की है। एमएससी में भी टॉप करने पर गोल्ड मेडल से नवाजा गया था। मैं मोहाली की रहने वाली हूं और एमएससी के बाद से पांच वर्ष से सिविल सर्विस के लिए तैयारी की। आजकल ऑनलाइन प्लेटफार्म पर टेस्ट सीरीज और पाठ्यक्रम के लिए मार्गदर्शन मिल जाता है। सिविल सर्विस की परीक्षा के लिए कोचिंग से ज्यादा उम्मीदवार का अभ्यास अधिक मायने रखता है। परिवार ने इस पूरे सफर में बहुत साथ दिया और यह सकारात्मकता उम्मीदवार के लिए बहुत जरूरी होती है। पिता लखवीर सिंह सरकारी नौकरी करते हैं और माता सुरिंदर कौर गृहणी है।

-मोनिका सैनी, पीयू में बायोटेक्नोलॉजी से एमएससी
स्टोरी - 5
स्वास्थ्य क्षेत्र में खराब हालातों को देखते हुए सिविल सर्विस में जाने का मन बनाया
पटियाला के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की प्रैक्टिस करने के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में खराब हालातों को देखते हुए सिविल सर्विस की तैयारी के लिए मन बनाया। मैंने पिम्स जालंधर से एमबीबीएस की है। डॉक्टर के तौर पर हम लोगों की सेवा कर सकते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव को पूरा नहीं कर सकते। मैंने 2017 में सिविल सर्विस के लिए तैयारी करनी शुरू की। तैयारी के साथ कोरोना महामारी के समय में मुफ्त में लोगों को कोविड के दौरान स्वास्थ्य देखरेख और टीकाकरण के लिए टेली कंसल्टिंग की सेवा देती थी। शुरुआत की नौ महीने कोचिंग ली थी, जिससे उन्हें पाठ्यक्रम का ज्ञान हो सके। इसके बाद उन्होंने सारी पढ़ाई खुद ही घर बैठकर की। मेरी मां डॉ. बलविंदर कौर पटियाला से डीएचओ के पद से सेवानिवृत्त हैं।
-डॉ. गुरलीन कौर सिद्धू, जनरल कैटेगरी में पीसीएस में छठा स्थान हासिल
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