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Chandigarh News: बढ़ती कमर पर रखें नजर, हो सकती है बीमारियों की शुरुआत
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चंडीगढ़। हमें न केवल वजन पर बल्कि कमर की परिधि पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कमर का बढ़ता दायरा बीमारियों की शुरूआत का संकेतक है। पुरुषों के लिए 94 सेंटीमीटर और महिलाओं के लिए 80 सेंटीमीटर से अधिक की कमर की परिधि विभिन्न बीमारियों के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है। यह जानकारी पीजीआई के डीन रिसर्च प्रो. संजय जैन ने शनिवार को डायटेटिक्स विभाग की ओर से एपीसी ऑडिटोरियम में बतौर मुख्य अतिथि दी।
पोषण माह के अंतर्गत मोटापा, मधुमेह और पीसीओएस थीम पर सार्वजनिक मंच जनता के साथ पीजीआई का हाथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य व कल्याण में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जागरुकता और संवाद को बढ़ावा देना था। सब डीन प्रो. आशिमा गोयल ने बताया कि डायबिटीज, पीसीओएस और मोटापा भारत में लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। पोषण के माध्यम से रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है। हम जो खाते हैं, उसका हमारे स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, और एक समुदाय के रूप में हमें आजीवन इन बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में पोषण को अपना सबसे मजबूत सहयोगी बनाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस अवसर पर पीजीआई की मुख्य आहार विशेषज्ञ और आहार विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. नैन्सी साहनी ने कहा कि फोरम जनता के लिए विशेषज्ञों के साथ जुड़ने और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में पोषण के महत्व के बारे में जानने का एक शानदार अवसर है।
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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में आहार की अहम भूमिका
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख प्रो. वनिता जैन ने बताया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए दो क्लीनिक चलाई जा रही है। यह एक ऐसी स्थिति है जो दस में से एक महिला को प्रभावित करती है। जीवनशैली में बदलाव और 5 प्रतिशत वजन घटाने से पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है, जिससे कई मामलों में दवा की जरूरत खत्म हो जाती है। पोषण और पीसीओएस का सीधा संबंध है, और सही हस्तक्षेप के साथ, पीसीओएस को उलटा किया जा सकता है। वहीं अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार ने आहार विज्ञान विभाग को उनके प्रयास के लिए बधाई दी। कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। इन स्थितियों को विकसित होने से रोकने के लिए स्वस्थ खान-पान की आदतें और जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।
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मोटापा सिर्फ वजन का बढ़ना नहीं
गैस्ट्राेएंटारोलॉजी विभाग के डॉ. विशाल ने कहा कि मोटापे को अक्सर केवल वजन बढ़ने के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह कहीं अधिक जटिल है और लगातार सीने में जलन का कारण बनता है। इससे जीईआरडी (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रिफ्लक्स रोग) जैसी कई गैस्ट्रोओसोफेगल समस्याएं होती हैं। वहीं, बाल चिकित्सा एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देवी दयाल ने बताया कि मोटापा एक पुरानी बीमारी है, जिसके लिए स्वस्थ खान-पान पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संजय भडाडा ने टाइप 2 मधुमेह पर चर्चा की, जिसमें अंधापन, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी पैदा करने में इसकी भूमिका बताई।
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पोषण माह के अंतर्गत मोटापा, मधुमेह और पीसीओएस थीम पर सार्वजनिक मंच जनता के साथ पीजीआई का हाथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य व कल्याण में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जागरुकता और संवाद को बढ़ावा देना था। सब डीन प्रो. आशिमा गोयल ने बताया कि डायबिटीज, पीसीओएस और मोटापा भारत में लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। पोषण के माध्यम से रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है। हम जो खाते हैं, उसका हमारे स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, और एक समुदाय के रूप में हमें आजीवन इन बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में पोषण को अपना सबसे मजबूत सहयोगी बनाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस अवसर पर पीजीआई की मुख्य आहार विशेषज्ञ और आहार विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. नैन्सी साहनी ने कहा कि फोरम जनता के लिए विशेषज्ञों के साथ जुड़ने और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में पोषण के महत्व के बारे में जानने का एक शानदार अवसर है।
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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में आहार की अहम भूमिका
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख प्रो. वनिता जैन ने बताया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए दो क्लीनिक चलाई जा रही है। यह एक ऐसी स्थिति है जो दस में से एक महिला को प्रभावित करती है। जीवनशैली में बदलाव और 5 प्रतिशत वजन घटाने से पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है, जिससे कई मामलों में दवा की जरूरत खत्म हो जाती है। पोषण और पीसीओएस का सीधा संबंध है, और सही हस्तक्षेप के साथ, पीसीओएस को उलटा किया जा सकता है। वहीं अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार ने आहार विज्ञान विभाग को उनके प्रयास के लिए बधाई दी। कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। इन स्थितियों को विकसित होने से रोकने के लिए स्वस्थ खान-पान की आदतें और जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।
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मोटापा सिर्फ वजन का बढ़ना नहीं
गैस्ट्राेएंटारोलॉजी विभाग के डॉ. विशाल ने कहा कि मोटापे को अक्सर केवल वजन बढ़ने के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह कहीं अधिक जटिल है और लगातार सीने में जलन का कारण बनता है। इससे जीईआरडी (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रिफ्लक्स रोग) जैसी कई गैस्ट्रोओसोफेगल समस्याएं होती हैं। वहीं, बाल चिकित्सा एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देवी दयाल ने बताया कि मोटापा एक पुरानी बीमारी है, जिसके लिए स्वस्थ खान-पान पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संजय भडाडा ने टाइप 2 मधुमेह पर चर्चा की, जिसमें अंधापन, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी पैदा करने में इसकी भूमिका बताई।