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चंडीगढ़: देश को झकझोरने वाले कठुआ रेपकांड में नया मोड, तिलक राज की सजा हाईकोर्ट ने की निलंबित
Fri, 17 Dec 2021 07:34 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 17 Dec 2021 07:34 PM IST
सार
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कठुआ रेपकांड मामले में आरोपी तिलकराज की सजा को निलंबित कर दिया है। 10 जनवरी 2018 को कठुआ में आठ साल की बच्ची का अपहरण किया गया था और इसके बाद 17 जनवरी को उस बच्ची की लाश मिली थी। पठानकोट के सत्र न्यायालय ने इस मामले में छह आरोपियों को दोषी करार दिया था।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश को झकझोर देने वाले जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेप कांड के आरोपी तिलकराज को राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी सजा निलंबित करने की अर्जी मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहते उसे रिहा करने का आदेश जारी किया है। गौरतलब है कि पठानकोट की सेशन कोर्ट ने इस मामले के 7 में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया था।
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मामले के मुख्य साजिशकर्ता सांजी राम, परवेश कुमार और पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पुलिस अफसर सुरेंद्र शर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और एसआई आनंद दत्ता को पांच-पांच साल कैद की सजा दी गई थी। इस सजा के खिलाफ कांस्टेबल तिलक राज ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसे एडमिट किया जा चुका है।
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अब तिलक राज ने अपील लंबित रहते सजा निलंबित करने की मांग की थी। याची ने कहा था कि वह 2 वर्ष 9 माह की सजा पहले ही काट चुका है और ऐसे में अब उसकी सजा निलंबित करने का आदेश जारी किया जाए। जम्मू और कश्मीर सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि यदि याची को रिहा किया गया तो कानून व्यवस्था का संकट पैदा हो जाएगा। हाईकोर्ट ने सरकार की दलील खारिज करते हुए कहा कि याची 9 माह पैरोल पर रह चुका है, तब समस्या नहीं आई थी। वैसे भी केवल शांतिभंग की आशंका के कारण याची को राहत से इनकार नहीं किया जा सकता।
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यह है मामला
10 जनवरी 2018 को कठुआ में आठ साल की बच्ची का अपहरण किया गया था और इसके बाद 17 जनवरी को उस बच्ची की लाश मिली थी। लाश क्षत-विक्षत स्थिति में मिली थी, जिसके चलते बहुत से धरने और प्रदर्शन भी हुए। इसके बाद पुलिस ने 15 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें बड़े खुलासे हुए थे। मामले में विवाद बढ़ता देख इसे केस को जम्मू-कश्मीर के बाहर पंजाब के पठानकोट में सुनवाई के लिए भेज दिया गया था। इसके बाद पठानकोट जिला अदालत ने आठ में से सात को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।