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कठुआ गैंगरेपः दर्ज हुए 115 गवाहों के बयान, अब सातों आरोपी बोलेंगे...जानें कब आएगा फैसला
Tue, 08 Jan 2019 11:14 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 08 Jan 2019 11:14 AM IST
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kathua accused
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बहुचर्चित कठुआ गैंगरेप केस में सभी 115 गवाहों के बयान दर्ज हो गए हैं। अब सातों आरोपी अपना मुंह खोलेंगे, और फिर आएगी फैसले की घड़ी। पठानकोट अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है। सोमवार को 115वें और आखिरी गवाह के बयान दर्ज कराए गए। आखिरी गवाह के रूप में क्राइम ब्रांच के एएसआई को पेश किया गया, जिसने घटना के बाद से कथित आरोपियों के मोबाइल संबंधी पड़ताल की थी। वहीं प्रोसिक्यूशन पक्ष ने कोर्ट में पत्र दाखिल करवा कहा कि उन्होंने अपने सभी गवाहों को पेश कर दिया है।
सरकारी पक्ष के स्पेशल प्रॉसिक्यूटर एसएस बसरा और जेके चोपड़ा ने बताया कि 115 गवाहों के साथ हमारे गवाह संपन्न हुए। मंगलवार से कोर्ट में सभी सातों कथित आरोपियों की सुनवाई शुरू होगी। इसमें कथित आरोपियों को बताया जाएगा कि किस गवाह ने उनके बारे क्या बयान दिए और क्या आरोप लगाए, इसमें उन्हें यह भी बताया जाएगा कि उनके ऊपर कौन-कौन से चार्ज फ्रेम हो सकते हैं। इस दौरान सभी कथित आरोपियों को बारी-बारी उनके ऊपर लगे आरोपों की जानकारी दी जाएगी और उनकी और उनके वकीलों को तर्क दर्ज करवाने और गवाह पेश करने का मौका दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया में 3 दिन का समय लग सकता है। जेके चोपड़ा ने बताया कि केस को सही समय और सही तरीके से निपटाने के चलते कुछ गवाहों को छोड़ दिया गया है। प्रोसिक्यूशन को लगता था कि छोड़े गए गवाह मामले को मुद्दे से भटका सकते हैं, इसलिए उनकी गवाही नहीं करवाई गई। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बचाव पक्ष भी अपने गवाह पेश करेगा। हालांकि गवाहों की संख्या स्पष्ट नहीं है। सूत्रों की मानें तो अगले 2 से 3 हफ्तों में बहुचर्चित कठुआ केस का फैसला सुनाया जा सकता है। अंदाजन फरवरी के दूसरे सप्ताह से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक इस केस में फैसला सुनाया जा सकता है।
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सरकारी पक्ष के स्पेशल प्रॉसिक्यूटर एसएस बसरा और जेके चोपड़ा ने बताया कि 115 गवाहों के साथ हमारे गवाह संपन्न हुए। मंगलवार से कोर्ट में सभी सातों कथित आरोपियों की सुनवाई शुरू होगी। इसमें कथित आरोपियों को बताया जाएगा कि किस गवाह ने उनके बारे क्या बयान दिए और क्या आरोप लगाए, इसमें उन्हें यह भी बताया जाएगा कि उनके ऊपर कौन-कौन से चार्ज फ्रेम हो सकते हैं। इस दौरान सभी कथित आरोपियों को बारी-बारी उनके ऊपर लगे आरोपों की जानकारी दी जाएगी और उनकी और उनके वकीलों को तर्क दर्ज करवाने और गवाह पेश करने का मौका दिया जाएगा।
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इस प्रक्रिया में 3 दिन का समय लग सकता है। जेके चोपड़ा ने बताया कि केस को सही समय और सही तरीके से निपटाने के चलते कुछ गवाहों को छोड़ दिया गया है। प्रोसिक्यूशन को लगता था कि छोड़े गए गवाह मामले को मुद्दे से भटका सकते हैं, इसलिए उनकी गवाही नहीं करवाई गई। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बचाव पक्ष भी अपने गवाह पेश करेगा। हालांकि गवाहों की संख्या स्पष्ट नहीं है। सूत्रों की मानें तो अगले 2 से 3 हफ्तों में बहुचर्चित कठुआ केस का फैसला सुनाया जा सकता है। अंदाजन फरवरी के दूसरे सप्ताह से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक इस केस में फैसला सुनाया जा सकता है।
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ये है मामला
जम्मू के कठुआ में 10 जनवरी 2018 को 8 साल की बच्ची लापता हो गई थी। 7 दिनों बाद उसकी लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली। मामले में सात आरोपी हैं- मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, सांझी राम, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार।
गांव रसाना में बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली बच्ची घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता मोहम्मद यूसुफ ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
हफ्ते भर तक कोई खोज-खबर नहीं मिलने के बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली थी। इस घटना ने देश भर को हिलाकर रख दिया था। घटना के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए थे और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई। फिलहाल केस कोर्ट में विचाराधीन है और बच्ची के लिए न्याय की आस लगाए बैठे हैं परिजन और देशवासी।
गांव रसाना में बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली बच्ची घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता मोहम्मद यूसुफ ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
हफ्ते भर तक कोई खोज-खबर नहीं मिलने के बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली थी। इस घटना ने देश भर को हिलाकर रख दिया था। घटना के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए थे और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई। फिलहाल केस कोर्ट में विचाराधीन है और बच्ची के लिए न्याय की आस लगाए बैठे हैं परिजन और देशवासी।