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कठुआ गैंगरेपः सातों आरोपियों की शिकायत पर गुरदासपुर जेल प्रशासन ने दी सफाई, कहते हैं...

Sat, 14 Jul 2018 02:10 PM IST
मनन सैनी, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
मनन सैनी, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब) Updated Sat, 14 Jul 2018 02:10 PM IST
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Kathua Gangrape Case Hearing in Pathankot Session Court
कठुआ केस के आरोपी
कठुआ रेप और हत्या के मामले में सातों आरोपियों ने जज से जो शिकायत की थी, उसके जवाब में गुरदासपुर जेल प्रशासन ने सफाई दी और मामला साफ किया। मामले में बचाव पक्ष के वकील मास्टर मोहन लाल ने अदालत को बताया कि गुरदासपुर सेंट्रल जेल की कैपेसिटी 826 कैदी रखने की है, जबकि अभी उसमें 1264 से 1300 के करीब कैदी और हवालाती रखे हुए हैं। जेल में पहले ही क्षमता से ज्यादा कैदी हैं।
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इस बारे में जेल प्रशासन ने कहा कि वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। फिर भी जेल एसपी करणजीत सिंह ने आश्वासन दिया कि कुछ न कुछ हल जरूर निकाला जाएगा। मामले के आरोपियों को खाना न दिए जाने के संबंध में जेल प्रशासन का कहना है कि यह अपने आप में पहला केस है, जिसकी रोज सुनवाई हो रही है। आरोपियों के लिए लंच का इंतजाम करने के लिए उन्हें पहले अपने उच्च अधिकारियों से फंड दिए जाने के बारे में बात करनी पड़ेगी। क्योंकि पता नहीं यह केस कब तक चले।
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बता दें कि वीरवार को सेशन जज तजविंदर सिंह की अदालत में आरोपियों ने शिकायत दी थी कि उन्हें उम्रकैद के कैदियों के साथ रखा गया। न तो उन्हें खाना दिया गया न सोने के लिए बिस्तर। तीन को एक कोठरी तथा चार को दूसरी कोठरी में रखा गया। जहां उन्होंने एक तौलिया बिछाकर जैसे-तैसे रात बिताई। कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकील मास्टर मोहन लाल को केंद्रीय जेल में इस बाबत जांच के लिए भेजा था।
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थाना प्रभारी की जिरह कराने को कहा, प्रोसिक्यूशन मुकरा

Kathua Gangrape Case Hearing in Pathankot Session Court
कठुआ केस के आरोपी
बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने बताया कि करीब साढ़े तीन बजे जज ने प्रोसिक्यूशन को थाना प्रभारी की जिरह कराने के लिए कहा। लेकिन प्रोसिक्यूशन ने मना कर दिया, क्योंकि शायद वह गवाह को डिस्क्लोज नहीं करना चाहते थे। बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि यह बहुत गलत है अगर आज उसकी जिरह होती तो कई कड़ियां बाहर आ सकती थीं। उन्होंने कहा कि ऐेसे तो बयान खत्म ही नहीं होंगे।

उन्होंने शुक्रवार को फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश संबंधी कहा कि प्रोसिक्यूशन को अपना गवाह पेश करने से पहले बाकायदा तीन दिन का नोटिस देना पड़ता है। लेकिन यहां हम रोज 226 के कागज अपने साथ ला रहे हैं। नहीं पता प्रोसिक्यूशन किसको गवाही के लिए खड़ा कर दे। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में जिरह करने के लिए तीन माह का समय हर बचाव पक्ष को दिया जाता है। लेकिन यहां कुछ और ही चल रहा है

बचाव पक्ष झूठ बोल रहा है: संतोख सिंह
इस संबंध में जब प्रोसिक्यूशन के वकील संतोख सिंह बसरा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष झूठ बोल रहा है। शुक्रवार को क्रॉस एग्जामिन पूरा हो चुका था और समय पूरा हो गया था। हमने बचाव पक्ष को गवाहों की लिस्ट सौंपी हुई है। उसी के अनुसार गवाहों को पेश किया जा रहा है।

बीड़ियों के संबंध में दिया जवाब
आरोपियों से बीड़ियों के 50 बंडल मिलने के संबंध में एडवोकेट साहनी ने कहा कि जम्मू कश्मीर रियासत में मुसलमानों के लिए बीड़ियां जरूरी होती हैं, क्योंकि उन्हें उसकी आदत होती है। इसलिए जम्मू कश्मीर में बीड़ियां हर जेल की कैंटीन में मिलती हैं। अब गुरदासपुर जेल के अधिकारियों को यह तय करना होगा कि क्या वह आरएसी रूल फॉलो करते हैं या पंजाब का।
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