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कठुआ गैंगरेपः आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका, मास्टरमाइंड के खिलाफ चालान पेश नहीं कर रहे डीजीपी

Sat, 11 Aug 2018 11:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/पठानकोट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/पठानकोट Updated Sat, 11 Aug 2018 11:09 AM IST
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Kathua Gangrape and Murder Case Hearing in Pathnakot, Highcourt
कठुआ के आरोपी
कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले के आरोपियों को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। वहीं कहा जा रहा है कि डीजीपी क्राइम ब्रांच हत्याकांड के मास्टरमाइंड के खिलाफ चालान पेश नहीं कर रहे। कठुआ दुष्कर्म और हत्या के मामले में वीरवार को 32 से 35वें गवाहों के बयान पर बहस हुई।
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बचाव पक्ष का कहना है कि अगर इसी तेजी के साथ गवाहों के बयान दर्ज होते रहे तो जल्द ही केस का निपटारा हो जाएगा। वहीं मास्टरमाइंड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में लगाई हैबियस कॉरपस पिटीशन पर बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने कहा कि इसके साथ सांबा थाने में मारपीट नहीं की गई, बल्कि इसने खुद सुसाइड की कोशिश की थी।
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इस संबंध में जांच शुरू हो गई है। इसके खिलाफ धारा 164 सहित अन्य बयान मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए हैं, जो बच गए हैं वो शनिवार को रिकॉर्ड हो जाएंगे। मास्टरमाइंड ने सुसाइड की कोशिश की और मारपीट का ड्रामा रचा है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में जा सके।
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साहनी ने कहा कि ऐसे हिस्ट्रीशीटर, जिस पर 307 के मामले दर्ज हैं, जिसमें इसने पुलिस मुलाजिमों तक को पीटा है, उसमें किसी पुलिस अधिकारी ने इसे हाथ नहीं लगाया तो अब उसे कौन पीट सकता है। अब तो यह रेप केस में सांबा पुलिस की कस्टडी में है।

मास्टरमाइंड के खिलाफ चालान पेश नहीं कर रहे डीजीपी
साहनी ने कहा कि मास्टरमाइंड की ओर से हीरानगर थाने पर हमले के संबंध में जो चालान है, डीजीपी उसे कोर्ट में पेश करें। उन्होंने कहा कि पता नहीं क्यों डीजीपी क्राइम ब्रांच इस मास्टरमाइंड को बचाने में लगे हैं, जबकि जहां पुलिस का इंट्रेस्ट हो वहां 10 दिन में इन्क्वायरी पूरी कर ली जाती है। लेकिन इस मामले में वर्षों तक इन्क्वायरी नहीं होगी और न ही चालान पेश किया जाएगा।

उन्होंने हीरानगर थाने पर हमले के मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई। साहनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉरपस मामले में 21 अगस्त को डीजीपी क्राइम ब्रांच को पुलिस का पक्ष रखने खुद जाना चाहिए और मास्टरमाइंड के खिलाफ कॉलेज टाइम से अब तक दर्ज सारी एफआईआर पेश करनी चाहिए।

हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Kathua Gangrape and Murder Case Hearing in Pathnakot, Highcourt
कठुआ के आरोपी - फोटो : amar ujala
कठुआ प्रकरण के सह आरोपी विशाल जंगोत्रा व सांझी राम की मामले की सीबीआई जांच की अपील को नामंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने का सुझाव दिया है। विशाल जंगोत्रा और सांझी राम ने मामला सीबीआई को सौंपने की अपील करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

दोनों आरोपियों ने याचिका में कहा था कि इस प्रकरण की जांच के लिए लिए तीन बार एसआईटी बनाई गई। पहली और दूसरी एसआईटी ने केवल शुभम को आरोपी माना था परंतु तीसरी एसआईटी ने इस मामले में सात अन्य को आरोपी बनाया था।

याची ने कहा कि जिस दौरान यह पूरा प्रकरण हुआ उसकी मौजूदगी कठुआ में दिखाई गई है, जबकि उस दौरान वह मेरठ में अपने कॉलेज में परीक्षा दे रहा था। इसके साक्ष्य के रूप में आंसर शीट, एटीएम की सीसीटीवी फुटेज और पीजी की मालिक का बयान है। लेकिन जांच एजेंसी इनको जांच का हिस्सा नहीं बना रही है।

पुलिस के अनुसार शुभम ने विशाल को फोन कर कठुआ बुलाया था और विशाल ने रेप और हत्या में भूमिका निभाई थी। घटना को अंजाम देकर विशाल वापिस लौट गया था।

सुप्रीम कोर्ट जाएं याची
याची ने कहा कि 12 जनवरी को यह एफआईआर दर्ज की गई थी। जबकि 12 जनवरी को उसका मेरठ में पेपर था और नाबालिग लड़की की हत्या 15 तारीख को की गई थी और 15 को भी उसकी परीक्षा थी। दोनों शहरों के बीच 700 किलोमीटर की दूरी है। 15 को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे के बीच परीक्षा में वह मौजूद था।

साथ ही दूसरा याची जो पहले का पिता है, उस पर आरोप है कि उसने खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए 6.5 लाख की रिश्वत दी। याची ने कहा कि उसके खाते से इतनी राशि निकली ही नहीं और ऐसे में उस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। पुलिस इस मामले में पिता-पुत्र को फंसाना चाहती है।

ऐसे में जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कोर्ट को बताया गया कि बच्ची के बायलॉजिकल पिता ने मई में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस का ट्रायल पठानकोट शिफ्ट कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिका हाईकोर्ट में मान्य नही है।

केस की निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है और ऐसे में याचिकाकर्ता सीबीआई जांच की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए।
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