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उपलब्धिः पांच दुर्गम चोटियों में कथक कर पाटियाला की बेटी ने बनाया तीसरी बार विश्व रिकॉर्ड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 26 Jun 2018 09:43 AM IST
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श्रुति गुप्ता
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पटियाला की कत्थक नृत्यांगना श्रुति गुप्ता ने तीसरी बार वर्ल्ड रिकार्ड अपने नाम किया है। श्रुति ने मनाली से लेह तक के रास्ते में पड़ने वाली पांच ऊंची चोटियों, जहां पर सांस लेना भी मुश्किल होता है, वहां सात से 10 मिनट तक कत्थक नृत्य कर लोगों को जल व वायु संरक्षण का संदेश दिया है।
श्रुति की इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और बेस्ट आफ इंडिया वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। इससे पहले श्रुति अक्तूबर 2015 और अक्तूबर 2016 में भी वर्ल्ड रिकार्ड बना चुकी हैं।
श्रुति ने अमर उजाला को बताया कि सेव नेचर एंड सेलिब्रेट नेचर थीम के तहत उन्होंने मनाली से लेह तक के रास्ते में रोहतांग पास, बारालाचा पास, नकीला पास, लाचुंगला पास और तांगलंगला पास में से हर एक पर सात से 10 मिनट तक कत्थक नृत्य पेश किया। श्रुति ने बताया कि इन सभी ऊंची चोटियों पर सांस लेना मुश्किल था।
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16 जून को जब उन्होंने यह रिकार्ड बनाया, उस दिन हवा काफी तेज थी और ठंड भी बहुत थी। हवा तेज के कारण उनकी आंखें व कान सूज गए थे। लेकिन उन्होंने दृढ़ निश्चय कर रखा था कि परफार्म कर लोगों को जल संरक्षण और वायु संरक्षण का संदेश देना है। पति के सहयोग से उन्होंने अपने इस मिशन को पूरा किया। श्रुति ने बताया कि तांगलंगला पास दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।
इस चोटी पर परफार्म करना काफी मुश्किल भरा रहा। ग्रैमी अवार्ड विजेता पंडित विश्व मोहन के संगीत पर उन्होंने अपनी परफार्मेंस दी। पानी व वायु संरक्षण का संदेश देती उन्होंने एक कहानी तैयार की थी। नृत्य के जरिये उन्होंने इस कहानी का वाचन किया, ताकि लोगों तक संदेश पहुंच सके। श्रुति ने कहा कि अपने इन नृत्य की पेशकारियों के जरिये उन्होंने अपने देश के जवानों को भी श्रद्धांजलि दी है, जो देश की सेवा में अपनी जानें गंवा रहे हैं।
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श्रुति की इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और बेस्ट आफ इंडिया वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। इससे पहले श्रुति अक्तूबर 2015 और अक्तूबर 2016 में भी वर्ल्ड रिकार्ड बना चुकी हैं।
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श्रुति ने अमर उजाला को बताया कि सेव नेचर एंड सेलिब्रेट नेचर थीम के तहत उन्होंने मनाली से लेह तक के रास्ते में रोहतांग पास, बारालाचा पास, नकीला पास, लाचुंगला पास और तांगलंगला पास में से हर एक पर सात से 10 मिनट तक कत्थक नृत्य पेश किया। श्रुति ने बताया कि इन सभी ऊंची चोटियों पर सांस लेना मुश्किल था।
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16 जून को जब उन्होंने यह रिकार्ड बनाया, उस दिन हवा काफी तेज थी और ठंड भी बहुत थी। हवा तेज के कारण उनकी आंखें व कान सूज गए थे। लेकिन उन्होंने दृढ़ निश्चय कर रखा था कि परफार्म कर लोगों को जल संरक्षण और वायु संरक्षण का संदेश देना है। पति के सहयोग से उन्होंने अपने इस मिशन को पूरा किया। श्रुति ने बताया कि तांगलंगला पास दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।
इस चोटी पर परफार्म करना काफी मुश्किल भरा रहा। ग्रैमी अवार्ड विजेता पंडित विश्व मोहन के संगीत पर उन्होंने अपनी परफार्मेंस दी। पानी व वायु संरक्षण का संदेश देती उन्होंने एक कहानी तैयार की थी। नृत्य के जरिये उन्होंने इस कहानी का वाचन किया, ताकि लोगों तक संदेश पहुंच सके। श्रुति ने कहा कि अपने इन नृत्य की पेशकारियों के जरिये उन्होंने अपने देश के जवानों को भी श्रद्धांजलि दी है, जो देश की सेवा में अपनी जानें गंवा रहे हैं।