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सौभाग्यशाली है यह करवाचौथ, महिलाओं ने की तैयारी

Tue, 03 Nov 2020 02:11 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 03 Nov 2020 02:11 AM IST
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Karwachauth tomorrow, women starts prepration
चंडीगढ़। इस वर्ष के करवाचौथ पर बेहतरीन योग बन रहे हैं। वर्गोत्तम बृहस्पति की चंद्र पर दृष्टि से यह करवाचौथ सौभाग्यशाली है। करवाचौथ पर बन रहे बेहतरीन योग सुख, समृद्धि और आयु प्रदान करेंगे।
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करवाचौथ बुधवार को है। चंडीगढ़ में करवाचौथ पर चंद्रोदय रात्रि 8 बजकर 9 मिनट पर निकलने वाला है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 52 मिनट तक है। चंद्रोदय के समय की कुंडली में बनने वाले कुछ खूबसूरत योगों में हंस महापुरुष योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गजकेसरी योग, महादीर्घायु योग, सतकीर्ति योग, बुध आदित्य योग और शुक्र वोशी योग मुख्य हैं। यह बात ज्योतिष शिक्षक अमित बेरी ने कही।
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उन्होंने कहा कि चंद्र राशि व नवांश में अच्छी स्थिति में भावोत्तम हैं। राशि में वर्गोत्तम गुरु से दृष्ट है। राशि में केंद्र त्रिकोण में 5 ग्रह बली हैं और नवांश में ग्रहों की स्थिति काफी बेहतर है। हंस महापुरुष योग के कारण गुरु का केंद्र स्थान में अपनी ही या उच्च राशि में होने से बनता है। यह योग सभी को सुख-शांति और समृद्धि के साथ साथ आयु भी प्रदान करता है। करवाचौथ में चंद्र देव बहुत महत्व रखते हैं। चंद्र ग्रह सूर्य की ही रोशनी से चमकते हैं और जल तत्व को दर्शाते हैं। जल का मतलब जीवन व रिश्तों में प्रेम, स्नेह, सुख-शांति और तरलता। जल (भावना) के बगैर रिश्ते शुष्क हो जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि चतुर्थी तिथि जल तत्व की द्योतक है और इस पर गणेश का ही स्वामित्व है। जल की देवी दुर्गा भी कही गई है और पांच पूज्य देवताओं में गणेश जी जल के अधिपति माने गए हैं। चतुर्थी तिथि पर अंशात्मक दूरी के हिसाब से चंद सूर्य से अष्टम भाव में रहते हैं जिसे ज्योतिष कुंडली में खार भाव कहा जाता है। यदि जल खारा हो जाए तो पीने में स्वाद नहीं रहता इसलिए यदि रिश्तों में और भावनाओं में खारापन आ जाए तो रिश्ते कड़वे होना स्वाभाविक है।




चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते हैं जिसका अर्थ है खाली और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आपसी संबंधों में अकेलापन व एकाकीपन दे सकती है।
चंद्रमा को इसलिए देते हैं जल
अमित बेरी का कहना है कि चंद्र को जल देना मानो अपनी कुंडली में चंद ग्रह को बल देना ताकि देवी गौरी चंद्रदेव के माध्यम से पति-पत्नी के रिश्तों में सोम बरसाती रहें, तरलता बनाए रखें। कलश में जल भर कर रखना, फिर दिन भर निर्जल व्रत और सांझ को देवी की पूजा के बाद चंद्रदेव को उस जल को अर्पित करना। यह दर्शाता है कि साल भर पति-पत्नी के बीच जल यानी प्रेम और स्नेह की भावना निरंतर प्रवाहित होती रहे और आपस में सौहार्र्द बना रहे।
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