फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   kargil war, martyr manohar lal, kargil hero manohar lal, fatehabad martyr, fatehabad

कारगिल का योद्धा: शादी की उम्र में पाई शहादत, गोली लगी पर गिरा नहीं

Wed, 27 Jul 2016 09:37 AM IST
अमित रूखाया/अमर उजाला, फतेहाबाद।
अमित रूखाया/अमर उजाला, फतेहाबाद। Updated Wed, 27 Jul 2016 09:37 AM IST
विज्ञापन
kargil war, martyr manohar lal, kargil hero manohar lal, fatehabad martyr, fatehabad
मनोहर : 23 की उम्र में देश की खातिर खाई गोली, हंसकर लगाया मौत को गले - फोटो : अमर उजाला
वो अपने मां-बाप का लाडला था, लेकिन उसकी बहादुरी और शहादत ने उसे गांव का लाडला बेटा बना दिया।
विज्ञापन


दुश्मन की गोली लगने के बाद भी उसने कदम पीछे नहीं हटाए, बल्कि तब तक दुश्मनों से जंग लड़ता रहा, जब तक जिस्म की आखिरी सांस खर्च नहीं हो गई। उम्र थी महज 23 साल, जिस उम्र में नौजवान घोड़ी चढ़ने के सपने देखते हैं, उस उम्र में ढाणी डुल्ट का मनोहर लाल 18 जून 1999 को तिरंगे को सीने से लगाकर चार कंधों पर शान से अपने गांव पहुंचा था।

अफसोस बस इतना था, परिवार और गांव वालों ने अपने उस बहादुर बेटे को आखिरी बार देखा था। उस दिन अग्नि में समाने से पहले वह नौजवान अपना और अपने खानदान का नाम फतेहाबाद के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिख गया था। मनोहर की शहादत के 17 बरस बाद परिजनों को सरकार से गिला तो कुछ नहीं है लेकिन बेटे की प्रतिमा फतेहाबाद में लगाने की हसरत आज तक दिल में दबी है, जिसे कोई अफसर सुनना नहीं चाहता।
विज्ञापन


लेफ्टिनेंट की परीक्षा कर चुका था पास, शहादत के बाद पहुंचा ज्वाइनिंग का लेटर
29 अप्रैल 1995 को सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुआ मनोहर लाल सेना में एक अधिकारी बनकर अपने दादा और पिता का नाम और रोशन करना चाहता था। फौज में जाने की प्रेरणा उसे अपने दादा छाजूराम से ही मिली जो खुद फौज में रह चुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेना में अफसर बनने की उसकी ललक के कारण उसने पूरी तैयारी की और एनडीए की परीक्षा को पास भी किया। इस बीच कारगिल में लड़ाई छिड़ गई। कारगिल के द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए 13 जून 1999 को फतेहाबाद का यह वीर जवान शहीद हो गया। परिजनों की आंखों से आंसू नहीं रुके थे जब वीरगति को प्राप्त होने के बाद मनोहर का बतौर लेफ्टिनेंट ज्वाइनिंग लेटर उनके हाथों में पहुंचा। शहादत के पांच दिन बाद मनोहर का अंतिम संस्कार पैतृक गांव ढाणी डुल्ट में ही हुआ था।

शहादत के 17 बरस बाद भी शहीद के पिता की ख्वाहिश अधूरी

kargil war, martyr manohar lal, kargil hero manohar lal, fatehabad martyr, fatehabad
शहीद मनोहर लाल के नाम से रखा गया गांव के स्कूल का नाम। - फोटो : अमर उजाला
शहीद मनोहर लाल की शहादत के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार ने उसके परिवार की पूरी मदद की। घर चलाने के लिए गैस एजेंसी अलॉट की गई।

शहीद के भाई राजेश को भी सरकारी नौकरी मिली। तत्कालीन बंसीलाल सरकार ने भूना में कॉलेज का नाम मनोहर लाल के नाम पर रखने की घोषणा की थी, जिसे अभी तक सिरे नहीं चढ़ाया गया है। वैसे परिवार को सरकार से कोई गिला नहीं है, लेकिन 17 बरस पहले अपने बेटे की शहादत के बाद उसकी अर्थी को कंधा दे चुका पिता रामेश्वर जरूर एक अधूरी ख्वाहिश दिल में और ज्ञापन हाथ में लिए रहते हैं।

शहीद मनोहर लाल के पिता रामेश्वर लाल चाहते हैं कि फतेहाबाद शहर में उसके शहीद बेटे मनोहर लाल की प्रतिमा किसी चौक पर स्थापित हो। इसके लिए लगने वाला सारा खर्च भी उठाने को तैयार हैं।

वजह पूछने पर बताते हैं कि मनोहर की शहादत को 17 बरस हो गए हैं। एक पूरी पीढ़ी बदल गई है, कहीं ऐसा ना हो कि आने वाली पीढ़ी हमारे बेटे की शहादत को भूल ही ना जाए। यही वजह है पूरी दुनिया के सामने बहादुर बेटे की कहानी सुनाने वाला यह पिता अकेले में सिसकियां भरने लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed