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मक्खियों की समस्या पर कोर्ट आफ कंटेंप्ट का नोटिस
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Fri, 29 Nov 2013 09:09 AM IST
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शिवालिक क्षेत्र स्थित पोल्ट्री फार्म की वजह से हो रही मक्खियों की समस्या को निपटाने के लिए अधिसूचना लागू नहीं करने पर कोर्ट आफ कंटेंप्ट का नोटिस जारी किया गया है।
पर्यावरण विभाग के फाइनेंशल कमिश्नर, हरियाणा पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन, पंचकूला, अंबाला व यमुनानगर के डीसी को नोटिस भेजकर 10 दिन में अधिसूचना लागू करने के लिए कहा गया है।
एडवोकेट विजय बंसल ने एडवोकेट रवि शर्मा के मार्फत से यह नोटिस भेजा है, जिसमें कहा गया है कि अगर अधिसूचना लागू नहीं हुई तो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कंटेंप्ट केस फाइल किया जाएगा।
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट विजय बंसल ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर पांच सितंबर 2011 को समस्या का समाधान करने के आदेश जारी हुए थे।
27 मई 2013 को पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव ने 27 मई 2013 को अधिसूचना जारी की थी, जिसमें संबंधित डीसी एवं प्रदूषण विभाग को निर्देश दिए गए थे कि 90 दिन में इसे लागू किया जाए।
अब तक पांच महीने गुजरने के बावजूद इस अधिसूचना को लागू नहीं किया गया।
पहले भी दिया था नोटिस
हाईकोर्ट में जनहित याचिका पांच सितंबर 2011 को दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए एक महीने में समस्या का समाधान करने के लिए कहा गया था।
दो साल तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अप्रैल 2013 को कोर्ट आफ कंटेंप्ट का नोटिस भेजा गया। इसके बाद 27 मई 2013 को अधिसूचना जारी हुई, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
यह है अधिसूचना में
पोल्ट्री फार्म में छिड़काव के लिए दवा का क्राइटेरिया तय किया जाए। पोल्ट्री फार्म आबादी से दूर हो, आसपास कोई पीने के पानी का स्रोत न हो।
इसके अलावा मर चुके पक्षियों व बीट के निपटान सहित अन्य कई गाइडलाइंस इस अधिसूचना मे शामिल हैं।
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पर्यावरण विभाग के फाइनेंशल कमिश्नर, हरियाणा पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन, पंचकूला, अंबाला व यमुनानगर के डीसी को नोटिस भेजकर 10 दिन में अधिसूचना लागू करने के लिए कहा गया है।
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एडवोकेट विजय बंसल ने एडवोकेट रवि शर्मा के मार्फत से यह नोटिस भेजा है, जिसमें कहा गया है कि अगर अधिसूचना लागू नहीं हुई तो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कंटेंप्ट केस फाइल किया जाएगा।
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट विजय बंसल ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर पांच सितंबर 2011 को समस्या का समाधान करने के आदेश जारी हुए थे।
27 मई 2013 को पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव ने 27 मई 2013 को अधिसूचना जारी की थी, जिसमें संबंधित डीसी एवं प्रदूषण विभाग को निर्देश दिए गए थे कि 90 दिन में इसे लागू किया जाए।
अब तक पांच महीने गुजरने के बावजूद इस अधिसूचना को लागू नहीं किया गया।
पहले भी दिया था नोटिस
हाईकोर्ट में जनहित याचिका पांच सितंबर 2011 को दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए एक महीने में समस्या का समाधान करने के लिए कहा गया था।
दो साल तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अप्रैल 2013 को कोर्ट आफ कंटेंप्ट का नोटिस भेजा गया। इसके बाद 27 मई 2013 को अधिसूचना जारी हुई, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
यह है अधिसूचना में
पोल्ट्री फार्म में छिड़काव के लिए दवा का क्राइटेरिया तय किया जाए। पोल्ट्री फार्म आबादी से दूर हो, आसपास कोई पीने के पानी का स्रोत न हो।
इसके अलावा मर चुके पक्षियों व बीट के निपटान सहित अन्य कई गाइडलाइंस इस अधिसूचना मे शामिल हैं।