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मोदी ने ताजा किए 30 साल पुराने जख्म, पर सुकून भी मिला

Thu, 16 Apr 2015 04:56 PM IST
Updated Thu, 16 Apr 2015 04:56 PM IST
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kanishka plane crash, victim nirmala old memories

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जब कनिष्क विमान हादसे के स्मारक पर गए तो 30 साल पुराना दर्द ताजा हो गया, लेकिन सुकून भी मिला। ये कहना था 70 साल की निर्मला का। खौफनाक दिन को याद कर निर्मला फफक करो रो पड़ीं। बकौल निर्मला, ‘कनिष्क विमान हादसा दिल दहलाने वाला था, जिसने पूरे परिवार को ही उजाड़ दिया। हमारे घर की बगिया ही पूरी खत्म हो गई थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मारक पर जाने के बाद एक बार फिर दिल का जख्म हरा हो गया है।

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’ उस खौफनाक दिन को याद कर 70 साल की निर्मला फफक करो रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि एक फोन कॉल ने उनके घर में कोहराम मचा दिया था। फोन आया था कि निर्मला की ननद निर्मल अपने बेटे व बेटी के साथ कनिष्क विमान हादसे का शिकार हो गईं। निर्मल अपने पिता के अंतिम संस्कार में शरीक होने के लिए घर आ रही थीं।
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अब तीस साल बाद हादसे के स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रद्धांजलि देने गए हैं तो पीड़ित परिवारों के लिए यह एक सुकून का क्षण है। निर्मला कहती हैं कि इससे एक बार फिर उनका दर्द उठने लगा है, लेकिन यह एक मरहम भी है। इससे कुछ समय के लिए आराम तो मिलेगा। लेकिन कनिष्क हादसा एक ऐसा जख्म है जिसका कोई इलाज नहीं है।

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शाहकोट के परिवार ने खोए थे तीन सदस्य

kanishka plane crash, victim nirmala old memories

23 जून 1985 को आतंकवादियों ने कनिष्क विमान को गिरा दिया था। विमान में 329 लोग सवार थे। इस विमान में जालंधर के गांव शाहकोट की बेटी निर्मल भी सवार थीं। निर्मल के साथ उनकी 19 साल की बेटी अंजू व छह साल का बेटा सन्नी भी सवार थे। निर्मल के पिता रामजीदास का शाहकोट में निधन हो गया था, और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वह इमरजेंसी टिकट लेकर विमान में सवार हुई थीं।

तीन बेटियों के बाद पैदा हुआ था बेटा
निर्मला बताती हैं कि पिता के संस्कार में शरीक होने के लिए निर्मल कनाडा में जहाज में सवार हुईं जबकि उनके पति सुरिंदर भल्ला काम के कारण वहीं रुक गए थे। निर्मल के घर तीन बेटियों के बाद बेटा सन्नी हुआ था, जिसके बाद उसका जीवन पटरी पर आया था। पहले तीन बेटियों के कारण उसको परिवार में काफी तीखी नजरों व प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ रहा था। सन्नी के जन्म के बाद से परिवारिक जीवन शांतिमय ढंग से शुरू  हुआ था।

बेटी के लिए लड़के की कर रही थीं तलाश
निर्मल की ख्वाहिश थी कि वह अपनी बेटी अंजू की शादी भारत में ही करेगी, इसके लिए वह लड़के की तलाश भी कर रही थीं लेकिन उनको क्या पता था कि जहाज का यह सफर उनका अंतिम सफर होगा।

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