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जमींदारों के विरोध के बावजूद, यूटी ने लिया 97 कनाल 12 मरले भूमि पर कब्जा
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चंडीगढ़। जमीदारों के विरोध के बीच यूटी प्रशासन ने तोगां-सारंगपुर लिंक रोड (पीआर 4) की डड्डूमाजरा की जमीन पर कब्जा ले लिया। 97 कनाल 12 मरले जमीन पर पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जे के बाद जेसीबी मशीन से समतल किया गया। भू अधिग्रहण अधिकारी नाजुक कुमार की मौजूदगी में सेक्शन 11 के तहत कब्जे की कार्रवाई की गई।
जमीदारों के विरोध को देखते हुए बुधवार को यूटी प्रशासन के अधिकारी पूरी तैयारी के साथ डड्डूमाजरा की जमीन पर कब्जे के लिए पहुंचे। एएसपी (साउथ) नेहा यादव के नेतृत्व में मौके पर पुलिस बल पहुंचा। जहां भू अधिग्रहण अधिकारी नाजुक कुमार भी मौजूद रहीं। कब्जे के दौरान पहले से मौजूद जमीदारों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस की सख्ती से जमीदारों का विरोध काम नहीं आया। भू अधिग्रहण विभाग के कानूनगो मक्खन लाल ने बताया कि कब्जे की कार्रवाई के दौरान सर्किल पटवारी रामचंदर ने राजस्व विभाग के सर्किल पटवारी रामेश्वर दास को जमीन की सुपुर्दगी दी।
जमीदार क्यों कर रहे विरोध
प्रदर्शन कर रहे जमीदारों ने बताया कि धनास के जमीदारों के मुकाबले डड्डूमाजरा के जमीदारों का मुआवजा काफी कम है। जबकि धनास की तरह डड्डूमाजरा भी शहरी क्षेत्र में आता है। इसके साथ ही मुआवजे की जो दरें यूटी प्रशासन दे रहा है वह रजिस्ट्री की दरें हैं। वर्ष 2013 में भू अधिग्रहण कानून में बदलाव किया गया था कि जमीदारों को अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के मुआवजे की दर मार्केट रेट के अनुसार होनी चाहिए। इसके बाद भी प्रशासन मुआवजे को लेकर दोहरे मापदंड अपना रहा है।
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ये तय की हैं प्रशासन ने दरें
लिंक रोड के लिए प्रशासन द्वारा 17.76 एकड़ लैंड 69 करोड़ रुपये में एक्वायर की है। इसमें धनास 5.25 करोड़ प्रति एकड़ व डड्डूमाजरा के लिए 3.22 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा दिया जा रहा है। धनास के 17 और डड्डूमाजरा के 92 जमीदारों की जमीन को अधिग्रहित किया गया है।
ट्रेजरी से नहीं लिया पैसा : संधु
धनास के पूर्व सरपंच कुलजीत सिंह संधु ने बताया कि डड्डूमाजरा के ग्रामीणों की जमीन का एक भी पैसा जमीदारों ने ट्रेजरी से नहीं लिया है। प्रशासन की यह कार्रवाई अंग्रेजी शासन जैसी है। जमीदार इसका विरोध करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में जमीदार अपनी आवाज न्यायालय में भी उठाएंगे।
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जमीदारों के विरोध को देखते हुए बुधवार को यूटी प्रशासन के अधिकारी पूरी तैयारी के साथ डड्डूमाजरा की जमीन पर कब्जे के लिए पहुंचे। एएसपी (साउथ) नेहा यादव के नेतृत्व में मौके पर पुलिस बल पहुंचा। जहां भू अधिग्रहण अधिकारी नाजुक कुमार भी मौजूद रहीं। कब्जे के दौरान पहले से मौजूद जमीदारों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस की सख्ती से जमीदारों का विरोध काम नहीं आया। भू अधिग्रहण विभाग के कानूनगो मक्खन लाल ने बताया कि कब्जे की कार्रवाई के दौरान सर्किल पटवारी रामचंदर ने राजस्व विभाग के सर्किल पटवारी रामेश्वर दास को जमीन की सुपुर्दगी दी।
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जमीदार क्यों कर रहे विरोध
प्रदर्शन कर रहे जमीदारों ने बताया कि धनास के जमीदारों के मुकाबले डड्डूमाजरा के जमीदारों का मुआवजा काफी कम है। जबकि धनास की तरह डड्डूमाजरा भी शहरी क्षेत्र में आता है। इसके साथ ही मुआवजे की जो दरें यूटी प्रशासन दे रहा है वह रजिस्ट्री की दरें हैं। वर्ष 2013 में भू अधिग्रहण कानून में बदलाव किया गया था कि जमीदारों को अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के मुआवजे की दर मार्केट रेट के अनुसार होनी चाहिए। इसके बाद भी प्रशासन मुआवजे को लेकर दोहरे मापदंड अपना रहा है।
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ये तय की हैं प्रशासन ने दरें
लिंक रोड के लिए प्रशासन द्वारा 17.76 एकड़ लैंड 69 करोड़ रुपये में एक्वायर की है। इसमें धनास 5.25 करोड़ प्रति एकड़ व डड्डूमाजरा के लिए 3.22 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा दिया जा रहा है। धनास के 17 और डड्डूमाजरा के 92 जमीदारों की जमीन को अधिग्रहित किया गया है।
ट्रेजरी से नहीं लिया पैसा : संधु
धनास के पूर्व सरपंच कुलजीत सिंह संधु ने बताया कि डड्डूमाजरा के ग्रामीणों की जमीन का एक भी पैसा जमीदारों ने ट्रेजरी से नहीं लिया है। प्रशासन की यह कार्रवाई अंग्रेजी शासन जैसी है। जमीदार इसका विरोध करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में जमीदार अपनी आवाज न्यायालय में भी उठाएंगे।