भाजपा के बगावती नेताओं को 'ऊपर' से फरमान
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हरियाणा में टिकट वितरण के बाद घमासान में फंसी भाजपा अभी उबर नहीं पाई है। पार्टी फील्ड में कितनी बड़ी बात करे, लेकिन दूसरी सूची में पार्टी को सिद्धांतो से समझौता करना पड़ सकता है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चुनाव से पहले किसी तरह का विरोध नहीं चाह रहा है।
हरियाणा में विधानसभा के रण से पहले पार्टी के अंदर केंद्रीय नेतृत्व कोई रण नहीं पैदा करना चाहती है। टिकट वितरण के बाद पार्टी में उठ रहे विरोध पर भाजपा पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।
लेकिन असलियत यह है कि विरोध के सुरों को शांत करने के लिए नेताओं की जिम्मेदारी लगाई गई है। हरियाणा के चुनाव प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय 43 में से 27 विधानसभा क्षेत्रो का दौरा कर चुके हैं।
विरोध होना बड़ी बात नहीं
कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि विरोध बहुत बड़ी बात नहीं है। टिकट वितरण में भाजपा नेताओं पर लग रहे आरोपों पर विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया है कि ऐसा मैं अपने जीवन में पहली बार सुन रहा हूं। पार्टी का टिकट वितरण का एक पैमाना है। उसमें किसी तरह के आरोपों का कोई आधार नहीं है।
बीरेंद्र की बात आलाकमान तक पहुंचेगी:
हरियाणा के चुनाव प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की बीरेंद्र सिंह से विस्तृत बातचीत हो चुकी है। बिरेंद्र सिंह की जो भी डिमांड होगी उसे पार्टी के प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। उन्होंने जो बाते कैलाश विजयवर्गीय को बताई हैं। उन बातों पर विजयवर्गीय पार्टी आलाकमान को अवगत करवाएंगे।
नहीं होगा टिकटों पर पुनर्विचार
हरियाणा प्रभारी जगदीश मुखी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी में टिकट वितरण को लेकर विरोध है। उनका कहना है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में दिक्कत आ रही है। जो हमारे घर की बात है हम कार्यकर्ताओं को समझा कर शांत कर देंगे, लेकिन पार्टी जो टिकट बांट चुकी है, उस पर पुनर्विचार नहीं होगा।
भाजपा एक समुद्र है:
विजयवर्गीय के मुताबिक भाजपा एक समुद्र है। उसमें जब कोई नदी मिलती है तो अपना अस्तित्व खो देती है। भाजपा में पहली बार दूसरे दलों से लोग नहीं आए हैं, पहले भी आते रहे हैं। जहां तक लीडर की बात है लीडर हमेशा लीडर होता है। जबकि जबरदस्ती बनाए हुए लीडर आ असितत्व समाप्त हो जाता है।
चोर दरवाजे से अंदर आएं हैं भाजपा प्रत्याशी
भाजपा में अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। अब भाजपा नेता खुले मंच से पार्टी प्रत्याशियों का विरोध कर रहे हैं और खुद ही स्पष्ट बहुमत न मिलने की बात बोल रहे हैं।
भाजपा के पूर्व विधायक पीके चौधरी ने कहा है कि विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे ज्यादा सीटें तो ले जाएगी, लेकिन अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी। चुनाव के बाद तय किया जाएगा कि किसके साथ गठबंधन किया जाए। वे सोमवार को यहां जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पीके चौधरी ने कहा कि चोर दरवाजों से टिकट लाने वालों ने पार्टी की हालत बिगाड़ दी है। हिसार जिले में हालात बुरे हैं। हांसी से भाजपा के प्रत्याशी छत्रपाल सिंह पर हमला बोलते हुए चौधरी ने कहा कि उन्हें हराने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे।
छत्रपाल ने धोखा किया मेरे साथ
पीके चौधरी ने कहा कि छत्रपाल को पार्टी में शामिल करवाने में उनकी अहम भूमिका रही है लेकिन उन्होंने उनके साथ ही धोखा कर दिया। पीके चौधरी ने कहा कि वे अपनी पत्नी अनुराधा को हांसी से टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन छत्रपाल चोर दरवाजे से यहां आ गए।
पीके चौधरी ने कहा कि छत्रपाल उकलाना हलके से संबंध रखते हैं इसलिए हांसी की जनता बाहरी उम्मीदवार को पसंद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हो सका तो वे छत्रपाल के मुकाबले एक प्रत्याशी भी मैदान में उतारेंगे।
पीके चौधरी ने दावा किया कि टिकट घोषित होने के बाद छत्रपाल उनके पास आए थे लेकिन मैंने समर्थन करने से इंकार कर दिया। जब उनसे पूछा गया कि वे भाजपा में किस ओहदे पर है तो पीके चौधरी ने कहा कि भाजपा उनके खून में है।