फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Justice for widow after 28 years High Court rules entitled to compensation

विधवा को 28 साल बाद इंसाफ: हाईकोर्ट ने माना मुआवजे का हकदार, पिता का ट्रैक्टर चला रहे युवक की हुई थी माैत

Sat, 17 Jan 2026 12:16 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 17 Jan 2026 12:16 PM IST
सार

27 साल के जसबीर सिंह की अगस्त 1996 में उस समय मौत हो गई थी, जब वह अपने नियोक्ता के निर्देश पर प्लांटर की मरम्मत कर लौट रहा था। जसबीर की मौत के बाद उसकी पत्नी कश्मीर कौर और उसका बेटा बिना किसी आर्थिक सहारे के रह गए थे।

विज्ञापन
Justice for widow after 28 years High Court rules entitled to compensation
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब 28 साल बाद न्याय करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रैक्टर हादसे में मृत व्यक्ति की विधवा को मुआवजा का हकदार मानते हुए उसे यह राशि जारी करने का आदेश दिया है। वर्ष 1998 में कर्मचारी मुआवजा आयुक्त ने दावे को खारिज कर दिया था और इस आदेश को चुनौती दी गई थी।

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पिता-पुत्र का रिश्ता होने से वैध नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से इन्कार नहीं किया जा सकता। जस्टिस पंकज जैन ने आदेश में कश्मीर कौर को कुल 4,27,140 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही दुर्घटना के 30 दिन बाद से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा 35 प्रतिशत दंड (जिस पर 7 प्रतिशत ब्याज देय होगा) भी देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


27 साल के जसबीर सिंह की अगस्त 1996 में उस समय मौत हो गई थी, जब वह अपने नियोक्ता के निर्देश पर प्लांटर की मरम्मत कर लौट रहा था। जसबीर की मौत के बाद उसकी पत्नी कश्मीर कौर और उसका बेटा बिना किसी आर्थिक सहारे के रह गए थे। जसबीर सिंह 2,300 रुपये प्रतिमाह पर ट्रैक्टर चालक के रूप में काम कर रहा था। ट्रैक्टर उसके पिता सिमर चंद का था, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


परिवार जुलाई 1993 से अलग-अलग रह रहा था। सिमर चंद ने लिखित रूप में स्वीकार किया था कि उनका बेटा उनके यहां चालक के रूप में कार्यरत था और उन्होंने मुआवजा दावे का समर्थन किया था। बीमा कंपनी ने मुआवजा दावे का विरोध करते हुए इसे आपसी मिलीभगत बताया था और तर्क दिया कि पिता व पुत्र के बीच वास्तविक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध हो ही नहीं सकता।


मई 1998 में होशियारपुर के कर्मचारी मुआवजा आयुक्त ने दावा खारिज करते हुए कहा था कि ट्रैक्टर परिवार का था और मृतक कर्मचारी नहीं था। कश्मीर कौर ने 1998 में ही हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जो लगभग 28 वर्षों तक लंबित रही।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed