सरकार की अनदेखी: पंजाब में जजों के पास कोर्ट रूम नहीं... आवास की भी समस्या, लोगों को कैसे मिलेगा इंसाफ
हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि मोहाली के डीसी ने डेराबस्सी के एसडीएम और तहसीलदार के कार्यालय वाली पूरी इमारत जिला जज के नाम कर दी है। साथ ही 45 फ्लैट मोहाली के जजों को देने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने 3 सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
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लोगों के लिए इंसाफ की मूरत न्यायाधीश सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। हालात ये हैं कि न रहने को सरकारी आवास है और न ही केस सुनने के लिए अदालतें। ऐसी स्थितियों के चलते ही लोगों को इंसाफ के लिए दशकों का इंतजार करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट के दखल के बाद अब हरियाणा व पंजाब के जजों को लेकर सरकारों की नींद टूटी है और प्रयास आरंभ किए गए हैं।
मालेरकोटला बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब में अदालतों की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट ने बीते अगस्त में इस मामले को लेकर सुनवाई शुरू की थी और याचिका का दायरा बढ़ाते हुए हरियाणा को भी पक्ष बना लिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर हरियाणा व पंजाब दोनों ने जजों के आवास और अदालतों को लेकर अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंपी।
हाईकोर्ट ने यह देखकर हैरानी जताई कि पंजाब के कई जिलों में कुल जजों में से 50 प्रतिशत से अधिक किराए के घर में रहने को मजबूर हैं। कई जिलों में जज अदालतें मौजूद न होने के चलते सुनवाई नहीं कर पा रहे हैं। हरियाणा की स्थिति भी कुछ ज्यादा बेहतर नहीं पाई गई। हरियाणा के चरखी दादरी, करनाल व अंबाला में जजों के लिए पर्याप्त सरकारी आवास मौजूद नहीं हैं। हरियाणा सरकार ने बताया कि करनाल व चरखी दादरी में जमीन की व्यवस्था कर ली गई है और जल्द निर्माण हो जाएगा। अंबाला में सरकार किराए पर आवास लेकर जजों को मुहैया करवा देगी।
हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि मोहाली के डीसी ने डेराबस्सी के एसडीएम और तहसीलदार के कार्यालय वाली पूरी इमारत जिला जज के नाम कर दी है। साथ ही 45 फ्लैट मोहाली के जजों को देने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने 3 सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। डेराबस्सी में जजों के लिए कैबिन की व्यवस्था करने के पंजाब सरकार के निर्णय के बाद ये दोनों दफ्तर खाली करने और इसे जजों के लिए सौंपने का आदेश दिया था।
जर्जर मकानों में रहने को मजबूर
पंजाब सरकार ने अपने हलफनामे में जजों को मिले सरकारी आवासों की जानकारी दी थी। हाईकोर्ट ने हलफनामे में पाया कि जजों को ऐसे मकानों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है जिनमें मेजर रिपेयर की जरूरत है। हाईकोर्ट ने कहा कि आखिर कैसे खंडहर हो चुके इन मकानों में जजों को रखा जा सकता है। सरकार को जल्द से जल्द जजों के लिए उपयुक्त आवास की व्यवस्था करनी चाहिए।