जज नोट कांड में चौंकाने वाला खुलासा
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जजनोट कांड मामले में रिटायर्ड इंस्पेक्टर रमेश चंद के क्रास बयान शनिवार को सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में हुए। रमेश चंद ने अदालत में आरोपी संजीव बंसल के बयानों की पुष्टि की। उसने शनिवार को अदालत में बताया कि 13 अगस्त की रात को थाने में आए थे उन्होंने लिखित में बयान दर्ज भी कराए थे जिसमें उन्होंने कहा था कि वे दिल्ली गए थे।
वहां होटलियर रविंदर सिंह ने 15 लाख निर्मल सिंह को तक पहुंचाने के लिए दिए थे। बयान की प्रति उन्होंने 16 अगस्त को तत्कालीन एएसपी मधुर वर्मा तक पहुंचा दी थी। मामले में शनिवार को एक स्टांप वेंडर अशोक कुमार व एक अन्य गवाह रमेश चंद्र के बयान भी दर्ज होने थे, लेकिन बीमारी के चलते उन्होंने अदालत में पेशी से छूट की अर्जी दी थी।
अदालत ने अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अक्तूबर को तय की है। अगली सुनवाई पर अदालत ने गवाही केलिए अशोक कुमार, रमेश चंद, सुरेंद्र सूद और अजय कुमार समन भेजकर पेश होने के आदेश जारी किए हैं।
ये है मामला
दायर मामला 13 अगस्त 2008 का है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल ने अपने मुंशी प्रकाश राम को 15 लाख रुपये देकर जस्टिस निर्मल यादव केघर पहुंचाने केलिए कहा था।
मुंशी प्रकाश राम गलती से रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था। जस्टिस निर्मलजीत कौर केनौकर ने मामले की शिकायत पुलिस को दी। सेक्टर 11 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर प्रकाश राम, संजीव बंसल और राजीव गुप्त को दबोचा था।
मामले में जस्टिस निर्मल यादव का नाम सामने आने पर जांच सीबीआई के पास गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच कर निर्मल यादव पर केस चलाने की कानून मंत्री से परमीशन मांगी थी, लेकिन उन्हें नहीं मिली थी।
25 पेजों की चार्जशीट हुई थी दाखिल
04 मार्च 2011 को सीबीआई ने राष्ट्रपति से निर्मल यादव पर केस चलाने की परमीशन लेकर 25 पेजों की चार्जशीट सीबीआई अदालत में दायर की थी।
चार्जशीट दायर होने पर सीबीआई अदालत ने मामले में जस्टिस निर्मल यादव, संजीव बंसल, राजीव गुप्ता , निर्मल सिंह और रविंदर भसीन को कॉपी सप्लाई की थी।
मामले में आरोप तय होने के बाद रिटायर्ड जस्टिस निर्मल यादव ने बीमारी का हवाला देते हुए पेशी से स्थाई छूट की मांग की थी। जिस पर अदालत ने उन्हें कहा था कि जब उनकी मामले में जरूरत होगी। उन्हें अदालत में आना होगा।