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Chandigarh News: हीमोफीलिया के मरीजों में जोड़ों की सर्जरी खतरनाक, स्थिति हो सकती है गंभीर

Wed, 17 Apr 2024 05:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2024 05:53 AM IST
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Joint surgery is dangerous in hemophilia patients, the condition can be serious.
चंडीगढ़। हीमोफीलिया के मरीजों को जोड़ों में ब्लीडिंग अधिक होती है लेकिन ज्यादातर मरीज ऐसा होने पर हड्डी के डॉक्टर के पास चले जाते हैं। कुछ हड्डी रोग विशेषज्ञ जानकारी के अभाव में उनकी सर्जरी कर देते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में अगर बच्चों में जोड़ों में सूजन अपने आप आ जाए या थोड़ी चोट लगने से हो तो हीमोफीलिया की जरूर जांच करवाएं। यह कहना है पीजीआई के हेमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. पंकज मल्होत्रा का। उन्होंने विश्व हीमोफीलिया दिवस पर इस मर्ज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अमर उजाला के साथ साझा की।प्रो. पंकज मल्होत्रा ने बताया कि इन मरीजों के इलाज के लिए दिए जाने वाले फैक्टर 8 और 9 को ज्यादातर राज्य मुफ्त में देते हैं। पता चला है के चंडीगढ़ में भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जीएमसीएच-32 को इसके लिए निर्देशित किया है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार रूटीन में मरीजों का इलाज जीएमसीएच-32 में होना है जबकि पीजीआई गंभीर मरीजों का इलाज करेगा। इसके साथ यह भी जानना बेहद जरूरी है कि आयुष्मान भारत की ही तरह हीमोफीलिया के मरीजों की भी फाइल अलग से बनती है जिससे उनका इलाज मुफ्त होता है लेकिन अब भी इसकी जानकारी ज्यादातर मरीजों को नहीं है। इससे उन्हें यहां-वहां भटकना पड़ता है। प्रो. पंकज मल्होत्रा का कहना है कि अगर आप हीमोफीलिया के मरीज हैं और बार-बार चोट लगने से आपकी स्थिति खराब रहती है तो पीजीआई के हीमोफीलिया एक्सपर्ट्स को दिखाएं क्योंकि इस मर्ज में हल्की चोट भी मरीज के लिए बेहद गंभीर साबित हो सकती है।
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जीएमसीएच-32 में मरीजों को फैक्टर का इंतजार
विश्व हीमोफीलिया दिवस की इस वर्ष की थीम सभी के लिए समान पहुंच रखा गया है लेकिन जीएमसीएच-32 में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को निराशा हाथ लग रही है। कारण अस्पताल में फैक्टर का उपलब्ध न होना है। चंडीगढ़ हीमोफीलिया वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य अशोक बंसल, जगत जिंदर और इश्विंदर पाल का कहना है कि फैक्टर 8 की आपूर्ति न होने के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। पिछले तीन महीने से यह समस्या बनी हुई है। सोसाइटी में चंडीगढ़ के 60 मरीज पंजीकृत हैं जिनमें से फैक्टर 8 वाले मरीजों की संख्या 55 है। हालांकि, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग का कहना है कि पिछले वर्ष अचानक फैक्टर की मांग बढ़ने के कारण इस वर्ष उसकी ज्यादा खरीद की योजना बनाई गई है। फिलहाल ज्यादा से ज्यादा मरीजों को फैक्टर उपलब्ध कराने का प्रयास हो रहा है लेकिन यहां महज दो कंपनियाें से ही फैक्टर की आपूर्ति होती है। कई बार कंपनी के स्तर पर भी देरी होती है।
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क्या है हीमोफिलिया आप भी जान लें
यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून का बहना अपने आप रुक जाता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया की बीमारी होती है, उनमें खून का थक्का बनाने वाले घटक बहुत कम हो जाते हैं। ऐसे में शरीर का कोई भी हिस्सा कटने पर खून देर तक बहता रहता है और थक्का नहीं बनता। हीमोफीलिया दो तरह का होता है। पहला-हीमोफीलिया ए और दूसरा हीमोफीलिया बी। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती और हीमोफीलिया बी में फैक्टर 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं।
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