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Haryana Assembly Election: आजाद समाज पार्टी के साथ चुनाव लड़ेगी जजपा, इस तरह होगा सीटों का बंटवारा
Tue, 27 Aug 2024 02:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 27 Aug 2024 02:47 PM IST
सार
हरियाणा में एक अक्तूबर को विधानसभा चुनाव है। पिछली बार सत्ता में काबिज रही जजपा को इस बार चुनाव से पहले लगातार झटके मिल रहे हैं। हरियाणा में उनके कई एमएलए पार्टी छोड़ चुके हैं।
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गठबंधन का एलान करते दुष्यंत चौटाला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में जननायक जनता पार्टी और आजाद समाज पार्टी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने एलान किया कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया है। 70 सीटों पर जननायक जनता पार्टी और 20 सीटों पर आजाद समाज पार्टी उम्मीदवार उतारेगी।
इस चुनाव से पहले हरियाणा में जजपा के एमएलए लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। अब तक छह विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। वहीं रामकुमार गौतम शुरू से ही पार्टी के विरोध में बोलते रहे हैं, वो भी पार्टी छोड़ सकते हैं। जननायक जनता पार्टी ने 2019 में दस सीट जीती थी और पूर्ण बहुमत से दूर रही भाजपा को समर्थन देकर प्रदेश की सरकार में साझेदार बनी थी।
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किसान आंदोलन के बाद से विरोध झेल रही पार्टी
इनेलो से अलग होकर बनी नई पार्टी जजपा का किसान वर्ग से कोर वोटर था। हरियाणा में किसान आंदोलन के दौरान जजपा को भाजपा का साथ छोड़ने की किसानों ने मांग की थी, लेकिन पार्टी गठबंधन में बनी रही। जिसका नुकसान लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। कई साक्षात्कार में खुद दुष्यंत चौटाला भी मान चुके हैं कि किसान आंदोलन के दौरान उन्हें पब्लिक सेंटिमेंट को समझने में चुक हुई है। जिसका उनको लोकसभा चुनाव में नुकसान हुआ।
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इस चुनाव से पहले हरियाणा में जजपा के एमएलए लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। अब तक छह विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। वहीं रामकुमार गौतम शुरू से ही पार्टी के विरोध में बोलते रहे हैं, वो भी पार्टी छोड़ सकते हैं। जननायक जनता पार्टी ने 2019 में दस सीट जीती थी और पूर्ण बहुमत से दूर रही भाजपा को समर्थन देकर प्रदेश की सरकार में साझेदार बनी थी।
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किसान आंदोलन के बाद से विरोध झेल रही पार्टी
इनेलो से अलग होकर बनी नई पार्टी जजपा का किसान वर्ग से कोर वोटर था। हरियाणा में किसान आंदोलन के दौरान जजपा को भाजपा का साथ छोड़ने की किसानों ने मांग की थी, लेकिन पार्टी गठबंधन में बनी रही। जिसका नुकसान लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। कई साक्षात्कार में खुद दुष्यंत चौटाला भी मान चुके हैं कि किसान आंदोलन के दौरान उन्हें पब्लिक सेंटिमेंट को समझने में चुक हुई है। जिसका उनको लोकसभा चुनाव में नुकसान हुआ।