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Haryana: राजस्थान में बड़ा प्लान बना रही जजपा, जाट बाहुल्य 30 से अधिक सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी

Sun, 10 Sep 2023 11:13 AM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 10 Sep 2023 11:13 AM IST
सार

सीकर लोकसभा में ही करीब 3.8 लाख जाट वोटर हैं। चौधरी देवीलाल भी सीकर लोकसभा से सांसद रहे हैं। 1989 में जनता दल के चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस के बलराम जाखड़ को 46756 वोटों से हराया था।

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JJP plan to contest elections on more than 30 Jat dominated assembly seats in Rajasthan
हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

राजस्थान में साल के आखिरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जननायक जनता पार्टी (जजपा) सक्रिय हो गई है। हरियाणा के उपमुख्यमंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष दुष्यंत चौटाला लगातार राजस्थान का दौरा कर रहे हैं। पिछले चार दिन से वह पड़ोसी राज्य में हैं और जगह-जगह मिलकर पार्टी में लोगों को शामिल करवा रहे हैं।

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पार्टी की तैयारी 30 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की है। पार्टी का मुख्य फोकस जाट वोटर और युवा हैं। पार्टी 25 सितंबर को जननायक चौधरी देवीलाल की जयंती सीकर में मनाने जा रही है। सीकर जाट बाहुल्य क्षेत्र है। 
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सीकर लोकसभा में ही करीब 3.8 लाख जाट वोटर हैं। चौधरी देवीलाल भी सीकर लोकसभा से सांसद रहे हैं। 1989 में जनता दल के चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस के बलराम जाखड़ को 46756 वोटों से हराया था।
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वहीं, उनके पिता नोहारा और दातारामगढ़ विधानसभा सीट से विधायक रहे। दोनों ही विधानसभा में जाट वोटरों का दबदबा है। दुष्यंत चौटाला अपने पिता व परदादा के पुराने कामों की याद दिलाकर जनता की दिलों में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पुराने रिश्तों की दुहाई देकर वह सियासी समीकरण साधने में जुटे हैं, जो पैटर्न उन्होंने हरियाणा में अपनाया था, उसी के आधार पर वह राजस्थान में वोटरों को साधने की कोशिश में हैं। 

राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद शर्मा ने बताया कि चौटाला गांव से राजस्थान की सीमा मात्र पांच किलोमीटर दूर है। चौटाला परिवार की राजस्थान के कई गांव व शहरों में पुरानी रिश्तेदारी है। चौटाला परिवार भी जाट समुदाय से आता है। राजस्थान में करीब 12 फीसदी जाट समुदाय के वोटर हैं, जो राज्य 40-45 सीटों पर अहम भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि उनके कम से कम पांच विधायक जीतकर आएं, ताकि राष्ट्रीय पार्टी की दिशा में आगे बढ़ सके। साथ ही सरकार बनाने में अहम रोल अदा करे।

किसको पहुंचाएंगे नुकसान

हरियाणा में भाजपा और जजपा साथ-साथ हैं। मगर राजस्थान में जजपा अभी तक अकेले लड़ने के मूड में है। राजस्थान में जाट कभी कांग्रेस की तरफ तो कभी भाजपा की तरफ रहे हैं। दोनों ही पार्टियों ने जाट समुदाय को साधने की पूरी कोशिश की है। ऐसे में दुष्यंत चौटाला के मैदान में आने से जाट वोटरों को तीसरा विकल्प मिलेगा और जजपा दोनों दलों के वोट में सेंधमारी करने की पूरी कोशिश करेगी।

इन जगहों पर जाट वोटरों का दबदबा

चुरू, नागौर, झुंझनू, सीकर, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, अजमेर, गंगानगर, जोधपुर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़, सवाई माधोपुर, दौसा, अलवर और धौलपुर।

पार्टी इन लोगों को शामिल कर चुकी है

जजपा लगातार सेंधमारी करने में जुटी है। पार्टी में अब तक पूर्व विधायक प्रतिभा सिंह, डॉ मोहन सिंह नदवई, सुभाष धोलिया, कांग्रेस विधायक वीरेंद्र सिंह की पत्नी रीता सिंह शामिल हो चुकी हैं। प्रतिभा सिंह दो बाद निर्दलीय विधायक रह चुकी हैं। डॉ. मोहन सिंह नदवई की पत्नी दो बार भरतपुर जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं। धोलिया कांग्रेस नेता हैं और एनएसयूआई के जरिये अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।

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