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Chandigarh News: सियासी जमीन बचाने की जद्दोजहद में जजपा और इनेलो

Thu, 11 Apr 2024 02:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 02:25 AM IST
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JJP and INLD in struggle to save political ground
-पार्टी बिखराव के दौर में चौटाला परिवार को एकजुट करने की अटकलें
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-अजय और अभय चौटाला में चल रहा बयान वार, दोनों दलों की ग्रामीण क्षेत्र में पकड़

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनावों से पहले हरियाणा में नेताओं के दल बदलू अभियान के तेज होने से राजनीतिक दलों में अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए जद्दोजहद शुरू हो गई है। खासकर सरकार के गठबंधन से हटने के बाद से जजपा में लगातार इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। एक के बाद जजपा के नेता पार्टी को झटका दे रहे हैं। उधर, इनेलो इस मौके को भुनाने में जुट गया है। इनेलो की कोशिश है कि जजपा से टूटने वाले नेताओं और समर्थकों इनेलो के साथ जोड़ा जाए, क्योंकि दोनों ही दलों के समर्थकों की विचारधारा एक ही है और जजपा का जन्म भी इनेलो से टूट कर ही हुआ है।
विपक्ष में आने के बाद अब पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला लोगों के बीच में जा रहे हैं, हालांकि, गांवों में खुलकर उनका विरोध हो रहा है। धीरे धीरे ग्रामीण क्षेत्र में जजपा की पकड़ कमजोर हो रही है और उनके समर्थक ही दुष्यंत के विरोध में आ गए हैं। बिगड़ती स्थिति के बीच जजपा के संस्थापक डाॅ. अजय सिंह चौटाला ने दोनों दलों के एकजुट होने को लेकर कहा है कि अगर परिवार के मुखिया ओमप्रकाश चौटाला बुलाएंगे तो जरूर जाएंगे।
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उधर, इनेलो जजपा के साथ हो रहे पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। इस पर इनेलो नेता अभय चौटाला ने जजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए उनको गद्दार करार देते हुए दोनों दलों के एक होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। इनेलो के पास अभी प्रदेश में एक ही विधायक है और लोकसभा चुनावों में इनेलो प्रदेश के लोगों को यह संकेत देने की कोशिश में है कि जजपा नेताओं ने केवल सत्ता सुख के लिए भाजपा के साथ गठबंधन किया था। इस समय प्रदेश में जजपा और इनेलो दोनों ही दलों की स्थिति इतनी मजबूत नहीं है, लेकिन दोनों ही दल अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने के लिए एक-दूसरे पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। देखना यह है कि ताऊ देवीलाल के समर्थक किस दल की ओर रुख करते हैं।
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