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Chandigarh News: जेईई एडवांस... ऑल इंडिया में 29वां रैंक, ट्राइसिटी में टॉप रहे पीउषा दास
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चंडीगढ़। जेईई एडवांस-2025 के नतीजों में ट्राइसिटी के होनहार छात्रों ने परचम लहराया है। ऑल इंडिया 29वीं रैंक हासिल करने वाली पीउषा दास ने ट्राइसिटी टॉप किया है, वहीं अर्णव जिंदल ने 38वीं और रमित गोयल ने 45वीं रैंक के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। आईआईटी कानपुर ने सोमवार को नतीजे घोषित किए। विद्यार्थियों ने रोजाना 8 से 10 घंटे की मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया है। परिणाम जारी होने के बाद अब से आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी और जीएफटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन जोसा काउंसलिंग होगी। इस साल जोसा काउंसलिंग की ओर से 23 आईआटी, 32 एनआईटी, 26 ट्रिपल आईटी और 47 जीएफटीआई में प्रवेश दिया जाएगा। जेईई एडवांस की परीक्षा 18 मई हुई थी।
पीउषा बोले-खुद पर विश्वास रखें, यह मुश्किल परीक्षा नहीं
ऑल इंडिया में 29वां रैंक हासिल करने वाले मोहाली के पीउषा दास मूलरूप से बंगाल के रहने वाले हैं। उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मोहाली के नारायण स्कूल से की। उन्होंने 360 में से 300 अंक हासिल किए। जेईई मेंस परीक्षा में उन्होंने 300 में से 295 अंक लेकर 80वां रैंक हासिल किया था। पीउषा के पिता प्रांतिक दास मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर और उनकी मां सुजाता दास गृहिणी हैं। उनकी बहन देवांजलि दास बंगाल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। पीउषा ने बताया कि वह रोजाना 14 घंटे पढ़ाई करते थे। उन्हें फुटबॉल और क्रिकेट खेलना पसंद है। दौड़ में भी उन्हें रजत पदक मिला है। उन्होंने कहा कि खुद पर विश्वास रखें। यह मुश्किल परीक्षा नहीं है। कोई भी मेहनत कर इसे पास कर सकता है। उन्होंने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि रोजाना पढ़ाई करें। कभी भी बीच में गैप न लें। इसके अलावा रोजाना मॉक टेस्ट जरूर सॉल्व करें।
चंडीगढ़ के अर्णव जिंदल बोले- टॉप करने के मकसद से कभी पढ़ाई नहीं की
38वां रैंक लेकर संस्थान और माता-पिता का नाम रोशन करने वाले चंडीगढ़ के अर्णव जिंदल के पिता दीपक जिंदल बिजनेसमैन और मां रितु अग्रवाल टीचर हैं। उनकी बहन जानवी जिंदल शिमला से एमबीबीएस कर रही है। अर्णव जिंदल ने सेक्टर-8 के डीएवी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। अर्णव ने बताया कि वह रोजाना 10 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे, जिसकी बदौलत उनके 360 में से 300 अंक आए हैं। अर्णव ने कहा कि उन्होंने टॉप करने के मकसद से कभी पढ़ाई नहीं की, अपने काम को कल पर नहीं छोड़ा। इससे पहले जेईई मेंस परीक्षा में उन्होंने 300 में से 295 अंक हासिल करके देश भर में 36वां रैंक हासिल किया था। उनके पिता ने कहा कि उनके परिवार में सबसे बड़ी उपलब्धि है, इससे पहले किसी भी बच्चे ने इस लेवल पर कोई मुकाम हासिल नहीं किया।
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बहन से प्रेरित होकर हासिल की सफलता
360 में से 298 अंक लेकर 45वीं रैंक हासिल करने वाली रमित गोयल मूलरूप से करनाल के लाडवा की रहने वाले हैं। तीन साल से चंडीगढ़ में रहकर तैयारी कर रहे रमित के पिता अरविंद कुमार गिफ्ट शॉप चलाते हैं। मां संध्या रानी गृहिणी हैं। उन्होंने हर पल रमित का उत्साह बढ़ाया। यूएसए में कंप्यूटर इंजीनियर अपनी बहन रिया गोयल से प्रेरित होकर रमित ने यह क्षेत्र चुना। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक हासिल कर 168वां रैंक प्राप्त किया था। 12वीं में 96.8 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले रमित को गणित में 100 अंक मिले थे।
आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं चेरिल, दादा बोले- गौरव का क्षण
पंचकूला के सेक्टर-8 की रहने वाली चेरिल सिंगला ने 360 में से 286 अंक हासिल कर देशभर में 76वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक प्राप्त कर 285वीं रैंक हासिल की थी। चेरिल ने मनीमाजरा के डीसी मोंटेसरी स्मार्ट स्कूल से पढ़ाई कर 12वीं में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर और मैथमेटिक्स में बीटेक कर रही बहन विहा सिंगला से प्रेरित होकर चेरिल ने इस फील्ड में जाने का निर्णय लिया। चेरिल आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं। उन्हें पेंटिंग, चेस खेलना और किताबें पढ़ना पसंद है। उन्होंने रोजाना 8-10 घंटे फोकस होकर पढ़ाई की। उनके पिता कर्नल चेतन सिंगला और मां महक सिंगला ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताई। उनके दादा राम कुमार गुप्ता ने कहा कि यह गर्व का क्षण है।
आईआईटी मद्रास या कानपुर से पढ़ाई करना चाहते हैं केशव
मोहाली के केशव ने जेईई एडवांस में 147वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस 2025 में उन्होंने 749वीं रैंक हासिल की थी। केशव के पिता शिलाप मित्तल एक व्यवसायी हैं। उनकी मां अंजू बाला एक गृहिणी हैं। इन दोनों ने केशव की सफलता की यात्रा में हर संभव सहयोग दिया। केशव ने बताया कि उन्होंने हमेशा सीखने के प्रति गहरी लगन रखी और कठिन विषयों के लिए 8-9 घंटे की पढ़ाई की। इसके अलावा शिक्षकों के विशेष सत्रों से उन्हें कई कठिन प्रश्नों को समझने में मदद मिली। भविष्य में वह आईआईटी मद्रास या कानपुर से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करना चाहते हैं।
आईआईटी और कंप्यूटर साइंस कोडिंग में आगे पढ़ना चाहते हैं दीपिंदर सिंह ढिल्लों
दीपिंदर सिंह ढिल्लों ने जेईई एडवांस्ड 2025 में 180 वां रैंक हासिल किया। उनके पिता गुरमिंदर सिंह टीचर और मां नरिंदर कौर पंजाबी लेक्चरर हैं। दोनों ने शिक्षकों के रूप में दीपिंदर का मार्गदर्शन किया। 2025 में जेईई मेंस में उसने 234वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने रोजाना 9 घंटे मेहनत से कामयाबी हासिल कर खुद को साबित किया। उन्होंने कहा कि उनके नंबर उम्मीद से ज्यादा आए हैं। वह आईआईटी और कंप्यूटर साइंस कोडिंग में आगे पढ़ना चाहते हैं।
परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने किया कामयाब
हितेन मित्तल ने जेईई एडवांस्ड 2025 में 185वां रैंक हासिल किया। उनके पिता अजय मित्तल का व्यवसाय है जबकि उनकी मां सीमा एक गृहिणी हैं। उन्होंने जेईई मेंस 2025 में 116वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को सुलझाना उनके लिए मुमकिन नहीं था, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें निखारा। यह सहयोग जेईई एडवांस्ड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
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पीउषा बोले-खुद पर विश्वास रखें, यह मुश्किल परीक्षा नहीं
ऑल इंडिया में 29वां रैंक हासिल करने वाले मोहाली के पीउषा दास मूलरूप से बंगाल के रहने वाले हैं। उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मोहाली के नारायण स्कूल से की। उन्होंने 360 में से 300 अंक हासिल किए। जेईई मेंस परीक्षा में उन्होंने 300 में से 295 अंक लेकर 80वां रैंक हासिल किया था। पीउषा के पिता प्रांतिक दास मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर और उनकी मां सुजाता दास गृहिणी हैं। उनकी बहन देवांजलि दास बंगाल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। पीउषा ने बताया कि वह रोजाना 14 घंटे पढ़ाई करते थे। उन्हें फुटबॉल और क्रिकेट खेलना पसंद है। दौड़ में भी उन्हें रजत पदक मिला है। उन्होंने कहा कि खुद पर विश्वास रखें। यह मुश्किल परीक्षा नहीं है। कोई भी मेहनत कर इसे पास कर सकता है। उन्होंने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि रोजाना पढ़ाई करें। कभी भी बीच में गैप न लें। इसके अलावा रोजाना मॉक टेस्ट जरूर सॉल्व करें।
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चंडीगढ़ के अर्णव जिंदल बोले- टॉप करने के मकसद से कभी पढ़ाई नहीं की
38वां रैंक लेकर संस्थान और माता-पिता का नाम रोशन करने वाले चंडीगढ़ के अर्णव जिंदल के पिता दीपक जिंदल बिजनेसमैन और मां रितु अग्रवाल टीचर हैं। उनकी बहन जानवी जिंदल शिमला से एमबीबीएस कर रही है। अर्णव जिंदल ने सेक्टर-8 के डीएवी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। अर्णव ने बताया कि वह रोजाना 10 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे, जिसकी बदौलत उनके 360 में से 300 अंक आए हैं। अर्णव ने कहा कि उन्होंने टॉप करने के मकसद से कभी पढ़ाई नहीं की, अपने काम को कल पर नहीं छोड़ा। इससे पहले जेईई मेंस परीक्षा में उन्होंने 300 में से 295 अंक हासिल करके देश भर में 36वां रैंक हासिल किया था। उनके पिता ने कहा कि उनके परिवार में सबसे बड़ी उपलब्धि है, इससे पहले किसी भी बच्चे ने इस लेवल पर कोई मुकाम हासिल नहीं किया।
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बहन से प्रेरित होकर हासिल की सफलता
360 में से 298 अंक लेकर 45वीं रैंक हासिल करने वाली रमित गोयल मूलरूप से करनाल के लाडवा की रहने वाले हैं। तीन साल से चंडीगढ़ में रहकर तैयारी कर रहे रमित के पिता अरविंद कुमार गिफ्ट शॉप चलाते हैं। मां संध्या रानी गृहिणी हैं। उन्होंने हर पल रमित का उत्साह बढ़ाया। यूएसए में कंप्यूटर इंजीनियर अपनी बहन रिया गोयल से प्रेरित होकर रमित ने यह क्षेत्र चुना। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक हासिल कर 168वां रैंक प्राप्त किया था। 12वीं में 96.8 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले रमित को गणित में 100 अंक मिले थे।
आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं चेरिल, दादा बोले- गौरव का क्षण
पंचकूला के सेक्टर-8 की रहने वाली चेरिल सिंगला ने 360 में से 286 अंक हासिल कर देशभर में 76वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक प्राप्त कर 285वीं रैंक हासिल की थी। चेरिल ने मनीमाजरा के डीसी मोंटेसरी स्मार्ट स्कूल से पढ़ाई कर 12वीं में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर और मैथमेटिक्स में बीटेक कर रही बहन विहा सिंगला से प्रेरित होकर चेरिल ने इस फील्ड में जाने का निर्णय लिया। चेरिल आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं। उन्हें पेंटिंग, चेस खेलना और किताबें पढ़ना पसंद है। उन्होंने रोजाना 8-10 घंटे फोकस होकर पढ़ाई की। उनके पिता कर्नल चेतन सिंगला और मां महक सिंगला ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताई। उनके दादा राम कुमार गुप्ता ने कहा कि यह गर्व का क्षण है।
आईआईटी मद्रास या कानपुर से पढ़ाई करना चाहते हैं केशव
मोहाली के केशव ने जेईई एडवांस में 147वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस 2025 में उन्होंने 749वीं रैंक हासिल की थी। केशव के पिता शिलाप मित्तल एक व्यवसायी हैं। उनकी मां अंजू बाला एक गृहिणी हैं। इन दोनों ने केशव की सफलता की यात्रा में हर संभव सहयोग दिया। केशव ने बताया कि उन्होंने हमेशा सीखने के प्रति गहरी लगन रखी और कठिन विषयों के लिए 8-9 घंटे की पढ़ाई की। इसके अलावा शिक्षकों के विशेष सत्रों से उन्हें कई कठिन प्रश्नों को समझने में मदद मिली। भविष्य में वह आईआईटी मद्रास या कानपुर से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करना चाहते हैं।
आईआईटी और कंप्यूटर साइंस कोडिंग में आगे पढ़ना चाहते हैं दीपिंदर सिंह ढिल्लों
दीपिंदर सिंह ढिल्लों ने जेईई एडवांस्ड 2025 में 180 वां रैंक हासिल किया। उनके पिता गुरमिंदर सिंह टीचर और मां नरिंदर कौर पंजाबी लेक्चरर हैं। दोनों ने शिक्षकों के रूप में दीपिंदर का मार्गदर्शन किया। 2025 में जेईई मेंस में उसने 234वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने रोजाना 9 घंटे मेहनत से कामयाबी हासिल कर खुद को साबित किया। उन्होंने कहा कि उनके नंबर उम्मीद से ज्यादा आए हैं। वह आईआईटी और कंप्यूटर साइंस कोडिंग में आगे पढ़ना चाहते हैं।
परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने किया कामयाब
हितेन मित्तल ने जेईई एडवांस्ड 2025 में 185वां रैंक हासिल किया। उनके पिता अजय मित्तल का व्यवसाय है जबकि उनकी मां सीमा एक गृहिणी हैं। उन्होंने जेईई मेंस 2025 में 116वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को सुलझाना उनके लिए मुमकिन नहीं था, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें निखारा। यह सहयोग जेईई एडवांस्ड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।