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जाट आंदोलन : जाटों ने दिल्ली को लेकर दी बड़ी चेतावनी, मुश्किल में प्रशासन

Tue, 07 Feb 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 07 Feb 2017 12:39 AM IST
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Jats warnned govt about Delhi, administration's trouble may increase
जाट आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

जाट नेताओं की ओर से हरियाणा में सख्ती होने पर दिल्ली की सीमाएं सील करने की चेतावनी को देखते हुए दिल्ली की सीमा से सटे सभी जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़े करने के निर्देश जारी किए गए हैं। 

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मुनक नहर व एनएच-1 पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। सोनीपत की सीमा से सटे दिल्ली के नरेला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने हरियाणा में सरकार के सख्ती दिखाने पर दिल्ली की सीमा सील करने की चेतावनी दी थी। 
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सूत्रों के अनुसार इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि दिल्ली की सीमा से सटे हरियाणा के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए ताकि किसी तरह का व्यवधान पैदा नहीं हो। 
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सोमवार को पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स ने नेशनल हाइवे पर दिल्ली से सटी कई जगहों पर फ्लैग मार्च निकाला है। कई प्वाइंट ऐसे चिह्नित किए गए है, जहां फोर्स तैनात की जाएगी। एसपी अश्विन शैणवी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी की हुई है। लेकिन अब नेशनल हाइवे पर कई प्वाइंट देखे गए है और वहां अतिरिक्त फोर्स तैनात की जाएगी।

भाकियू नेता चढूनी ने दिया अपना समर्थन

Jats warnned govt about Delhi, administration's trouble may increase
jat andolan - फोटो : अमर उजाला

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता गुरनाम सिंह चढूनी सोमवार को जसिया में चल रहे जाट न्याय धरने पर पहुंचे और अपना समर्थन दिया। हालांकि अपने 10 मिनट के भाषण में वह 9 मिनट तक किसानों की स्थिति पर बोलते रहे। 

जब मंच पर मौजूद धरना संचालन कमेटी के सदस्य कृष्णलाल हुड्डा ने उनके कान में कुछ कहा तो चढूनी बोले कि भाकियू में शामिल जाट बिरादरी के किसान नेता शुरू से ही आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। दूसरी बिरादरी के नेता और लोग तो शामिल होने से रहे। 

दोपहर करीब दो बजे गुरनाम सिंह चढ़ूनी धरनास्थल पर पहुंचे। आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर किसी अरबपति एवं नेता का नहीं, बल्कि किसान और मजदूर का बेटा शहीद होता है। 

उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश की 65 प्रतिशत कमाई किसानों को मिलती थी, जबकि आज केवली 11 रुपये किसान के हिस्से में आते हैं। साल 2020 में मात्र 6 प्रतिशत कमाई का हिस्सा किसान को मिल पाएगा। उन्होंने पूछा कि ऐसे में किसान कैसे गुजारा करेगा? किसानों को अपने हक की लड़ाई तो लड़नी होगी। 

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