एंबुलेंस से आई बारात, सामान्य कपड़ों में दुल्हन विदा
प्रदेश भर में फैली जाट आरक्षण आंदोलन की आग से जहां आम आदमी परेशान है, वहीं करनाल के एक परिवार के लिए यह सदमे से कम नहीं है। बेटी की शादी के लिए परिवार के लोग काफी समय से तैयारी कर रहे थे लेकिन जब दूल्हा और बारात एंबुलेंस में पहुंचे तो सब सकपका गए।
आनन-फानन में शादी भी हो गई, लेकिन आंदोलनकारियों से बचने के लिए बेटी ने न तो सोलह शृंगार किए और न ही शादी वाली ड्रेस पहनी। दूल्हे को भी सामान्य कपड़े पहनाए और बाद में एंबुलेंस से ही विदा कर दिया। शुक्र है कि बेटी अपनी ससुराल रोहतक पहुंच गई है। अब परिवार की जान में जान आई है।
यह सिहरन पैदा करने वाली दास्तां करनाल के सेक्टर-9 स्थित पाठक परिवार की है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत अशोक पाठक ने अपनी बेटी की शादी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थी। विवाह का कार्यक्रम 18 फरवरी को था।
बारात रोहतक शहर से आनी थी। बारात की आवभगत के लिए भी लाखों रुपये के खर्च से पुख्ता इंतजाम किए गए। लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन की आग ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।
एंबुलेंस लेकर फर्जी मरीज बनकर करनाल पहुंचे बाराती
रोहतक से करनाल आने के सभी रास्ते बंद होने के कारण रोहतक से दूल्हा और बारातियों ने रोहतक के एक निजी अस्पताल से चार एंबुलेंस ली और फर्जी मरीज बनाकर उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कराया। बाद में दिल्ली से होते हुए किसी तरह करनाल पहुंचे। यहां पर विधिवत शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन को सामान्य कपड़े पहनाकर विदा किया गया।
इसी प्रकार बारातियों को भी बीमार बनाकर यहां से रवाना किया, ताकि जाम लगाने वाले उन्हें रास्ता दे दें। देर रात दिल्ली से होते हुए बाराती और दूल्हा-दुल्हन किसी प्रकार रोहतक पहुंचे। देर रात बेटी के ससुराल पहुंचने के बाद ही पाठक परिवार ने राहत की सांस ली।
सगाई की रस्म को भी नहीं जा सके
अशोक पाठक और उसका बड़े भाई महेंद्र पाठक बुधवार को अपने रिश्तेदारों के साथ सगाई की रस्म अदा करने और शगुन देने निकले थे। लेकिन पूरा दिन जाम में फंसे रहने के बाद शाम को शगुन दिए बिना ही घर लौट आए। अब बारात अगले दिन आनी थी, लेकिन कहीं से भी कोई रास्ता खुला न होने की वजह से अशोक ने बारात पहुंचने की सारी उम्मीदें छोड़ दी थी।