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‘आरक्षण आंदोलन के मृतकों को छानबीन से पहले नहीं मिलेगा मुआवजा’
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 04 May 2016 12:41 PM IST
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जाट भवन में सभा करते जाट समुदाय के लोग।
- फोटो : amar ujala
हरियाणा में बीते फरवरी माह के दौरान जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा, आगजन्री औ लूटपाट की घटनाओं को लेकर प्रदेश सरकार के तीखे तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। आंदोलन की हिंसा में मारे गए लोगों के लिए प्रदेश सरकार तब तक मुआवजा जारी नहीं करेगी, जब तक मारे गए लोगों के बारे में यह साबित नहीं हो जाता कि उनका हिंसा, आगजनी और लूटपाट के मामलों में हाथ नहीं था।
यह बात प्रदेश के गृह सचिव पीके दास ने अमर उजाला से बातचीत में कही। आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में 30 लोगों की मौत हुई थी।
उन्होंने कहा कि कुछ मृतकों के लिए सरकार ने उनके अभिभावकों को जो राशि जारी की है, वह मुख्यमंत्री राहत कोष से दी गई है, लेकिन ऐसे मामलों में भी अगर जांच पूरी होने पर मृतक दोषी पाया गया तो सरकार उसके अभिभावकों को दी गई राशि वापस ले सकती है।
जांच का काम कब तक पूरा होगा, इस सवाल पर गृह सचिव ने कहा कि जांच का काम कई स्तरों पर चल रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किसी मृतक के बारे में यह मान लिया गया है कि वह निर्दोष था, लेकिन उसके इलाके में हुई आगजनी या लूटपाट की घटना की जांच में पाया जाता है कि मृतक भी अपराध में शामिल था, तो उसे उपद्रवी मानते हुए सरकार कोई मुआवजा नहीं देगी। गृह सचिव ने कहा कि जांच का सारा काम पूरा होने के बाद ही मृतकों के दोषी या निर्दोष होने के बारे में पता चल सकेगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार केवल उपद्रवियों के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं कर रही बल्कि युवाओं को हिंसा के लिए भड़काने वाले कथित नेताओं पर भी कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि उपद्रव के आरोपियों के अलावा ऐसे नेताओं की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जुटाया जा रहा है और दोषी साबित होते ही उपद्रवी और उसे भड़काने वाले नेता की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंसा के लिए केवल युवाओं को ही दोष देना उचित नहीं है। उन्हें कोई व्यक्ति तो अपने स्वार्थ के लिए भड़का रहा था।
गिरफ्तारियों के खिलाफ प्रदर्शन पर सरकार सख्त
गृह सचिव पीके दास ने कहा कि सरकार ने साफ तौर पर निर्देश जारी किए हैं कि आंदोलन हिंसा की जांच के दौरान किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाए, लेकिन जिन लोगों के नाम हिंसा व उपद्रव में सामने आते हैं, उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जाट नेता पहले ही कह चुके हैं कि आरक्षण आंदोलन में हिंसा, लूटपाट व आगजनी करने वाले जाट नहीं थे। इसलिए उन्हें उपद्रव के आरोपियों की गिरफ्तारी का विरोध करने की बजाय सरकार को सहयोग देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।
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यह बात प्रदेश के गृह सचिव पीके दास ने अमर उजाला से बातचीत में कही। आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में 30 लोगों की मौत हुई थी।
उन्होंने कहा कि कुछ मृतकों के लिए सरकार ने उनके अभिभावकों को जो राशि जारी की है, वह मुख्यमंत्री राहत कोष से दी गई है, लेकिन ऐसे मामलों में भी अगर जांच पूरी होने पर मृतक दोषी पाया गया तो सरकार उसके अभिभावकों को दी गई राशि वापस ले सकती है।
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जांच का काम कब तक पूरा होगा, इस सवाल पर गृह सचिव ने कहा कि जांच का काम कई स्तरों पर चल रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किसी मृतक के बारे में यह मान लिया गया है कि वह निर्दोष था, लेकिन उसके इलाके में हुई आगजनी या लूटपाट की घटना की जांच में पाया जाता है कि मृतक भी अपराध में शामिल था, तो उसे उपद्रवी मानते हुए सरकार कोई मुआवजा नहीं देगी। गृह सचिव ने कहा कि जांच का सारा काम पूरा होने के बाद ही मृतकों के दोषी या निर्दोष होने के बारे में पता चल सकेगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार केवल उपद्रवियों के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं कर रही बल्कि युवाओं को हिंसा के लिए भड़काने वाले कथित नेताओं पर भी कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि उपद्रव के आरोपियों के अलावा ऐसे नेताओं की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जुटाया जा रहा है और दोषी साबित होते ही उपद्रवी और उसे भड़काने वाले नेता की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंसा के लिए केवल युवाओं को ही दोष देना उचित नहीं है। उन्हें कोई व्यक्ति तो अपने स्वार्थ के लिए भड़का रहा था।
गिरफ्तारियों के खिलाफ प्रदर्शन पर सरकार सख्त
गृह सचिव पीके दास ने कहा कि सरकार ने साफ तौर पर निर्देश जारी किए हैं कि आंदोलन हिंसा की जांच के दौरान किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाए, लेकिन जिन लोगों के नाम हिंसा व उपद्रव में सामने आते हैं, उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जाट नेता पहले ही कह चुके हैं कि आरक्षण आंदोलन में हिंसा, लूटपाट व आगजनी करने वाले जाट नहीं थे। इसलिए उन्हें उपद्रव के आरोपियों की गिरफ्तारी का विरोध करने की बजाय सरकार को सहयोग देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।