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जाट आरक्षण मामला: दलीलें पूरी, इसी महीने आ सकता है फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Nov 2016 09:21 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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हरियाणा में जाटों सहित छह जातियों को आरक्षण पर इसी माह हाईकोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है। मामले में याचिका दाखिल कर आरक्षण को चुनौती देने वाले वकील की गैर मौजूदगी के चलते वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केस की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद बेंच ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार और जाट नेताओं की ओर से दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब केवल याची की दलीलें बाकी हैं। ऐसे में अगली सुनवाई पर इसे पूराकर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा। केस की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
हरियाणा सरकार ने एक्ट के माध्यम से जाटों सहित 6 जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। इसे चुनौती देते हुए मुरारी लाल गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि किसी भी स्थिति में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। हरियाणा सरकार ने इन 6 जातियों को आरक्षण देने केलिए न तो कोई सर्वे कराया न ही सरकार के पास कोई आंकड़ें हैं। ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार द्वारा दिया गया आरक्षण लाभ गलत है।
हरियाणा सरकार ने केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरक्षण दिया है, जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।
हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद इन 6 जातियों को दिए गए आरक्षण लाभ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार और जाट नेताओं ने अपनी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रखी थीं। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि जाट आरक्षण पर लगी रोक हटाने के लिए दाखिल हरियाणा सरकार और जाट नेताओं की अर्जी पर संभवत: अगली सुनवाई पर फैसला कर दिया जाएगा।
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हरियाणा सरकार ने एक्ट के माध्यम से जाटों सहित 6 जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। इसे चुनौती देते हुए मुरारी लाल गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि किसी भी स्थिति में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। हरियाणा सरकार ने इन 6 जातियों को आरक्षण देने केलिए न तो कोई सर्वे कराया न ही सरकार के पास कोई आंकड़ें हैं। ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार द्वारा दिया गया आरक्षण लाभ गलत है।
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हरियाणा सरकार ने केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरक्षण दिया है, जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।
हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद इन 6 जातियों को दिए गए आरक्षण लाभ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार और जाट नेताओं ने अपनी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रखी थीं। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि जाट आरक्षण पर लगी रोक हटाने के लिए दाखिल हरियाणा सरकार और जाट नेताओं की अर्जी पर संभवत: अगली सुनवाई पर फैसला कर दिया जाएगा।
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