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कमेटी की रिपोर्ट में पहले 90 दोषी थे, अब 80 हैं, 10 कहां गए?

Tue, 24 May 2016 01:13 PM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़।
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Tue, 24 May 2016 01:13 PM IST
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जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते। - फोटो : amar ujala
प्रकाश सिंह कमेटी की जांच रिपोर्ट में अपनी जिम्मेवारी निभाने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों की संख्या पहले से 10 कम हो गई है। 71 दिनों के अध्ययन के बाद कमेटी ने 10 दिन पहले 450 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
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जांच में 90 ऐसे अधिकारियों के नाम सामने आए जिन्होंने अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती, लेकिन अब यह आंकड़ा 80 पर पहुंच गया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार कौन हैं वो 10 अफसर जिन्हें बचाने के लिए आंकड़ों में फेरबदल किया जा रहा है। कमेटी के चेयरमैन के मुताबिक अगर संख्या को लेकर किसी तरह की विसंगति रह गई हैं तो इसपर दोबारा गौर करेंगे।
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जांच कमेटी के चेयरमैन प्रकाश सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि रिपोर्ट में जिन 90 अधिकारियों के खिालाफ प्रतिकूल टिप्पणी की गई है, उनकी संख्या कम होकर 80 रह गई है। रिपोर्ट में 90 अधिकारियों के बाबत पूछने पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कुछ अधिकारियों के नाम दोबारा शामिल कर लिए गए होंगे। इसकी दोबारा जांच करेंगे। जिन अधिकारियों पर प्रतिकूल टिप्पणी की गई है, उनमें 59 पुलिस के जबकि 21 सिविल ऑफिसर्स हैं। रिपोर्ट पेश करने के बाद अब तक करीब डेढ़ दर्जन से अधिक से अधिक पर गाज गिर चुकी है। माना जा रहा है कि कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिरेगी।
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फरवरी में हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश के आठ जिलों में उपद्रवियों ने हिंसा, आगजनी और लूट की वारदातों को अंजाम दिया। इसमें अधिकारियों की नाकामी की जांच के लिए सरकार ने यूपी और असम के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। कमेटी को इस आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। कमेटी ने मई के दूसरे सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट सौंपने के बाद सचिवालय में हुई प्रेेस कांफ्रेंस में खुद कमेटी के चेयरमैन ने बताया था कि इस पूरे प्रकरण में 90 ऐसे पुलिस और सिविल अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।
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