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जाट आरक्षण: आंदोलनकारी नेताओं और सरकार के बीच बनी बात

Sun, 19 Jun 2016 06:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 19 Jun 2016 06:07 PM IST
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jat protest for reservation: jat leader will be broken strike today
जाट आंदोलन - फोटो : amar ujala

जाट आरक्षण आंदोलन के तहत प्रदेश के 12 जिलों में पिछले 14 दिन से चल रहे धरनों को खत्म करवाने के लिए आखिरकार सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बना गतिरोध शनिवार रात टूट गया। नई दिल्ली के हरियाणा भवन में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और सरकार की ओर से परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार के बीच हुई वार्ता में सहमति बनने के बाद फैसला किया गया कि रविवार शाम पांच बजे तक धरने खत्म कर दिए जाएंगे और आंदोलन को 31 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है।

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वार्ता के दौरान परिवहन मंत्री पंवार ने समिति की अधिकतर मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया, जिस पर अभी से कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इसके बाद मलिक ने कहा कि रविवार शाम पांच बजे सभी धरने खत्म कर दिए जाएंगे और आंदोलन को 31 अगस्त तक के लिए स्थगित किया जा रहा है। इस बीच सरकार की ओर से कोई लापरवाही रहती है तो 13 सितंबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर फिर से आंदोलन शुरू किया जा सकता है। गौरतलब है कि समिति की ओर से प्रदेश के 12 जिलों में पांच जून से लगातार धरने दिए जा रहे हैं। हालांकि धरने शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे है, लेकिन सरकार ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी धरनास्थलों पर  भारी फोर्स लगा रखी है। रोहतक और सोनीपत में इंटरनेट सेवाएं बंद है।
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चंडीगढ़ में वार्ता से इनकार किया तो दिल्ली में बुलाया सरकार ने 17 जून को चंडीगढ़ में वार्ता के लिए जाट संगठनों और खापों को बुलाया था,लेकिन यशपाल मलिक गुट ने इस वार्ता में शामिल होने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि मलिक को  बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया। ऐसे में कोई भी इस वार्ता में शामिल नहीं होगा। इसके बाद सरकार ने मलिक को दिल्ली में वार्ता के लिए बुलाया। सरकार के प्रतिनिधि के रूप में परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार वार्ता करने पहुंचे। बैठक के दौरान यशपाल मलिक ने लिखित में 10 सूत्री एजेंडा पंवार के सामने रखा और जाट बिरादरी के लोगों पर हो रही कार्रवाई को लेकर विरोध भी जताया। मलिक ने कहा कि सभी मांगों को सरकार कानूनी सीमा के तहत तय समय में पूरा करे। जिस पर पंवार ने आश्वासन दिया कि सरकार समिति की सभी वैधानिक मांगों पर विचार करेगी और उनका समाधान किया जाएगा।
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सभी धरनास्थलों पर जाएगा प्रतिनिधिमंडल पंवार के आश्वासन के बाद जाट नेताओं ने मंत्री को भरोसा दिलाया कि रविवार शाम पांच बजे तक समिति का एक प्रतिनिधिमंडल सभी धरनों जाएगा और वहां की कोर कमेटी से बात करके भूख हड़ताल खत्म कराएंगे। लोगों से बातचीत कर धरने स्थगित कराए जाएंगे। यशपाल मलिक ने कहा कि प्रदेश में जुलाई और अगस्त में कार्यकारिणी की बैठक की जाएगी। सरकार मांगों को पूरा करने में कोई हीलाहवाली करती है तो 13 सितंबर को हिसार के मय्यड़ में शहीद सुनील श्योराण की शहादत दिवस पर शहीदी रैली के साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग होगी। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

यूपी में भी धरने खत्म, अब बैठकें होगी
मलिक ने बताया कि हरियाणा के धरनों के समर्थन में यूपी में भी धरना प्रदर्शन चल रहे थे। वह धरने केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी श्रेणी में शामिल होने के लिए चल रहे थे, जो अब नहीं होगे, लेकिन पहले से नियत तिथियों पर जिला कार्यकारिणी की बैठकें होगी। 

जाट आरक्षण मामले में यह था बातचीत का दस सूत्री एजेंडा

jat protest for reservation: jat leader will be broken strike today
जाट आरक्षण के लिए विरोध - फोटो : amar ujala

-सरकार हाईकोर्ट में जाट आरक्षण मामले की गम्भीरतापूर्वक पैरवी करे और उसे संविधान की नौवीं सूची में डालने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे।
-आरक्षण आन्दोलन के दौरान तथा उसके बाद जेल में बंद निर्दोष लोगों को छोड़ जाए। 
-आन्दोलनों के दौरान (वर्तमान व पिछले आन्दोलन में दर्ज) मुकदमों को वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। किसी निर्दोष आन्दोलनकारी को गिरफ्तार न किया जाए। जींद में जिन 130 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था, उस मामले की निष्पक्ष जांच हो। निर्दोष पाए जाने पर तुरंत मुकदमा वापस लिया जाए तथा जांच के दौरान किसी को भी गिरफ्तार न किया जाए।

-आरक्षण आन्दोलन के दौरान शहीद हुए सभी लोगों व घायलों को मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए। 
-हिंसा का षड्यंत्र रचने वाले सांसद राजकुमार सैनी की ओबीसी ब्रिगेड द्वारा जाट समाज के महापुरुषों की मूर्तियों को खण्डित करने वाले तथा जाट धर्मशालाओं व उनके प्रतिष्ठानों पर हमला करने वालों पर कार्रवाई हो।

- 5 जून से शुरू हुए आन्दोलन की तैयारियों के दौरान सरकार द्वारा जारी सभी नोटिसों व दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए। जिन जिला उपायुक्तों द्वारा जाट जनप्रतिनिधियों (सरपंचों) की ग्रांट रोकी गई, वह अविलम्ब जारी की जाए। 
-केन्द्र में जाट आरक्षण के लिये वैंकया नायडू की अध्यक्षता में गठित कमेटी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वित्तमन्त्री अरुण जेटली से वार्ता के लिए समय निर्धारित किया जाए।
-अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा बैठकों, सम्मेलनों पर प्रतिबंध के साथ-साथ समिति के पदाधिकारियों को प्रताड़ित करने की कार्रवाई पर रोक लगाने और बैठकों व रैलियों की 24 घंटे में अनुमति प्रदान की जाए।

-निर्दोष लोगों की रिहाई, मुकदमों की वापसी व जाटों के साथ हो रहे सरकारी भेदभाव को दूर करने के लिए सरकार द्वारा 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय एक कमेटी गठित की जाए, जिसके साथ मिलकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा गठित 21 सदस्यीय कमेटी के लोग अपने साथ हो रहे भेदभावों को बताएं और उस कमेटी की सिफारिशों कएवं समिति द्वारा गठित कमेटी की सहमति के आधार पर राज्य सरकार सभी समस्याओं को दूर करें।
-सभी मांगों पर कार्रवाई के लिए समय सीमा का निर्धारण किया जाए।

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