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जाट आंदोलन के कारण दिल्ली-चंडीगढ़ रूट पर ऐसा था हाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 22 Feb 2016 10:16 AM IST
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बेशक दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे खोल दिया गया है, लेकिन बीते दिनों में इस रूट पर यातायात का जो हाल था, आप जानेंगे तो चौंक जाएंगे। जाट आरक्षण आंदोलन की आग ने लोगों की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया था।
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करनाल से चंडीगढ़ के बीच 125 किमी. का जो सफर मैं बस से अमूमन ढाई से तीन घंटे में तय करता था, रविवार को उसे पूरा करने में 6 घंटे लग रहे थे। सीधी एक ही बस से होने वाली यात्रा टुकड़ों में कई बस और दूसरे वाहन बदल कर पूरी करनी पड़ रही थी। सरकारी बसों की बजाए केवल निजी बसें ही आने-जाने का विकल्प थीं।
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अंबाला से चंडीगढ़ 250 रुपये सवारी
अंबाला से चंडीगढ़ पहुंचने के हालात तो और भी बुरे थे। अंबाला से पंजाब के लिए तो निजी बसें मिल रही थीं, लेकिन चंडीगढ़ केलिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं था। मेरे से पहले 5 लड़कियां और तीन लड़के बस का इंतजार कर रहे थे। ऑटो भी लालड़ू तक ले जाने को तैयार थे। इसी मजबूरी का फायदा टैक्सी चालक उठा रहे थे।
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किराया सुनकर सब हैरान रह गए। 50 किमी. का जो सफर 50 रुपये में तय होता है उसका सीधा 5 गुणा किराया मांगा जा रहा था। कई बुजुर्ग और महिलाएं टैक्सी चालकों के सामने गिड़गिड़ाते दिखे। किराया कम लेने की गुहार लगा रहे थे। पास खड़े पुलिसकर्मी हाथ पर हाथ धरे केवल तमाशा देख रहे थे। सवारियां अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वाहनों के पीछे भागा-दौड़ी कर रही थीं।
टूरिस्ट बसें भी ढोतीं मिलीं सवारियां
सरकारी बसें बंद होने का फायदा निजी बस चालक उठा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर थोड़ी-थोड़ी दूरी के लिए टूरिस्ट बसें चलाई जा रही हैं। सड़कों पर केवल यही बसें दिखाई दे रही हैं। हालांकि इन बसों में किराया लगभग सरकारी बसों जितना ही लिया जा रहा है। ऑटो और टैक्सी चालक मनमाफिक किराया वसूल रहे हैं।
20 हजार में भी टैक्सी दिल्ली जाने के लिए तैयार नहीं
जाट आरक्षण के आड़ में हो रहे उपद्रव से चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए टैक्सी सेवा पूरी तरह से ठप हो गई है। दिल्ली जाने के लिए कोई भी टैक्सी तैयार नहीं है। इससे दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं। सेक्टर 32 स्थित टैक्सी स्टैंड के मालिक सुखविंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि पिछले तीन दिन से उनकी एक भी टैक्सी दिल्ली के लिए रवाना नहीं हुई है।
लोग 20 हजार रुपये तक देने को तैयार हैं, लेकिन फिर भी टैक्सी नहीं भेजी जा रही है। टैक्सी संचालक कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहते। सिद्धू की एंबुलेंस भी चलती है। वे फिलहाल अंबाला तक एंबुलेंस को रवाना कर रहे हैं। उसके बाद अंबाला से दूसरी एंबुलेंस संचालक के साथ को-आर्डिनेट कर मरीजों को उनके घर पहुंचाया जा रहा है।
ई-कामर्स कंपनी की डिलीवरी भी प्रभावित
एनएच-वन हाईवे बंद होने से सिर्फ आवाजाही ही नहीं प्रभावित हो रही, बल्कि कोरियर सेवा भी प्रभावित हो रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूडॉट शॉप डॉट इन के डायरेक्टर नरेश गर्ग बाबी ने बताया कि 70 प्रतिशत कोरियर सड़क के रास्ते से जाती है, बाकी हवाई रास्ते। जो सड़क के रास्ते कोरियर जाते हैं, वे पिछले तीन दिन नहीं गए हैं। सभी सामान स्टोर पर ही रखा है। आगे क्या स्थिति होने वाली है, इस बारे में बताना मुश्किल है, लेकिन नुकसान बहुत हो रहा है।