{"_id":"6303e9668747d22710246779","slug":"japgobind-singh-became-a-pilot-in-canada-at-the-age-of-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"उपलब्धि: कनाडा में जालंधर के जपगोबिंद सिंह ने रचा इतिहास, 16 साल की उम्र में बने पायलट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उपलब्धि: कनाडा में जालंधर के जपगोबिंद सिंह ने रचा इतिहास, 16 साल की उम्र में बने पायलट
Tue, 23 Aug 2022 02:13 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 23 Aug 2022 02:13 AM IST
सार
ट्रांसपोर्ट कनाडा ने जपगोबिंद सिंह को हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस जारी कर दिया है। जपगोबिंद सिंह ने पायलट बनने की तैयारी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया से शुरू की थी और कनाडा के तमाम हिस्सों में ट्रेनिंग लेने के बाद क्यूबिक में उनकी आखिरी ट्रेनिंग खत्म हुई।
विज्ञापन
जपगोबिंद सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के जालंधर के गांव बुट्टरां निवासी 16 साल के अमृतधारी सिख जपगोबिंद सिंह ने कनाडा में इतिहास रच दिया है। 16 साल की उम्र में कनाडा में ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलता लेकिन जपगोबिंद ने सोलो पायलट का लाइसेंस हासिल कर सबको चकित कर दिया। जपगोबिंद की उपलब्धि से पंजाबी मूल के लोगों में खुशी की लहर है।
विज्ञापन
ट्रांसपोर्ट कनाडा ने जपगोबिंद सिंह को हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस जारी कर दिया है। जपगोबिंद सिंह ने पायलट बनने की तैयारी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया से शुरू की थी और कनाडा के तमाम हिस्सों में ट्रेनिंग लेने के बाद क्यूबिक में उनकी आखिरी ट्रेनिंग खत्म हुई। इसके बाद अमृतधारी सिख जपगोबिंद सिंह पायलट बन गए हैं।
विज्ञापन
जपगोबिंद सिंह मूलरूप से पंजाबी हैं लेकिन स्कूली शिक्षा कनाडा से ही हासिल की है। उन्होंने रोबोटिक्स मुकाबलों में पहला स्थान हासिल किया था। सरीह के खालसा स्कूल के विद्यार्थी जपगोबिंद सिंह को कनाडा की राजधानी के विश्विद्यालयों ने स्पेस इंजीनियरिंग के लिए स्कॉलरशिप का ऑफर भी दिया है।
विज्ञापन
कनाडा के वरिष्ठ पंजाबी लेखक गुरप्रीत सिंह सहोता ने कहा कि जपगोबिंद सिंह ने सिख कौम का सिर गर्व से ऊंचा किया है और इससे कनाडा में बसे पंजाबी व सिख कौम में काफी खुशी की लहर है, क्योंकि उसने इतिहास रच दिया है। 16 साल की उम्र में वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।