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Hindi News ›   Chandigarh ›   Jan Aushadhi Kendras are closed in GMCH 32 and GMSH 16 of Chandigarh

चंडीगढ़: सरकारी अस्पतालों में बंद पड़े हैं जन औषधि केंद्र, महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो रहे मरीज

Mon, 11 Apr 2022 05:06 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 11 Apr 2022 05:06 PM IST
सार

जन औषधि केंद्र के संचालन का जिम्मा रेडक्रास सोसाइटी को दिया गया है लेकिन सोसाइटी को तीन साल में एक भी संचालक नहीं मिल पाया। दूसरी ओर इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भी कोई रुचि नहीं है।

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Jan Aushadhi Kendras are closed in GMCH 32 and GMSH 16 of Chandigarh
जीएमसीएच 32 में बंद पड़ा जन औषधि केंद्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में जन औषधि केंद्र डेढ़ साल और जीएमसीएच-32 में तीन साल से बंद पड़ा है। मरीजों को बाहर से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। हैरानी की बात है कि सरकारी अस्पतालों में सस्ती दवा के लिए जन औषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं लेकिन इन पर वर्षों से ताला लटक रहा है। उधर, पीजीआई में जन औषधि केंद्र की दो दुकानें संचालित हो रही हैं।
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जन औषधि केंद्र के संचालन का जिम्मा रेडक्रास सोसाइटी को दिया गया है लेकिन सोसाइटी को तीन साल में एक भी संचालक नहीं मिल पाया। दूसरी ओर इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भी कोई रुचि नहीं है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन दोनों अस्पतालों में जन औषधि केंद्र चलाने वाला कोई नहीं मिल रहा, वहीं लोगों को सिविल अस्पताल में भी जन औषधि केंद्र खुलने का सपना दिखाया जा रहा है। इससे लोगों में रोष है। मरीजों का आरोप है कि प्रशासन जान बूझकर अस्पताल में सस्ती दवा की दुकान नहीं खुलने दे रहा ताकि मरीज मजबूरी में ब्रांडेड दवा ही खरीदें। 
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जेनेरिक दवा लिखने का आदेश महज खानापूर्ति 

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को सिर्फ जेनेरिक दवा लिखने का आदेश है। जेनेरिक दवाइयां मरीज कहां से खरीदेंगे, इस बारे में अधिकारी नहीं सोच रहे। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि जन औषधि केंद्र उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है। 
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जेनेरिक और ब्रांडेड दवा की रेट का अंतर आप भी देख लें 

जेनेरिक दवा का नाम           जन औषधि में कीमत          ब्रांडेड में कीमत 
ऑग्युमेंटिन                       85 रुपये में 6 गोली           10 गोली 201 रुपये
मेटफॉर्मिन ग्लीमिप्राइड         10 गोली 24 रुपये           15 गोली 141 रुपये
मेटोप्रोलोल                       10 गोली 22.50 रुपये         15 गोली 67 रुपये 
एमलोडीपीन                     10 गोली 21 रुपये              30 गोली 87 रुपये 

मरीज लाचार, अधिकारियों को कोई फिक्र नहीं  

अस्पताल प्रशासन को क्या फर्क पड़ता है कि मरीज को सस्ती दवा मिल रही या महंगी। गरीब एक-एक रुपये जोड़कर इस महंगाई में घर चला रहा है। जहां उसे रियायत मिल सकती है वहां भी अनदेखी की जा रही है। अगर वाकई सरकारी योजनाओं में दम होता तो जन औषधि केंद्र तीन साल तक बंद नहीं रहता।  - ऋषिकांत पाण्डेय, बलटाना 

सस्ती दवा के नाम पर जनता को मूर्ख बनाने का काम किया जा रहा है। जन औषधि केंद्र सिर्फ हाथी के दांत हैं। सस्ती दवा तो दूर दुकान का संचालन तक प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर बना है। जनता के हित से जुड़ी योजनाओं को लेकर हर जगह अनदेखी का आलम है। बंद पड़ा जन औषधि केंद्र इसी का उदाहरण है।  - संतोष मिश्रा, हल्लोमाजरा 

क्या कहते हैं अधिकारी

जन औषधि केंद्र के अलॉटमेंट के संदर्भ में मंत्रालय से दिशा-निर्देश पूछे गए थे। इसमें अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले सकता।  -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32 

जन औषधि केंद्र रेडक्रास सोसाइटी के अंतर्गत संचालित होता है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है जल्द ही मरीजों को सस्ती दवा मिलने लगेगी।  -डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच 16

दोनों अस्पतालों में जन औषधि केंद्र बंद पड़े होने की मुझे जांच करनी पड़ेगी। अगर इतने लंबे समय से बंद हैं, तो जरूर कोई वजह होगी। उस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
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