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अमृतसर: जलियांवाला बाग अब खूबसूरत स्मारक में हो चुका तबदील, आकर्षित हो रहे सैलानी
Wed, 13 Apr 2022 02:14 PM IST
ajay kumar
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 13 Apr 2022 02:14 PM IST
सार
आज से 102 साल पहले 13 अप्रैल, 1919 को अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में मौजूद निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थीं।
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जालियांवाला बाग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
अमृतसर के प्रसिद्ध सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से मात्र आधा किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा बगीचा आज देश के सबसे खूबसूरत स्मारक का रूप धारण कर चुका है। जो बाहरी द्वार से ही सैलानियों को आकर्षित करता है। थ्री डी डाक्यूमेंटरी और लाइट एंड साउंड शो के जरिये यह पर्यटकों को शहीदों से रूबरू करवा रहा है। पहली झलक में जालियांवाला बाग जाकर आप भांप नहीं सकते हैं कि यही वह जगह है, जहां पर विश्व की सबसे बड़ी अमानवीय घटना हुई। इसके प्रवेश द्वार के बाएं शहीद ऊधम सिंह का आदम कद बुत लगाया गया है, जो हर आने वाले सैलानी को देशभक्ति का संदेश देता है।
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करीब 26000 हजार स्क्वायर मीटर में फैले जलियांवाला बाग में 1961 में 45 फुट ऊंचा रेड स्टोन ज्योति के आकार का पिलर उन निर्दोष लोगों की याद में बनाया गया, जो 13 अप्रैल 1919 को इस घटना के शिकार हुए। इस बाग में एक अमर ज्योति है, जो लगातार जलती रहती है। घटना के वक्त लाशों के ढेर से पट गया कुआं आज नए रूप में सैलानियों को इतिहास से रूबरू करवाता है। जिसे शहीदी कुएं के नाम से जाना जाता है।
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जलियांवाला बाग में हुई घटना के बारे जानकारी देती हुई थ्री डी डाक्यूमेंटरी के साथ-साथ लाइट एंड साउंड शो रोजाना यहां दिखाया जाता है। पंजाब की स्थानीय शैली के अनुरूप धरोहर संबंधी विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य इसके अंदर किए गए हैं। नवविकसित उत्तम संरचना के साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है। इस बाग का केंद्रीय स्थल माने जाने वाले ‘ज्वाला स्मारक’ की मरम्मत करने के साथ-साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है।
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यहां स्थित तालाब को एक ‘लिली तालाब’ के रूप में विकसित किया गया है और लोगों को आने-जाने में सुविधा के लिए यहां स्थित मार्गों को भी चौड़ा किया गया है। जालियांवाला बाग हत्याकांड को 103 साल हो गए हैं। देश जालियांवाला बाग की 103वीं बरसी पर शहीदों को याद कर रहा है।
1919 में आज ही के दिन वैसाखी वाले दिन अमृतसर में हुए नृशंस हत्याकांड में हजारों लोगों ने अपनी जान खो दी थी लेकिन ब्रिटिश सरकार के आंकड़ों में सिर्फ 379 की हत्या दर्ज की गई। जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश भारत के इतिहास का काला अध्याय है।
आज से 102 साल पहले 13 अप्रैल, 1919 को अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में मौजूद निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थीं। यह बाग ब्रिटिश शासन के जनरल डायर की बर्बर कहानी कहता नजर आता है। तब हजारों लोग रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा कर रहे थे। इस दौरान जनरल डायर, जो शाम साढ़े चार बजे वहां पहुंचा, उसने बिना किसी चेतावनी अपने 150 सैनिकों को फायर करने के आदेश दिए और अंग्रेजों की गोलियों ने सैकड़ों निर्दोष देशभक्तों को अंधाधुंध गोलीबारी कर मार डाला था।
वहां की दीवारों पर 1600 बुलेट के निशान देखे जा सकते हैं। चीखते, आतंकित भागते निहत्थे बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों की भीड़ पर कुछ ही मिनटों में 1650 राउंड गोलियां दागी गईं, जिनमें कई लोग तो गोलियों से मारे गए तो कई जान बचाने की कोशिश में लोगों की भगदड़ में कुचल कर मारे गए। जान बचाने के लिए बहुत से लोगों ने पार्क में मौजूद कुएं में छलांग लगा दी, जिसे आज शहीदी कुएं के नाम से पुकारा जाता है।