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वो कराहता रहा, किसी ने नहीं सुनी पुकार
अमर उजाला, जालंधर
Updated Tue, 09 Dec 2014 10:12 PM IST
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कबाड़ का काम करने वाला 40 वर्षीय व्यक्ति पांच दिन पहले सूखे कुएं में गिर गया था।
पांच दिन बाद पार्क के चौकीदार ने उसकी आवाज सुनी और उसे बाहर निकाला। कुएं में गिरने से उसकी टांग की हड्डी टूट गई थी और सिर फट गया।
उसे सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया। पीड़ित की पहचान रमेश अरोड़ा पुत्र कृष्ण लाल निवासी बस्ती गुजां के रूप में हुई है।
रमेश अरोड़ा ने बताया कि वह वीरवार रात को आदर्श नगर के मुख्य पार्क वाले कुएं में गिर गया था। वह कुएं के पास पेशाब करने के लिए गया और पैर फिसलने से कुएं में गिर पड़ा।
ऊंचाई से गिरने के कारण उसका एक पैर बुरी तरह मुड़ गया और सिर पर चोट लगने से खून बहने लगा। रमेश ने बताया कि उसमें कुएं से बाहर आने की हिम्मत नहीं थी। वह चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी। भूखा-प्यासा वह पांच दिन तक कुएं में पड़ा रहा।
कुएं में धूप न आने से उसे बेचैनी हो रही थी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। रमेश ने कहा कि सोमवार शाम को पार्क का माली मोटर चलाने आया तो उसने फिर से जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। इस बार उसके कराहने की आवाज माली ने सुन ली।
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उसने लोगों को इकट्ठा कर उसे बाहर निकाला। उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इलाज के बाद उसे अस्पताल देखने आए दोस्तों ने खाना खिलाया।
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पांच दिन बाद पार्क के चौकीदार ने उसकी आवाज सुनी और उसे बाहर निकाला। कुएं में गिरने से उसकी टांग की हड्डी टूट गई थी और सिर फट गया।
उसे सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया। पीड़ित की पहचान रमेश अरोड़ा पुत्र कृष्ण लाल निवासी बस्ती गुजां के रूप में हुई है।
रमेश अरोड़ा ने बताया कि वह वीरवार रात को आदर्श नगर के मुख्य पार्क वाले कुएं में गिर गया था। वह कुएं के पास पेशाब करने के लिए गया और पैर फिसलने से कुएं में गिर पड़ा।
ऊंचाई से गिरने के कारण उसका एक पैर बुरी तरह मुड़ गया और सिर पर चोट लगने से खून बहने लगा। रमेश ने बताया कि उसमें कुएं से बाहर आने की हिम्मत नहीं थी। वह चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी। भूखा-प्यासा वह पांच दिन तक कुएं में पड़ा रहा।
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कुएं में धूप न आने से उसे बेचैनी हो रही थी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। रमेश ने कहा कि सोमवार शाम को पार्क का माली मोटर चलाने आया तो उसने फिर से जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। इस बार उसके कराहने की आवाज माली ने सुन ली।
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उसने लोगों को इकट्ठा कर उसे बाहर निकाला। उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इलाज के बाद उसे अस्पताल देखने आए दोस्तों ने खाना खिलाया।