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जेल से रिहा हुए संत दादूवाल

Tue, 14 Oct 2014 10:42 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/फरीदकोट
ब्यूरो, अमर उजाला/फरीदकोट Updated Tue, 14 Oct 2014 10:42 PM IST
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राज्य सरकार ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले मंगलवार को हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य संत बलजीत सिंह दादूवाल को जेल से रिहा कर दिया गया। करीब डेढ़ माह से फरीदकोट जेल में बंद दादूवाल को 7 अक्तूबर को ही पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी और उन्हें 9 अक्तूबर वीरवार को रिहा किया जाना था।
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उस दिन जिला पुलिस ने जेल से रिहा होते ही उन्हें सीआरपीसी की धारा 107/151 (शांति भंग करने) के तहत दोबारा गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में मंगलवार को एसडीएम श्रुति शर्मा पांडे ने उनकी जमानत मंजूर कर ली और देर शाम उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
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एचएसजीएमसी के सदस्य संत बलजीत सिंह दादूवाल को 22 अगस्त को थाना जैतो क्षेत्र से हथियारों समेत गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन पुलिस ने 5 साल पुराने एक अन्य आपराधिक केस में भी उनकी दोबारा गिरफ्तारी दिखाई और बाद में मानसा में भी दो अन्य पुराने मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया।
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इनमें से तीन मामलों में उन्हें फरीदकोट और मानसा की जिला अदालतों से जमानत मिल गई थी जबकि एक केस में उन्हें 7 अक्तूबर को हाईकोर्ट से जमानत मिली। अगले दिन 8 अक्तूबर को सरकारी अवकाश के चलते उन्हें 9 अक्तूबर को रिहा किया जाना था। उस दिन पुलिस ने जेल से रिहा होते ही उन्हें शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर 17 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जिला पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ दादूवाल के परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई होने से पहले ही जिला पुलिस ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।




हरियाणा चुनाव के चलते जेल में रखा  
जेल से रिहा होते ही दादूवाल ने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें हरियाणा विधानसभा चुनावों के मद्देनजर झूठे केस दर्ज करके जेल में बंद रखा। हालांकि उन्होंने कभी भी राजनीतिक बयानबाजी में हिस्सा नहीं लिया और न ही उन्होंने कभी कानून को हाथ में लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में एचएसजीएमसी का गठन करवाने में उनके भूमिका निभाने की रंजिश के चलते ही बादल परिवार ने उन पर पहले एक झूठा मामला दर्ज किया और बाद में खारिज हो चुके केसों में उनकी दोबारा गिरफ्तारी दिखाई। इन झूठे मामलों की वजह से वे पिछले डेढ़ माह से जेल में बंद रहे। इन केसों में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रचार से रोकने की मंशा से उन्हें दोबारा गिरफ्तार करवाया और अब वहां चुनाव प्रक्रिया के पूरा होते ही रिहा करवा दिया।
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