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पुरानी सरकारों में 10 साल में 30 हजार एकड़ पर अवैध कॉलोनियां तैयार हुईं : चीमा

Sat, 19 Jul 2025 01:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:07 AM IST
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It is the legal right of the accused to get full opportunity to defend himself: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग योजना को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह योजना पूरी तरह किसान हितैषी और आपसी सहमति पर आधारित है। किसी भी किसान से एक इंच भी जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी। जमीन देना और न देना दोनों पूरी तरह किसानों की मर्जी पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि 10 साल में अकाली-भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से मिलीभगत कर भू-माफियाओं ने पंजाब के विभिन्न शहरों में करीब 30 हजार एकड़ जमीन पर अवैध कॉलोनियां बनाईं और अरबों रुपये के घोटाले किए। उसका सीधा लाभ भू-माफिया, बिल्डरों और पिछली सरकारों के मंत्री-विधायकों को हुआ जबकि आमलोगों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ा। इन सबके लिए अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की सरकार जिम्मेदार है।
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चीमा ने इसे लेकर कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल को घेरा और कहा कि पिछली सरकारों के दौरान करीब डेढ़ दशक में पंजाब में हजारों अवैध कॉलोनियां काटी गईं। वहां सड़क, बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं। लाखों लोगों को रजिस्ट्री को लेकर परेशानी हुई। सैकड़ों लोगों के लाखों रुपये बिल्डरों के चक्कर में फंस गए, जिसके कारण उनके घर तबाह हो गए। आम लोगों को हुई परेशानियों को देखते हुए आप सरकार ने खुद लैंड पूलिंग पॉलिसी के माध्यम से जमीन एक्वायर करने का फैसला किया। इससे किसानों और आम लोगों दोनों को फायदा होगा।
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किसानों को प्रति एकड़ 1000 गज आवासीय जमीन और 200 गज व्यावसायिक प्लॉट मिलेगा, जिसकी कीमत अगले कुछ वर्षों में वर्तमान कीमत से करीब चार गुना होगी। चीमा ने कहा कि इस योजना से किसानों को एक और बड़ा फायदा यह होगा कि सरकार जमीन एक्वायर करेगी तो उन्हें आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक सुरक्षा भी मिलेगी।

योजना के अंतर्गत आने वाले सभी किसानों को कम से कम 3 साल या जमीन विकसित होने तक हर साल 50 हजार प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी, ताकि निर्माण के दौरान उन्हें कोई आर्थिक परेशानी न हो। पिछली सरकारों के दौरान बिल्डर या भू-माफिया किसानों से औने-पौने दामों पर जबरदस्ती जमीन ले लेते थे और उन्हें बाद में किसी भी तरह की कोई आर्थिक सहायता नहीं करते थे। ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं।
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