हर मंदिर का मसला आएगा कोर्ट तो हम तो चंदे का हिसाब ही लगाते रह जाएंगे: हाईकोर्ट
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अंबाला के संभालखा स्थित ठाकुरद्वारा मंदिर में लेन-देन के हिसाब में खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार लिए गए संज्ञान पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रभाव को लेकर एमिक्स क्यूरी को कोर्ट की सहायता के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर हर छोटे-छोटे मंदिर के मामले में संज्ञान लेना पड़ा तो हाईकोर्ट चंदे का हिसाब करते ही रह जाएगा।
पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने मामले में सीनियर एडवोकेट विकास बहल, एडवोकेट अमनदीप सिंह व प्रियंका कांसल को एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया है। मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट विकास बहल ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथपुरी मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि कोई भी दो व्यक्ति किसी धार्मिक संस्थान में अनियमितता की शिकायत कर सकते हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश इसकी जांच करवाएंगे और यदि इसमें खामियां पाई जाती हैं तो इसे हाईकोर्ट में भेजा जाएगा। हाईकोर्ट इसका संज्ञान लेकर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करेगा। ऐसी ही एक शिकायत अंबाला के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को मिली थी जिसमें अंबाला के ठाकुरद्वारा मंदिर में जमीनों को फर्जी तरीके से बेचने और अकाउंट मेंटेन नहीं करने के आरोप थे।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ बातें स्पष्ट होनी जरूरी हैं कि किस प्रकार के मंदिरों के मामले में ये आदेश लागू होते हैं। क्या हर छोटे-छोटे और घरों में मंदिर बनाकर इसे चलाने वाले भी इस श्रेणी में आते हैं। इस पर एमिक्स क्यूरी विकास बहल ने कहा कि इस प्रकार के विवाद मामले में सिविल कोर्ट का विकल्प मौजूद होता है तो उसे ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पहले यह तय किया जाना चाहिए कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश किस आधार पर जांच करें और किन मामलों को हाईकोर्ट भेजें। हाईकोर्ट ने इस पर बहल को सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट को देखने के बाद अगली सुनवाई पर इस बारे में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर हाईकोर्ट में सौंपने के आदेश दिए हैं।