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अब इजराइल की तकनीक से होगी खेतों में सिंचाई, देखिए ऐसे करेगी काम

Sun, 20 Nov 2016 10:28 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 20 Nov 2016 10:28 AM IST
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israel technique will use to Irrigate farming in punjab haryana
farming
हरियाणा और पंजाब में गिरते जलस्तर की समस्या के चलते धरती की प्यास को अब इस्रराइली तकनीक से सीवरेज के ट्रीटेड पानी से बुझाया जाएगा। इस्रराइली दूतावास से सीआईआई एग्रो टेक 2016 में विशेष बातचीत के दौरान यह जानकारी दी गई।
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सेक्टर-17 में आयोजित चार दिवसीय सीआईआई एग्रोटेक 2016 के दौरान कृषि के नवीन आयाम और उन्नत तकनीकों को लेकर विभिन्न तरह के आयोजनों के बीच ही इस्रराइली दूतावास की ओर से काउंटर रखा गया था। इस काउंटर के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई।
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इस दौरान इस्रराइल एंबेसी के इस्रराइल बिजनेस प्रमोशन सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट ने बताया कि भारत सरकार और इस्रराइल दोनों इस समय सीवरेज वाटर को ट्रीट कर इसे खेती में सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की इस्रराइली तकनीक को भारत में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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इस्रराइल में कुल सीवरेज वाटर का 85 प्रतिशत हिस्सा सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि भारत में अभी इस दिशा में कोई बड़े स्तर पर काम नहीं किया गया है।

दोनों देश 10 वर्षों से मिलकर कर रहे खेती सुधार पर काम

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​खेती
भारत और इस्रराइल पिछले 10 वर्ष से एक साथ मिलकर भारत में खेती सुधारों के लिए काम कर रहें हैं और इस्रराइल भारत के साथ अपनी उन्नत कृषि तकनीकों को सांझा कर रहा है। सीवरेज वाटर की दिशा में करार होना दोनों देशों के इस दिशा में बढ़ने को लेकर बड़ा कदम होगा।

उन्होंने कहा कि अभी भी इस्रराइल में कृषि से संबंधित होने वाले शोध से भारत को लाभ मिल रहा है और भारत के साथ हो रहे करार से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और घनिष्ट होंगे। इस तकनीक के इस्तेमाल का सीधा फायदा उन किसानों को होगा, जो अभी भी सिंचाई के लिए नहरों व आसमान के रहमो करम पर निर्भर हैं।

शहरों में भू जल के लगातार तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और कृषि के लिए ट्यूबवेलों के इस्तेमाल के चलते भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में शहरों के नजदीक की कृषि भूमि के लिए पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन रहा है।

इस्रराइल की तकनीक शहरों के नजदीक की कृषि भूमि के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है क्योकि शहरों से निकलने वाले सीवरेज पानी को ही उपचारित कर सिंचाई के लिए इस्तेमाल करना एक ओर लागत को घटाएगा वहीं दूसरी ओर सीवरेज वाटर का निपटारा करने का भी कारगर उपाय बनेगा।

 
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