इराक में बंधक भारतीयों को रोकने के लिए नई चाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इराक में महीनों से बंधक बने भारतीयों को अपने जाल में फंसाए रखने के लिए कंपनियों ने नया दांव चला है। कंपनी ने एंबेसी के अधिकारियों से कहा है कि यदि कर्मचारी वहां रुक कर काम करेंगे, तो उन्हें पूरा वेतन दे दिया जाएगा। कर्मचारियों को बंधक बनाने की आरोपी कंस्ट्रक्शन कंपनी चाहती है कि भारतीय कर्मचारी वापस नहीं जाएं।
कंपनी इन सभी से अपनी विभिन्न साइटों पर काम करवाना चाहती है। अपनी इसी चाहत को पूरा करने के लिए कंपनी ने महीनों से इन बंधकों को वेतन नहीं दिया है। अभी इस कंपनी में 165 भारतीय फंसे है। इन सभी को कंपनी से छह माह से एक साल तक का वेतन लेना है। लेकिन, कंपनी इन बंधकों को पूरा वेतन नहीं देना चाहती।
कंपनी ने इन बंधकों से साफ कहा है कि यदि वे भारत जाते हैं, तो कंपनी उन्हे कुल वेतन का सिर्फ 30 फीसदी ही देगी। इसके साथ ही शर्त रखी है कि यदि बंधक वहीं रहकर कंपनी के लिए काम करते रहेंगे, तो उन्हें पूरा बकाया वेतन देगी। कंपनी वादा कर रही है कि भविष्य का वेतन भी समय पर देगी। इसके बाद कंपनी ने फैसला उसके यहां फंसे भारतीयों पर छोड़ दिया है कि वे देश लौटना चाहते हैं या वहीं रहकर पूरा वेतन लेना चाहते हैं।
अंबेसी अफसरों को बनाना चाहती थी साजिश का हिस्सा
भारतीयों को इराक में बंधक बनाने वाली कंपनी उन्हें वहीं रखने की साजिश रच रही है। कंपनी ने अपनी योजना को सफल बनाने के लिए इराक में भारतीय दूतावास के अधिकारियों को भी इसका हिस्सा बनाना चाहा था।
इस योजना के तहत ही कंपनी ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में कहा था कि अधिकारी भारतीय बंधकों से पूछें कि कौन भारत जाना चाहता है और कौन वहां रहकर काम करना चाहता है। अधिकारी कंपनी की चाल समझ गए और उन्होंने इसका फैसला भारतीयों पर ही छोड़ दिया है।
बंधकों से भी कर रही है बात
इराक में बंधक भारतीयों ने बताया कि कंपनी अभी भी चाहती है कि सभी बंधक भारत न लौटें और वहीं रहकर कंपनी के लिए काम करें।
इराक में बंधक बने भारतीयों ने बताया कि इसके लिए कंपनी के अधिकारी उनसे संपर्क कर रहे हैं और वहीं रहने की बात कह रहे हैं। उनसे वादा किया जा रहै कि कंपनी भविष्य में उन्हें पूरा वेतन दिया जाएगा।
हालांकि, बंधक बने भारतीय अपना वेतन लेकर भारत लौटने का मन बना चुके हैं। कंपनी उनकी इसी बात से नाराज है और पूरा वेतन देने के मूड में नहीं है।
बंधकों से भिड़े दुकानदार
इराक में 165 बंधक कंपनी के परिसर में रहते हैं। कंपनी के आदेश पर ही उन्हें आसपास की दुकानों से उधार में राशन, दवाएं, कपड़े आदि सामान मिल जाता है। अब दुकानदारों को पता चल गया है कि बंधक अपना वेतन लेकर भारत जाना चाहते हैं।
इसके बाद शनिवार देर शाम इराक में कुछ बंधकों का उधारी चुकाने को लेकर दुकानदारों से झगड़ा हो गया। बंधकों की उधारी छह माह से एक साल तक की है। इस उधारी को वसूलने के चक्कर में ही बंधकों और दुकानदारों में नोकझोंक हुई।
दुकानदारों ने कुछ बंधकों के साथ हाथापाई की और उनकी जैकेट तक उतरवा ली। अन्य बंधकों के हस्तक्षेप करने के बाद मामला शांत हुआ। सभी ने दुकानदारों को आश्वासन दिया कि कोई भी उनका पैसा लेकर यहां से नहीं जाएगा। इसके बाद ही दुकानदार शांत हुए।