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112 एडीए व 41 डीडीए की नियुक्ति प्रक्रिया एक माह में पूरी करे पंजाब सरकार : हाईकोर्ट
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विज्ञापन जारी होने के बाद भर्ती के बीच में नियमों को बदलने के लिए दी गई थी चुनौती
अनुभव के हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने का पीपीएससी का आदेश रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की अदालतों में 112 एडीए (एडीशनल डिस्ट्रिक्ट अटार्नी) और 41 डीडीए के पदों पर की जा रही भर्ती को हरी झंडी देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे 1 माह में पूरी करने का आदेश दिया है।
ज्योत्सना रावत व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब की अदालतों में 112 एडीए व 41 डीडीए के पदों को भरने के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसके बाद लिखित परीक्षा को भी वह पास कर चुके हैं। इस दौरान आयोग ने सफल आवेदकों को नियुक्ति के लिए अजीब शर्त लगा दी है। सभी सफल आवेदकों को वकालत के अनुभव के तौर पर हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने को कहा है, जिससे साबित हो की वो अदालतों में पेश होते थे। किसी भी भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह शर्त विज्ञापन में नहीं थी और जब लिखित परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है, तब यह शर्त जोड़ी गई है।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बार एसोसिएशन द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र उसी तरह से मान्य होता है, जिस प्रकार न्यायिक व अर्धन्यायिक अथॉरिटी का। इस मामले में पीपीएससी ने उम्मीदवारों का चयन कर उनके नाम की सिफारिश सरकार को भेजी थी। भर्ती में धांधली या किसी तरह का दोष न होने की स्थिति में सरकार को चयनित लोगों को नियुक्ति देने में देर नहीं करनी चाहिए। वकील को अनुभव के हर साल के 6 अंतरिम आदेश, जिनमें उनकी हाजिरी हो, पेश करने का आदेश सही नहीं है। सरकार शायद सही उद्देश्य के लिए गलत तरीका इस्तेमाल कर रही है। हाईकोर्ट ने ऐसे में पीपीएससी की शर्त को खारिज करते हुए सरकार को एक माह में भर्ती पूरी करने का आदेश दिया है।
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अनुभव के हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने का पीपीएससी का आदेश रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की अदालतों में 112 एडीए (एडीशनल डिस्ट्रिक्ट अटार्नी) और 41 डीडीए के पदों पर की जा रही भर्ती को हरी झंडी देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे 1 माह में पूरी करने का आदेश दिया है।
ज्योत्सना रावत व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब की अदालतों में 112 एडीए व 41 डीडीए के पदों को भरने के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसके बाद लिखित परीक्षा को भी वह पास कर चुके हैं। इस दौरान आयोग ने सफल आवेदकों को नियुक्ति के लिए अजीब शर्त लगा दी है। सभी सफल आवेदकों को वकालत के अनुभव के तौर पर हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने को कहा है, जिससे साबित हो की वो अदालतों में पेश होते थे। किसी भी भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह शर्त विज्ञापन में नहीं थी और जब लिखित परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है, तब यह शर्त जोड़ी गई है।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बार एसोसिएशन द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र उसी तरह से मान्य होता है, जिस प्रकार न्यायिक व अर्धन्यायिक अथॉरिटी का। इस मामले में पीपीएससी ने उम्मीदवारों का चयन कर उनके नाम की सिफारिश सरकार को भेजी थी। भर्ती में धांधली या किसी तरह का दोष न होने की स्थिति में सरकार को चयनित लोगों को नियुक्ति देने में देर नहीं करनी चाहिए। वकील को अनुभव के हर साल के 6 अंतरिम आदेश, जिनमें उनकी हाजिरी हो, पेश करने का आदेश सही नहीं है। सरकार शायद सही उद्देश्य के लिए गलत तरीका इस्तेमाल कर रही है। हाईकोर्ट ने ऐसे में पीपीएससी की शर्त को खारिज करते हुए सरकार को एक माह में भर्ती पूरी करने का आदेश दिया है।
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