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पंजाब: मंत्रियों, विधायकों के सुरक्षा वाहनों में खर्च हुए ईंधन की जांच शुरू, बढ़ती कीमतों को देखते हुए खर्च में हो सकती है कटौती
Sat, 14 May 2022 02:28 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 14 May 2022 02:28 AM IST
सार
संसदीय कार्य शाखा जांच और विवरण एकत्र कर रही है। तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए खर्च में सरकार कटौती कर सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
पंजाब सरकार ने विधायकों और मंत्रियों के सुरक्षा वाहनों के ईंधन में हुए खर्च की जांच शुरू कर दी है। संसदीय कार्य शाखा ने इस संबंध में विवरण एकत्र करना शुरू कर दिया है ताकि प्रत्येक विधायक और मंत्री के निजी सुरक्षा वाहन के ईंधन और मरम्मत की लागत का पता लगाया जा सके। मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए तेल की लागत बढ़ सकती है और आगे कटौती की जा सकती है।
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पंजाब सरकार ने एक किफायती अभियान भी चलाया है, जिसके तहत हर तरह के खर्चे कम किए जा रहे हैं। पंजाब सरकार के सूत्रों के अनुसार विधायकों को हर महीने 500 लीटर तेल मिलता था, जो पूर्व की सरकारों द्वारा कम कर दिया गया था। अब नई सरकार के कई विधायकों द्वारा ईंधन खर्च में वृद्धि की मांग की है।
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एक बार ये आंकड़े प्राप्त हो जाने के बाद, सरकार इस मामले में बजट को लेकर कोई फैसला करेगी। संसदीय कार्य विभाग ने 19 अप्रैल और अब 12 मई को फिर से पत्र जारी कर विधायकों और मंत्रियों के निजी सुरक्षा वाहनों पर खर्च का ब्योरा मांगा है। पंजाब सरकार ने अनुमति दी है कि यदि कोई विधायक या मंत्री अपने निजी वाहन का उपयोग करना चाहता है, तो उससे 15 रुपये प्रति किमी शुल्क लिया जाता है।
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कांग्रेस के शासन के दौरान तत्कालीन मंत्रियों ने अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल किया। पता चला है कि ज्यादातर विधायकों ने शिकायत की है कि उन्हें पुराने वाहन दिए गए हैं लेकिन आप सरकार फिलहाल नए वाहन नहीं खरीद रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए अनावश्यक सुरक्षा वापस लेना शुरू कर दिया है, जिसके तहत बड़ी संख्या में सुरक्षा वाहनों को भी वापस ले लिया गया है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पंजाब सरकार का ईंधन खर्च काफी बढ़ गया है। पुराने वाहनों की मरम्मत का खर्च भी बढ़ गया है।