चंडीगढ़ : नशा तस्करी के मामलों में बरती लापरवाही, छह थाना प्रभारियों के खिलाफ होगी जांच
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नशे का जाल खत्म करने में जुटी चंडीगढ़ पुलिस के छह थाना प्रभारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। चंडीगढ़ में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों से नशा किसी न किसी तरह पहुंचता रहता है। पुलिस समय समय पर तस्करों को गिरफ्तार भी करती है। इनसे बरामद नशे को मालखाने में रखवाया जाता है। यहीं से थाना प्रभारियों की लापरवाही शुरू होती है।
असल में तस्करों से बरामद नशे को मालखाने में रखवाने से पहले संबंधित दस्तावेजों पर थाना प्रभारी के हस्ताक्षर होना जरूरी हैं। लेकिन चंडीगढ़ में कई ऐसे मामले मिले, जिनमें प्रभारी के बजाय या तो सब इंस्पेक्टर ने हस्ताक्षर किए या बिना हस्ताक्षरों के ही केस को आगे बढ़ा दिया गया था।
ऐसी ही लापरवाही बरतने के मामले में अब अब छह थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है। जिनके खिलाफ जांच शुरू हुई है, उनमें सेक्टर-34 थाना प्रभारी बलदेव कुमार, सेक्टर-36 रणजोत सिंह, सेक्टर-39 अमनजोत सिंह, सेक्टर-11 राजीव कुमार, आईटी पार्क लखवीर सिंह और मलोया तत्कालीन प्रभारी हरिंदर सिंह सेखों शामिल हैं। आलाअधिकारियों के इस कदम से पुलिस महकमे में हड़कंप है।
औरों पर भी आ सकती है आंच
सूत्रों के अनुसार, जिला अदालत ने ऐसे ही मामलों में कुछ थाना प्रभारियों के खिलाफ नोटिस भेजा था। इसके आधार पर पुलिस के आला अधिकारियों ने अपने स्तर पर इसकी जांच शुरू की, तो बड़े स्तर पर लापरवाही सामने आई। अब ऐसे सभी थाना प्रभारियों को विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा। साथ ही इस लापरवाही पर अपना जवाब भी देना होगा। सूत्रों का कहना है कि कुछ और थाना प्रभारियों पर आला अधिकारियों की नजर है। जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
कमजोर केस का अपराधियों को मिलता है फायदा
आला अधिकारियों के अनुसार, नशा तस्करी के मामले में पकड़े गए आरोपियों और नशे की मात्रा में धारा 55 के तहत कार्रवाई की जाती है। चूंकि आरोपियों और उनसे बरामद नशे को अदालत में पेश करना होता है, ऐसे में जांच पूरी होने के बाद थाना प्रभारी उस पर अपने हस्ताक्षर करते हैं। ताकि केस के सभी साक्ष्य स्पष्ट रहें। लेकिन कई मामलों में थाना प्रभारियों के हस्ताक्षर ही नहीं मिले। इससे केस अदालत में कमजोर हुआ और अपराधी बरी हो गए।
इस तरह की विभागीय जांच से टूटता है मनोबल
इस तरह की कार्रवाई पर एक थाना प्रभारी का कहना है कि थाना प्रभारियों की दिनचर्या काफी व्यस्त होती है। उन्हें इस तरह की जांच पूरा करने का समय नहीं मिल पाता। इस कारण कई बार जांच अधूरी रह जाती है। उनकी जगह थाने में तैनात अन्य कोई अधिकारी अपने स्तर पर इसकी जांच पूरी करता है। यही नहीं, कई बार थाना प्रभारी के छुट्टी पर होने के कारण भी दूसरे अफसर हस्ताक्षर कर देते हैं। इस तरह की जांच से थाना प्रभारियों का मनोबल टूटता है।
नशा तस्करी के केसों में लापरवाही बरतने पर छह थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय जांच खोली गई है। जल्द ही सारी सच्चाई सामने आएगी। सभी से इस बारे में पूछताछ की जाएगी। -कुलदीप सिंह चहल, एसएसपी, चंडीगढ़