तीन साल बाद फिर बहिबल गोलीकांड की जांच शुरू, सुखपाल खैरा ने सरकार पर साधा निशाना
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पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने तीन साल पुराने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड की जांच का काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एसआईटी प्रमुख और एडीजीपी प्रबोध कुमार अपनी टीम के तीन सदस्यों आईजी अरुणपाल सिंह, एसएसपी कपूरथला सतिंदर सिंह और कमांडेंट पीआरटीसी जहानखेला भूपिंदर सिंह के साथ फरीदकोट पहुंचे और बहिबल कलां और कोटकपूरा में घटनास्थलों का जायजा लिया।
साथ ही एसआईटी की तरफ से इन दोनों घटनाओं के संदर्भ में थाना बाजाखाना व थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज चार एफआईआर का रिकार्ड हासिल किया और इन मामलों की जांच से जुड़े रहे पुलिस अधिकारियों के जानकारी जुटाई। बताया जा रहा है कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आरोपी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से इन मामलों की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है।
साथ ही कुछ दिन पहले सात अक्तूबर को कोटकपूरा से बरगाड़ी तक आयोजित इंसाफ मार्च में हजारों लोगों की शमूलियत से चिंतित सरकार ने एसआईटी को जांच तेज करने की हिदायतें दी है जिसके बाद ही एसआईटी ने शुक्रवार को फरीदकोट पहुंच कर जांच का काम शुरू किया है। जानकारी के अनुसार जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की जांच के लिए 11 सितंबर को एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी को फिलहाल बहिबल कलां व कोटकपूरा की घटनाओं से संबंधित चार एफआईआर की जांच सौंपी गई है। इनमें से दो एफआरआई, पुलिस ने घटना वाले दिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की थी जबकि दो एफआईआर, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज है। पुलिस अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर में से बहिबल कलां गोलीकांड के संदर्भ में थाना बाजाखाना की एफआईआर नंबर 130 शामिल है।
जिसमें 21 अक्तूबर 2015 को तत्कालीन एसआईटी प्रमुख की शिकायत पर अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या के आरोप में कार्रवाई की गई थी जिसमें पिछले माह ही एसएसपी मोगा रहे चरनजीत सिंह शर्मा समेत चार पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है जबकि कोटकपूरा गोलीकांड के संदर्भ वाली एफआईआर नंबर 129 को पुलिस ने सात अगस्त 2018 को जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर दर्ज किया है। जांच करने पहुंची एसआईटी के प्रमुख प्रबोध कुमार ने कहा कि उनकी तरफ से ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ दोनों घटनाओं की जांच की जाएगी और सरकार की तरफ तय समय अवधि में जांच को मुकम्मल कर लिया जाएगा।
दोषी पुलिस अफसरों को बचने का रास्ता दे रही है सरकार
आम आदमी पार्टी के बागी विधायक सुखपाल खैरा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार बेअदबी और फायरिंग के दोषी पुलिस अफसरों को बचने का रास्ता दे रही है। सरकार पूरी तरह आरोपियों के साथ मिली हुई है। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में खैरा ने कहा कि दोषियों को सजा देने की प्रक्रिया में सरकार शातिराना रवैया अपना रही है। उन्हें बचने को सेफ पैसेज मुहैया करा रही है कि अदालत के जरिए किसी तरह राहत ले लो।
एडवोकेट जनरल की नाक के नीचे से आईपीसी की धारा 302 के सभी आरोपी जमानत ले गए। पहले चार पुलिस अफसर, अब पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी को भी राहत मिल गई। खैरा ने आरोप लगाया कि यह कैप्टन सरकार की मर्जी के बिना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कैप्टन ने 15 दिन पहले राजनाथ सिंह से मुलाकात की, उसके बारे में खुलासा करें।
उन्हें केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि दोषियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करनी है। बादलों को भाजपा बचा रही है। कैप्टन के दामाद पर सौ करोड़ की धोखाधड़ी के केस में सीबीआई का शिकंजा है, इसलिए वह केंद्र के कहने पर चल रहे हैं। जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट जून में आ गई थी, पर अब तक कुछ नहीं हुआ। हमने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था। 14 को बरगाड़ी में भोग में शामिल होंगे, उसके बाद एक्शन कमेटी की बैठक में अगली रणनीति तय की जाएगी। खैरा ने कहा कि अगर बादल सही थे तो उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मियों को क्यों नहीं पकड़ा।
12 विधायकों से की साथ आने की अपील
सुखपाल खैरा ने कहा कि दिल्ली का प्रयोग फेल हो गया है। जो 12 विधायक कहते थे कि हम दिल्ली हाईकमान के हैं, वे तीसरा विकल्प बनने में रुकावट बन रहे हैं। वे हमारे साथ आएं ताकि पंजाब का भविष्य बनाया जा सके। खैरा ने कहा कि वह कोई सियासी पार्टी या पंथक प्लेटफार्म नहीं बनाने जा रहे हैं। यह इंसाफ की लड़ाई है, उसमें पहले भी शामिल थे। उनके साथी विधायक ही कहते थे कि बरगाड़ी मत जाओ, अब खुद वहां गए हैं।